गर्मी में शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाने के पीछे क्या है धार्मिक मान्यता, जानें सही नियम
Kaushiki | May 23, 2026, 13:17 IST
shivling
गर्मी के मौसम में शिवलिंग पर ठंडा जल और गंगाजल चढ़ाने का विशेष महत्व है। तांबे या चांदी के बर्तन से जल चढ़ाने से महादेव प्रसन्न होते हैं। जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा, सही नियम, वर्जित चीजें और पूजा के अचूक मंत्र।
शिव पूजा के नियम: भीषण गर्मी का दौर शुरू हो चुका है। इस मौसम में इंसान ही नहीं, भगवान को भी शीतलता की जरूरत होती है। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ के महीने का बड़ा महत्व है।
इस महीने में भगवान विष्णु के साथ शिव जी की भी पूजा होती है। गर्मी के दिनों में शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इससे महादेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
जल चढ़ाने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि जो भक्त ठंडे जल से अभिषेक करता है, उसे आरोग्य मिलता है। उसकी आयु लंबी होती है और घर में सुख-शांति आती है। जल में गंगाजल मिलाना और भी अच्छा माना जाता है। इससे पूजा का फल दोगुना हो जाता है।
![Shivling water offering benefits। शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं - News18 हिंदी]()
पौराणिक कथा के मुताबिक, शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है। इसके पीछे एक बेहद रोचक कथा छिपी हुई है। पुराने समय में देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। उस मंथन से चौदह रत्न निकले थे।
मंथन के दौरान एक भयंकर कालकूट विष भी निकला था। उस विष की गर्मी से पूरी सृष्टि जलने लगी थी। संसार को बचाने के लिए भगवान शिव आगे आए। उन्होंने उस विष को अपने कंठ में रोक लिया।
विष के कारण शिव जी का कंठ नीला पड़ गया। तभी से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। विष की वजह से उनके शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया। उनके पूरे बदन में तेज जलन होने लगी थी।
भगवान शिव की जलन को शांत करना बहुत जरूरी था। तब सभी देवताओं और ऋषि-मुनियों ने उन पर ठंडा जल चढ़ाया। ठंडे जल के प्रभाव से विष की गर्मी शांत हुई। तभी से शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
![Shivaling]()
ज्येष्ठ माह मेंशिवलिंग (shivling) पर जल चढ़ाने के लिए बर्तन का सही होना जरूरी है। शास्त्रों के मुताबिक, हमेशा तांबे या चांदी के लोटे का उपयोग करें। इन धातुओं को पूजा के लिए शुद्ध माना गया है। भूलकर भी लोहे के बर्तन का उपयोग न करें।
आजकल लोग प्लास्टिक की बोतलों से जल चढ़ा देते हैं। यह तरीका शास्त्रों में बिल्कुल गलत है। प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों से शिव जी नाराज हो सकते हैं। इसलिए पारंपरिक बर्तनों का ही प्रयोग करें।
पूजा की सामग्री में भी सावधानी बरतनी चाहिए। शिव जी को बेलपत्र और भांग बहुत प्रिय हैं। धतूरा और आंकड़े के फूल भी उन्हें जरूर चढ़ाएं। चंदन का तिलक लगाने से महादेव शांत होते हैं।
लेकिन कुछ चीजें शिव पूजा में वर्जित मानी गई हैं। शिव जी को कभी भी केतकी के फूल न चढ़ाएं। इसके साथ ही तुलसी का पत्ता भी कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। इससे आपकी पूजा खंडित हो सकती है।
![महाशिवरात्रि: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय न करें ये 4 गलतियां, जानें सही नियम - Maha shivratri 2025 date never make these four mistakes while offer water to shivling tvisu]()
शास्त्रों के मुताबिक, मंदिरों में भगवान की पूरी परिक्रमा करने का नियम है। लेकिन शिव मंदिर में यह नियम पूरी तरह बदल जाता है। शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। भक्तों को हमेशा आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। शिवलिंग की जलधारी को लांघना मना होता है।
जलधारी तक जाकर वापस लौट आना चाहिए। इसे ही शिव जी की आधी परिक्रमा कहा जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप बहुत असरदार होता है। जल चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते रहें।
यह मंत्र बहुत सरल और बेहद शक्तिशाली माना जाता है। इसके जाप से मन शांत होता है। यदि कोई गंभीर बीमारी है, तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। यह मंत्र सेहत को अच्छा बनाए रखता है। श्रद्धा से किया गया जाप हर मनोकामना को पूरा करता है। महादेव अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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इस महीने में भगवान विष्णु के साथ शिव जी की भी पूजा होती है। गर्मी के दिनों में शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इससे महादेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
जल चढ़ाने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि जो भक्त ठंडे जल से अभिषेक करता है, उसे आरोग्य मिलता है। उसकी आयु लंबी होती है और घर में सुख-शांति आती है। जल में गंगाजल मिलाना और भी अच्छा माना जाता है। इससे पूजा का फल दोगुना हो जाता है।
Shivling water offering benefits। शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं - News18 हिंदी
क्यों चढ़ाया जाता है शिवलिंग पर ठंडा जल
मंथन के दौरान एक भयंकर कालकूट विष भी निकला था। उस विष की गर्मी से पूरी सृष्टि जलने लगी थी। संसार को बचाने के लिए भगवान शिव आगे आए। उन्होंने उस विष को अपने कंठ में रोक लिया।
विष के कारण शिव जी का कंठ नीला पड़ गया। तभी से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। विष की वजह से उनके शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया। उनके पूरे बदन में तेज जलन होने लगी थी।
भगवान शिव की जलन को शांत करना बहुत जरूरी था। तब सभी देवताओं और ऋषि-मुनियों ने उन पर ठंडा जल चढ़ाया। ठंडे जल के प्रभाव से विष की गर्मी शांत हुई। तभी से शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
Shivaling
भगवान शिव का पूजन कैसे करें
आजकल लोग प्लास्टिक की बोतलों से जल चढ़ा देते हैं। यह तरीका शास्त्रों में बिल्कुल गलत है। प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों से शिव जी नाराज हो सकते हैं। इसलिए पारंपरिक बर्तनों का ही प्रयोग करें।
पूजा की सामग्री में भी सावधानी बरतनी चाहिए। शिव जी को बेलपत्र और भांग बहुत प्रिय हैं। धतूरा और आंकड़े के फूल भी उन्हें जरूर चढ़ाएं। चंदन का तिलक लगाने से महादेव शांत होते हैं।
लेकिन कुछ चीजें शिव पूजा में वर्जित मानी गई हैं। शिव जी को कभी भी केतकी के फूल न चढ़ाएं। इसके साथ ही तुलसी का पत्ता भी कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। इससे आपकी पूजा खंडित हो सकती है।
महाशिवरात्रि: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय न करें ये 4 गलतियां, जानें सही नियम - Maha shivratri 2025 date never make these four mistakes while offer water to shivling tvisu
महादेव की परिक्रमा का महत्व
जलधारी तक जाकर वापस लौट आना चाहिए। इसे ही शिव जी की आधी परिक्रमा कहा जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप बहुत असरदार होता है। जल चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते रहें।
यह मंत्र बहुत सरल और बेहद शक्तिशाली माना जाता है। इसके जाप से मन शांत होता है। यदि कोई गंभीर बीमारी है, तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। यह मंत्र सेहत को अच्छा बनाए रखता है। श्रद्धा से किया गया जाप हर मनोकामना को पूरा करता है। महादेव अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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