News Strike : जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में दो दिग्गजों की नहीं चल रही बिसात, क्या क्षेत्र में घटेगी साख?
Harish Divekar | Jan 23, 2025, 07:00 IST
News Strike District Heads appointment Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश में बीजेपी के 57 जिलों के जिलाध्यक्षों के नामों का ऐलान हो चुका है, जबकि अभी भी कई जगह पेंच अटका हुआ है। पार्टी ने कुल 62 जिलों के जिलाध्यक्ष तैनात करने का फैसला किया है...
News Strike : एक कहावत आपने जरूर सुनी होगी। दूध का दूध और पानी का पानी होना। मध्यप्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति का मामला भी कुछ ऐसा ही हो गया है। अब किस पुराने और दिग्गज नेता की धाक कायम है और किसकी नहीं। ये सब जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से पता चल रहा है।
खासतौर से दो दिग्गजों की साख तो वाकई इस नियुक्ति को लेकर दांव पर आ गई है। ये दो ऐसे दिग्गज है जो कभी सीएम पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन फिर मोहन केबिनेट में मंत्री बनकर ही संतोष करना पड़ा। मंत्रियों की बात करें तो वहां भी ये दोनों दिग्गज सबसे सीनियर मंत्री हैं। उसके बाद भी अपने पसंदीदा जिलाध्यक्ष नियुक्त करवाना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
सबसे पहले ये बता दूं कि इस सेगमेंट की तैयारी होने तक बीजेपी के 57 जिलों के जिलाध्यक्षों के नामों का ऐलान हो चुका था, जबकि अभी भी कई जगह पेंच अटका हुआ है। पार्टी ने कुल 62 जिलों के जिलाध्यक्ष तैनात करने का फैसला किया है। 18 जनवरी तक तो लिस्ट पर लिस्ट आती रही, लेकिन उसके बाद अचानक इस पर ब्रेक लग गया। करीब पांच जिलों में ये काम फिर से अटक गया है। और, इसकी वजह है दिग्गजों की आपसी खींचतान।
News Strike : एक के बाद एक हुए गंभीर अपराधों पर घिरी सरकार, असल जिम्मेदार कौन पुलिस तंत्र या सख्ती की कमी ?
हम आपको बताते हैं कि इस मामले में सियासी पेंच असल में कहां फंस रहा है। जिले के प्रभारी मंत्री या उस जिले से ताल्लुक रखने वाले मंत्री, सांसद या विधायक इस कोशिश में हैं कि उनके पसंदीदा जिले में उनके पसंदीदा व्यक्ति को ही ये जिम्मेदारी मिले। बस इसी सोच के साथ रस्साकशी जारी है। सबसे दिलचस्प मुकाबला होता जा रहा है इंदौर और नरसिंहपुर में। इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय लाख कोशिशों के बावजूद अपनी पसंद के दावेदार के नाम पर मुहर नहीं लगवा सके हैं। दूसरे दिग्गज नेता हैं प्रहलाद पटेल। उनकी भी पसंद को अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसलिए नरसिंगपुर में नाम के ऐलान में वक्त लग रहा है। ये दोनों ही वो नेता हैं जो आलाकमान के करीबी होने के साथ साथ प्रदेश के सीनियर लीडर्स में शामिल हैं। सीएम पद के दावेदार भी रह चुके हैं।
News Strike: दिल्ली से खाली हाथ लौटे नागर सिंह चौहान की मुस्कान में छुपे कितने राज ? सियासी ड्रामे की पूरी टाइमलाइन
कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को अपने समर्थकों को पद दिलाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है और अभी भी ये गारंटी नहीं है कि उनके पसंदीदा व्यक्ति को पद मिल ही जाएगा। जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया इस मामले में अपना दबदबा कायम रखने में कामयाब रहे हैं। छह साल की सदस्यता वाले क्राइटेरिया को दांव पर रखकर शिवपुरी जिले की कमान जसवंत जाटव को सौंप दी गई है। जो सिंधिया समर्थक हैं। ऐसे में अगर बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता और समर्थकों का विश्वास अपने दिग्गज नेताओं पर कमजोर पड़ जाए तो कुछ गलत भी नहीं कहा जा सकता।
पहले बात करते हैं इंदौर की। जहां जिलाध्यक्ष की नियुक्ति ये तय करेगी कि किस में कितना है दम। इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय या फिर चंद साल पहले बीजेपी में आए तुलसी राम सिलावट। जिनके पीछे ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता का बैकअप है।
जिलाध्यक्षों की लिस्ट में इंदौर शहर और इंदौर ग्रामीण दोनों ही जगह के नामों का ऐलान अभी अटका हुआ है। वजह है कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी राम सिलावट जो अपनी अपनी पसंद पर अड़े हुए हैं। अब ये दो नेताओं के बीच प्रतिष्ठा की जंग बन चुकी है। ये जंग हैरान करने वाली इसलिए है क्योंकि कैलाश विजयवर्गीय निर्विवादित रूप से बीजेपी के बड़े नेता हैं। सीनियोरिटी में वो सीएम मोहन यादव से भी कहीं ज्यादा आगे हैं। तुलसीराम सिलावट के मुकाबले भी बिना किसी शक वो पार्टी में बड़ा ओहदा रखते हैं। उसके बाद भी उन्हें अपना पसंदीदा चेहरा लाने में इतनी मगजमारी करनी पड़ रही है। विजयवर्गीय चाहते हैं कि इंदौर में उनके समर्थक चिंटू वर्मा को पद दिलाना चाहते हैं, लेकिन तुलसी सिलावट ने इस में अड़ंगा लगा दिया है। तुलसी सिलावट की पसंद हैं अंतर दयाल जो कलोता समाज से आते हैं। मामले में ट्विस्ट ये है कि उषा ठाकुर और मनोज पटेल दोनों ने तुलसी सिलावट की पसंद पर सहमति जता दी है और सबसे खास बात खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अंतर दयाल के नाम को ही सेकंड किया है।
News Strike : राधा रानी पर टिप्पणी से बढ़ी पंडित प्रदीप मिश्रा की मुश्किलें, क्या इस सफाई से बनेगा काम ?
