टीवीके के वीएस बाबू ने एमके स्टालिन को हराकर तमिलनाडु की राजनीति में मचाई हलचल

Sandeep Kumar | May 04, 2026, 18:25 IST
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vs babu defeats mk stalin
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वीएस बाबू ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को हराकर कोलाथुर विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत हासिल की। बाबू पहले डीएमके के वफादार थे, लेकिन अब उन्होंने टीवीके पार्टी से चुनाव लड़ा और स्टालिन की ताकतवर स्थिति को चुनौती दी।

News in Short

  • एमके स्टालिन को कोलाथुर सीट पर वीएस बाबू ने हराया।
  • बाबू की रणनीति ने उन्हें 8 हजार वोटों से जीत दिलाई।
  • बाबू पहले स्टालिन के वफादार थे, बाद में विपक्षी नेता बने।
  • स्टालिन की हार को डीएमके के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
  • वीएस बाबू का राजनीतिक करियर शिक्षा से ज्यादा सियासत की समझ पर आधारित है।

News in Detail

तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन (CM MK Stalin ) की हार ने राजनीति में हलचल मचा दी। 2025 विधानसभा चुनाव में उन्हें कोलाथुर सीट से हार का सामना करना पड़ा। वह 15 साल से इस सीट पर जीतते आ रहे थे। इस बार उन्हें टीवीके (TVK ) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8 हजार वोटों से हराया। वीएस बाबू ने इस जीत से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।

स्टालिन के 'वफादार' से विपक्षी नेता

वीएस बाबू पहले एमके स्टालिन के वफादार थे। 2011 में जब स्टालिन ने कोलाथुर सीट से चुनाव लड़ा, बाबू को चुनाव प्रभारी बनाया गया था। वह डीएमके के प्रमुख नेता थे और स्टालिन के साथ पार्टी के कामकाज देखते थे। बाद में बाबू ने डीएमके छोड़ी और एआईएडीएमके में शामिल हो गए। फरवरी 2026 में वह टीवीके में शामिल हुए और उसी पार्टी से स्टालिन के खिलाफ चुनाव लड़ा।

चुनावी रणनीति और टीवीके की ताकत

वीएस बाबू की राजनीति की सफलता को समझने के लिए उनकी जमीनी राजनीति को देखना जरूरी है। बाबू ने चुनावी रणनीति को सटीक तरीके से लागू किया और टीवीके पार्टी की ताकत को साबित किया। पार्टी के प्रमुख एक्टर विजय ने बाबू पर विश्वास जताया और उन्हें स्टालिन के खिलाफ खड़ा किया। बाबू ने अपनी जीत से यह साबित कर दिया कि वह सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी हैं।

स्टालिन की हार

एमके स्टालिन की हार को डीएमके के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 15 सालों से इस सीट पर कब्जा करने वाले स्टालिन ने 2021 के चुनाव में 60 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल किए थे। लेकिन 2025 में उनका यह दबदबा टूट गया। स्टालिन की हार न केवल उनके व्यक्तिगत लिए, बल्कि उनकी पार्टी के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। इस हार ने सवाल उठाया है कि क्या डीएमके की स्थिति में अब बदलाव आएगा।

कौन हैं वीएस बाबू

वीएस बाबू का राजनीतिक करियर बहुत ही दिलचस्प है। उन्होंने केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन वह राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं। उनकी जमीनी राजनीति पर मजबूत पकड़ है और वह अपनी बातों को समझाकर चुनावी मैदान में उतरते हैं। बाबू की यह जीत इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा से ज्यादा जरूरी सियासत की समझ और जनता से जुड़ाव होता है।

FAQ

  1. वीएस बाबू ने किसे हराया?
    वीएस बाबू ने तमिलनाडु की कोलाथुर विधानसभा सीट से चुनाव जीता और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को हराया।
  2. वीएस बाबू की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
    वीएस बाबू ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन वह सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं। वह पहले डीएमके के सदस्य थे, फिर एआईएडीएमके और अब टीवीके में शामिल हुए हैं।
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