Walking: क्या दिल के मरीजों को भोजन के बाद टहलना चाहिए?
Dr Rameshwar Dayal | Apr 09, 2024, 14:19 IST
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डॉ. हिरेमथ का कहना है कि जो व्यक्ति दिल का मरीज है, उसके लिए आरामदायक तरीका यह है कि वह हल्की स्ट्रेचिंग या हल्का योग करे। इससे दिल पर दबाव नहीं पड़ता और वह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है।
NEW DELHI: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए टहलना ( Walking) जरूरी बताया गया है। आयुर्वेद ( Ayurveda ) से लेकर आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ( medical science ) भी इसमें रजामंदी दिखाता है। किसी भी योगाचार्य या डॉक्टर से पूछेंगे कि क्या भोजन के बाद टहलना ( walk after meals ) जरूरी है। उनका जवाब हां में होगा, लेकिन टहलने की गति पर उनके विचार अलग-अलग हो सकते हैं। वे यह भी जानकारी देंगे कि हर व्यक्ति का शारीरिक सिस्टम टहलने का समय भी निश्चित करता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति दिल का मरीज ( heart patient ) है तो क्या उसे भोजन के बाद टहलना चाहिए? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, जिसका उत्तर हम आपको इस लेख में देने जा रहे हैं।
आज के जमाने में जिस तरह की हमारी दिनचर्या या खानपान है, उस हिसाब से टहलने को प्राथमिकता दी जा रही है। टहलना एक तरह से शरीर का संपूर्ण व्यायाम है, जिसमें कोई खर्च नहीं आता। इससे हृदय स्वस्थ रहता है, वजन कम होने में मदद मिलती है साथ ही गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। जानी मानी योगाचार्य रमा शर्मा का कहना है कि टहलने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, खून का प्रवाह स्मूद रहता है और शरीर के जोड़ फिट बने रहते हैं। नियमित टहलने से मानसिक शांति भी मिलती है और अनिद्रा से भी बच सकते हैं। रोजाना कम से कम 20 मिनट टहल लेंगे तो शरीर को उसका लाभ जरूर मिलेगा।
इस बात में कोई दो-राय नहीं है कि भोजन करने के बाद टहलना चाहिए, लेकिन चाल और समय को लेकर अलग अलग राय हैं। ग्रीनविले डेली रिफ्लेक्टर में प्रकाशित एक लेख में आहार विशेषज्ञ और ईस्ट कैरोलिना यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर कैथी कोलासा का कहना है कि भोजन के बाद टहलने का एकमात्र लाभ बेहतर पाचन नहीं है। पैदल चलने से उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है। भोजन के बाद थोड़ी देर टहलने से चिंता में कमी आती है और आप बेहतर नींद भी ले सकते हैं। इसी मसले पर बेंगलुरु स्थित आसरा अस्पताल के चिकित्सा निदेशक और अध्यक्ष डॉ. जगदीश जे हीरेमथ का कहना है कि आमतौर पर हल्की से मध्यम शारीरिक गतिविधि, जिसमें खाने के बाद चलना भी शामिल है, हृदय को स्वस्थ रखने के लिए लाभकारी है।
डॉ. हीरेमथ का कहना है कि भोजन के बाद तेज के बजाय हलकी सैर करनी चाहिए। यदि आपका फिटनेस स्तर ठीक है तो भी 30 मिनट से अधिक नहीं टहलना चाहिए। उनका कहना है कि भोजन के बाद हल्का टहलना पेट और आंतों को उत्तेजित करके पाचन में सहायता कर सकता है। ऐसा करेंगे तो पेट की सूजन या गैस जैसे लक्षणों को कुछ कम किया जा सकता है। भोजन के तुरंत बाद एक्सरसाइज पूरे तौर पर वर्जित है। भोजन के बाद टहलने से ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है।
भारत का आयुर्वेद शास्त्र भोजन के बाद टहलने की संस्तुति करता है। आयुर्वेद के अनुसार शतपावली या 100 कदम चलना पाचन में सहायता, चयापचय में सुधार और दोपहर के भोजन के बाद की नींद से राहत पाने का आदर्श तरीका है। इस मसले पर आधुनिक चिकित्सा शोधकर्ता भी इस प्राचीन औषधीय सिस्टम से सहमत हैं। उनका मानना है कि भोजन के बाद 15 मिनट की सैर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करती है। आयुर्वेदाचार्य आरपी पराशर के अनुसार भोजन के बाद कभी भी तेज गति से सैर नहीं करनी है। अगर भोजन के बाद नियमित सरल गति से टहला जाए तो शरीर की कई स्वास्थ्य जटिलताओं को लंबे समय तक दूर किया जा सकता है। भोजन के बाद सैर करने से एसिडिटी या अपच जैसी समस्याओं में सुधार करने में मदद मिलती है, साथ ही शरीर के अन्य अंगों के कामकाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसा करने से वजन भी घटने में मदद मिलती है।
इस बात पर लंबी बहस चल रही है कि क्या दिल के मरीजों को भोजन के बाद टहलना चाहिए, या उन्हें कोई हलका योग करना चाहिए। उन्हें भोजन के बाद ऐसा क्या करना चाहिए जो उन्हें किसी प्रकार की परेशानी पैदा न होने दे। डॉ. हिरेमथ का कहना है कि जो व्यक्ति दिल का मरीज है, उसके लिए आरामदायक तरीका यह है कि वह हल्की स्ट्रेचिंग या हल्का योग करे। इससे दिल पर दबाव नहीं पड़ता और वह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है। दिल के रोगी सांस से जुड़े योग (प्राणायाम) करेंगे तो उन्हें ज्यादा लाभ मिलेगा। ऐसा करने से ब्लड प्रेशर और हृदय गति को कम किया जा सकता है। अगर सैर से बचना चाहते हैँ तो पढ़ना, संगीत सुनना या मन को आराम देने वाले अन्य शौक किए जा सकते हैं। ये अप्रत्यक्ष रूप से तनाव कम कर दिल को सुकून पहुंचाते हैं। ध्यान रखें कि दिल के मरीजों को भोजन के बाद किसी भी तरह की हार्ड एक्सरसाइज पूरी तरह वर्जित है। दूसरी ओर एक रिसर्च यह भी कहता है कि जिन लोगों को दिल की गंभीर बीमारी है, उन्हें भोजन के बाद सैर से बचना चाहिए। इसके बजाय वे भोजन से पहले टहलने का विकल्प चुन सकते हैं।
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पहले यह समझें कि टहलना जरूरी है?
आज के जमाने में जिस तरह की हमारी दिनचर्या या खानपान है, उस हिसाब से टहलने को प्राथमिकता दी जा रही है। टहलना एक तरह से शरीर का संपूर्ण व्यायाम है, जिसमें कोई खर्च नहीं आता। इससे हृदय स्वस्थ रहता है, वजन कम होने में मदद मिलती है साथ ही गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। जानी मानी योगाचार्य रमा शर्मा का कहना है कि टहलने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, खून का प्रवाह स्मूद रहता है और शरीर के जोड़ फिट बने रहते हैं। नियमित टहलने से मानसिक शांति भी मिलती है और अनिद्रा से भी बच सकते हैं। रोजाना कम से कम 20 मिनट टहल लेंगे तो शरीर को उसका लाभ जरूर मिलेगा।
भोजन के बाद टहलना क्यों जरूरी माना जाता है
इस बात में कोई दो-राय नहीं है कि भोजन करने के बाद टहलना चाहिए, लेकिन चाल और समय को लेकर अलग अलग राय हैं। ग्रीनविले डेली रिफ्लेक्टर में प्रकाशित एक लेख में आहार विशेषज्ञ और ईस्ट कैरोलिना यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर कैथी कोलासा का कहना है कि भोजन के बाद टहलने का एकमात्र लाभ बेहतर पाचन नहीं है। पैदल चलने से उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिल सकती है। भोजन के बाद थोड़ी देर टहलने से चिंता में कमी आती है और आप बेहतर नींद भी ले सकते हैं। इसी मसले पर बेंगलुरु स्थित आसरा अस्पताल के चिकित्सा निदेशक और अध्यक्ष डॉ. जगदीश जे हीरेमथ का कहना है कि आमतौर पर हल्की से मध्यम शारीरिक गतिविधि, जिसमें खाने के बाद चलना भी शामिल है, हृदय को स्वस्थ रखने के लिए लाभकारी है।
भोजन के बाद कितनी देर तक टहलना चाहिए
डॉ. हीरेमथ का कहना है कि भोजन के बाद तेज के बजाय हलकी सैर करनी चाहिए। यदि आपका फिटनेस स्तर ठीक है तो भी 30 मिनट से अधिक नहीं टहलना चाहिए। उनका कहना है कि भोजन के बाद हल्का टहलना पेट और आंतों को उत्तेजित करके पाचन में सहायता कर सकता है। ऐसा करेंगे तो पेट की सूजन या गैस जैसे लक्षणों को कुछ कम किया जा सकता है। भोजन के तुरंत बाद एक्सरसाइज पूरे तौर पर वर्जित है। भोजन के बाद टहलने से ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है।
इस मसले पर आयुर्वेद का क्या कहना है
भारत का आयुर्वेद शास्त्र भोजन के बाद टहलने की संस्तुति करता है। आयुर्वेद के अनुसार शतपावली या 100 कदम चलना पाचन में सहायता, चयापचय में सुधार और दोपहर के भोजन के बाद की नींद से राहत पाने का आदर्श तरीका है। इस मसले पर आधुनिक चिकित्सा शोधकर्ता भी इस प्राचीन औषधीय सिस्टम से सहमत हैं। उनका मानना है कि भोजन के बाद 15 मिनट की सैर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करती है। आयुर्वेदाचार्य आरपी पराशर के अनुसार भोजन के बाद कभी भी तेज गति से सैर नहीं करनी है। अगर भोजन के बाद नियमित सरल गति से टहला जाए तो शरीर की कई स्वास्थ्य जटिलताओं को लंबे समय तक दूर किया जा सकता है। भोजन के बाद सैर करने से एसिडिटी या अपच जैसी समस्याओं में सुधार करने में मदद मिलती है, साथ ही शरीर के अन्य अंगों के कामकाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसा करने से वजन भी घटने में मदद मिलती है।
दिल के मरीज भोजन के बाद क्या करें
इस बात पर लंबी बहस चल रही है कि क्या दिल के मरीजों को भोजन के बाद टहलना चाहिए, या उन्हें कोई हलका योग करना चाहिए। उन्हें भोजन के बाद ऐसा क्या करना चाहिए जो उन्हें किसी प्रकार की परेशानी पैदा न होने दे। डॉ. हिरेमथ का कहना है कि जो व्यक्ति दिल का मरीज है, उसके लिए आरामदायक तरीका यह है कि वह हल्की स्ट्रेचिंग या हल्का योग करे। इससे दिल पर दबाव नहीं पड़ता और वह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है। दिल के रोगी सांस से जुड़े योग (प्राणायाम) करेंगे तो उन्हें ज्यादा लाभ मिलेगा। ऐसा करने से ब्लड प्रेशर और हृदय गति को कम किया जा सकता है। अगर सैर से बचना चाहते हैँ तो पढ़ना, संगीत सुनना या मन को आराम देने वाले अन्य शौक किए जा सकते हैं। ये अप्रत्यक्ष रूप से तनाव कम कर दिल को सुकून पहुंचाते हैं। ध्यान रखें कि दिल के मरीजों को भोजन के बाद किसी भी तरह की हार्ड एक्सरसाइज पूरी तरह वर्जित है। दूसरी ओर एक रिसर्च यह भी कहता है कि जिन लोगों को दिल की गंभीर बीमारी है, उन्हें भोजन के बाद सैर से बचना चाहिए। इसके बजाय वे भोजन से पहले टहलने का विकल्प चुन सकते हैं।
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