विजयवर्गीय ने दूसरी पसंद के रूप में दीपक जौन टीनू का नाम भी आगे बढ़ाया है और सुमित मिश्रा भी उनकी पसंद में शामिल हैं। इंदौर की रेस में गौरव रणदिवे भी शामिल हैं जो इस पद को हासिल करने के लिए इंदौर से भोपाल नाप रहे हैं। इंदौर के ही कुछ नेता मुकेश राजावत का नाम आगे बढ़ा रहे हैं। इन नामों के बीच इंदौर में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति का मामला अटक कर रह गया है।
नरसिंहपुर जिले के हालात भी कुछ अलग नहीं है। यहां भी दिग्गज की साख ही दांव पर है। इस जिले के लिए पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल अपने भाई जालम पटेल को अध्यक्ष बनवाना चाहते थे। बाद में खुद उनके खेमे से नया नाम सामने आया और बीन ओसवाल की पैरवी शुरू हो गई। यहां पेंच फंसाया स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने। जो राजीव पटेल को ये पद दिलवाना चाहते हैं। इसलिए नरसिंहपुर में भी बीजेपी संगठन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहा है।
News Strike : निगम मंडल में नियुक्तियों को मिली हरी झंडी, पर इस वजह से अटक सकता है मामला ?
इन दो जिलों के अलावा निवाड़ी और छिंदवाड़ा का मामला भी अटका हुआ है। इसमें छिंदवाड़ा का नाम चौंकाने वाला है क्योंकि छिंदवाड़ा तो किसी बड़े बीजेपी नेता का गढ़ भी नहीं है। उसके बाद भी वहां जिलाध्यक्ष फाइनल हो पाना मुश्किल हो रहा है। नाम की लिस्ट का क्या है वो तो आगे पीछे आ ही जाएगी, लेकिन नाम फाइनल होने के बाद नेताओं को अपने-अपने जिले में अपनी ताकत का अहसास जरूर हो जाएगा।
खासतौर से दो दिग्गजों की साख तो वाकई इस नियुक्ति को लेकर दांव पर आ गई है। ये दो ऐसे दिग्गज है जो कभी सीएम पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन फिर मोहन केबिनेट में मंत्री बनकर ही संतोष करना पड़ा। मंत्रियों की बात करें तो वहां भी ये दोनों दिग्गज सबसे सीनियर मंत्री हैं। उसके बाद भी अपने पसंदीदा जिलाध्यक्ष नियुक्त करवाना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि इस बात का असर इन दोनों ही दिग्गज नेताओं के समर्थकों पर जरूर पड़ेगा। दिलचस्प बात ये है कि बीजेपी के दो पुराने दिग्गज जहां चूक रहे हैं वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया बाजी मारने में कामयाब रहे हैं।
बीजेपी का 62 जिलाध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला
News Strike : एक के बाद एक हुए गंभीर अपराधों पर घिरी सरकार, असल जिम्मेदार कौन पुलिस तंत्र या सख्ती की कमी ?
सबसे दिलचस्प मुकाबला है इंदौर और नरसिंहपुर में
News Strike: दिल्ली से खाली हाथ लौटे नागर सिंह चौहान की मुस्कान में छुपे कितने राज ? सियासी ड्रामे की पूरी टाइमलाइन
शिवपुरी में सिंधिया दबदबा कायम रखने में कामयाब
पहले बात करते हैं इंदौर की। जहां जिलाध्यक्ष की नियुक्ति ये तय करेगी कि किस में कितना है दम। इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय या फिर चंद साल पहले बीजेपी में आए तुलसी राम सिलावट। जिनके पीछे ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेता का बैकअप है।
दो नेताओं की प्रतिष्ठा की जंग बना जिलाध्यक्ष का नाम
News Strike : राधा रानी पर टिप्पणी से बढ़ी पंडित प्रदीप मिश्रा की मुश्किलें, क्या इस सफाई से बनेगा काम ?
कुछ नामों के बीच इंदौर जिलाध्यक्ष का मामला अटका
नरसिंहपुर जिले के हालात भी कुछ अलग नहीं है। यहां भी दिग्गज की साख ही दांव पर है। इस जिले के लिए पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल अपने भाई जालम पटेल को अध्यक्ष बनवाना चाहते थे। बाद में खुद उनके खेमे से नया नाम सामने आया और बीन ओसवाल की पैरवी शुरू हो गई। यहां पेंच फंसाया स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने। जो राजीव पटेल को ये पद दिलवाना चाहते हैं। इसलिए नरसिंहपुर में भी बीजेपी संगठन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहा है।
News Strike : निगम मंडल में नियुक्तियों को मिली हरी झंडी, पर इस वजह से अटक सकता है मामला ?
नाम फाइनल होना ताकत का अहसास तो कराएगा...
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari