क्यों माना जाता है कि एकदंत संकष्टी व्रत से दूर होते हैं सभी संकट?
Kaushiki | May 15, 2025, 15:19 IST
GANESH CHATRUTHI 2025
एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत 16 मई 2025 को मनाया जाएगा, जो भगवान गणेश के एक दांत टूटने की पौराणिक कथा से जुड़ा है। इस व्रत से सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
हिन्दू पंचांग के मुताबिक संकष्टी चतुर्थी हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और सभी संकटों के निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विशेष रूप से एकदंत संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के एक दांत टूटने की पौराणिक कथा के कारण उनका यह नाम पड़ा।
ये खबर भी पढ़ें... ज्येष्ठ माह में आते हैं ये प्रमुख व्रत और त्योहार, जानें इस माह से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताएं
हिन्दू पंचांग के मुताबिक, साल 2025 में एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत शुक्रवार, 16 मई को रखा जाएगा। इस दिन चतुर्थी तिथि सुबह 04:02 से प्रारंभ होकर अगले दिन 17 मई को सुबह 05:13 तक रहेगी। चंद्र उदय का समय रात 10:39 बजे है, जो व्रत पूजन का महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी के पीछे पौराणिक कथा बहुत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि, भगवान गणेश परशुराम की अपमानजनक वाणी से नाराज होकर अपने दांत से परशुराम के परशु (कुल्हाड़ी) को तोड़ देते हैं।
परशुराम भी क्रोधित होकर भगवान गणेश पर परशु से प्रहार करते हैं, जिससे गणेश जी का एक दांत टूट जाता है। इस घटना के कारण उन्हें ‘एकदंत’ यानी ‘एक दांत वाले’ के नाम से जाना जाने लगा।
इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना कर उनके इस विशेष नाम का स्मरण किया जाता है और भक्त इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं।
मान्यता के मुताबिक, इस व्रत से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। माता-पिता संतान की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए इस व्रत का पालन करते हैं।
ये खबर भी पढ़ें... ज्येष्ठ माह में भूलकर भी न करें ये काम वरना हो सकता है नुकसान
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥
माथे पर सिन्दूर सोहे,मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
हार चढ़े, फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
अँधे को आँख देत,कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
दीनन की लाज राखो,शम्भु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो,जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
ये खबर भी पढ़ें...
ज्येष्ठ माह में कब से शुरू हो रहा बुढ़वा मंगल, जानें कैसे करें हनुमान जी की उपासना
ज्येष्ठ माह का बड़ा मंगल शुरु, हनुमानजी की विशेष कृपा पाने के लिए करें ये उपाय
भगवान परशुराम | गणेश चतुर्थी | गणेश चतुर्थी का महत्व | गणेश चतुर्थी की पूजन विधि | धर्म ज्योतिष न्यूज | lord ganesh ji | Ganesh Chaturthi
ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विशेष रूप से एकदंत संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के एक दांत टूटने की पौराणिक कथा के कारण उनका यह नाम पड़ा।
ये खबर भी पढ़ें... ज्येष्ठ माह में आते हैं ये प्रमुख व्रत और त्योहार, जानें इस माह से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताएं
शुभ मुहूर्त
एकदंत संकष्टी व्रत का महत्व
परशुराम भी क्रोधित होकर भगवान गणेश पर परशु से प्रहार करते हैं, जिससे गणेश जी का एक दांत टूट जाता है। इस घटना के कारण उन्हें ‘एकदंत’ यानी ‘एक दांत वाले’ के नाम से जाना जाने लगा।
इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना कर उनके इस विशेष नाम का स्मरण किया जाता है और भक्त इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं।
मान्यता के मुताबिक, इस व्रत से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। माता-पिता संतान की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए इस व्रत का पालन करते हैं।
ये खबर भी पढ़ें... ज्येष्ठ माह में भूलकर भी न करें ये काम वरना हो सकता है नुकसान
पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठें: स्नान आदि के बाद साफ और शुद्ध कपड़े पहनें।
- संकल्प लें: भगवान गणेश के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।
- अभिषेक करें: गंगाजल या शुद्ध जल से भगवान गणेश का अभिषेक करें।
- श्रृंगार करें: पीले वस्त्र, चंदन, हल्दी और कुमकुम से सजाएं।
- भोग अर्पित करें: दूर्वा घास, लाल-पीले फूल, मोदक या लड्डू भोग में चढ़ाएं।
- मंत्र जाप: गणेश मंत्र का जाप करें या गणेश चालीसा पढ़ें।
- आरती करें: दीप जलाकर भगवान की आरती करें।
- रात्रि पूजा: चंद्र उदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें और व्रत खोलें।
श्री गणेशजी की आरती
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥
माथे पर सिन्दूर सोहे,मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
हार चढ़े, फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
अँधे को आँख देत,कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
दीनन की लाज राखो,शम्भु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो,जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
ये खबर भी पढ़ें...
ज्येष्ठ माह में कब से शुरू हो रहा बुढ़वा मंगल, जानें कैसे करें हनुमान जी की उपासना
ज्येष्ठ माह का बड़ा मंगल शुरु, हनुमानजी की विशेष कृपा पाने के लिए करें ये उपाय
भगवान परशुराम | गणेश चतुर्थी | गणेश चतुर्थी का महत्व | गणेश चतुर्थी की पूजन विधि | धर्म ज्योतिष न्यूज | lord ganesh ji | Ganesh Chaturthi
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari