News Strike: MP में सियासी तनाव के बीच क्या पश्चिम बंगाल जाएंगे कैलाश विजयवर्गीय? शाह संग मीटिंग के क्या मायने?
Harish Divekar | Mar 04, 2026, 07:00 IST
Photograph: (thesootr)
अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय की मीटिंग के बाद, सियासी हलचल तेज हो गई है। विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल भेजे जाने की संभावना बढ़ी है, चुनावों से पहले बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
News In Short
विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी को विजयवर्गीय से उम्मीदें हैं।
विजयवर्गीय की रणनीति ने बंगाल में बीजेपी की सीटें बढ़ाई।
मध्यप्रदेश में विधानसभा सत्र के बाद, विजयवर्गीय को बंगाल भेजने की संभावना।
News In Detail
हम और आप जैसे लोग जो राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं, सिर्फ वही ये जानने को उत्सुक नहीं है। खुद बीजेपी के लोग भी ये जानना चाहते हैं कि दोनों के बीच क्या बातचीत हुई। क्या पार्टी कैलाश विजयवर्गीय को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है या कोई और बड़ी जिम्मेदारी उन्हें सौंप सकती है।
दिल्ली बैठकों से बढ़ी सियासी हलचल
कैलाश विजयवर्गीय हाल ही में दिल्ली से लौटे हैं। गृहमंत्री अमित शाह के साथ उनकी खास मुलाकात हुई। मंत्री प्रहलाद पटेल से भी विजयवर्गीय ने अलग से मुलाकात की है। जिस समय शाह के साथ ये बैठक चल रही थी उसी दरमियान प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और सीएम मोहन यादव की मुलाकात पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन से हुई है।
दोनों बैठकों में इतना अंतर था कि शाह ने अलग-अलग और एक-एक कर मुलाकात की. लेकिन नितिन नबीन ने एक साथ मीटिंग की है। शाह की वन टू वन बैठक की वजह से ही अंदर की बात पुरजोर तरीके से बाहर नहीं आ सकी है, लेकिन अटकलों का बाजार गर्म है।
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कैलाश विजयवर्गीय की बयानबाजी बनी अड़चन
कभी पत्रकारों पर उनका गुस्सा फूटा तो कभी विधानसभा में वो ऐसे बयान दे गए कि उन्हें विपक्ष की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा। खासतौर से नेता विपक्ष को औकात में रहने की सलाह देने पर कांग्रेस ने उन्हें घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय पर सदन में गलत जानकारी देने के आरोप भी लगे।
कैलाश विजयवर्गीय ने इस गंभीर गलती पर अपने विभाग के अफसरों पर साजिश का आरोप भी लगाया। इन सारे घटनाक्रमों के बाद बैठक हुई तो उस ने लोगों का एक्साइटमेंट बढ़ा दिया है।
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पश्चिम बंगाल के लिए विजयवर्गीय से बेहतर कौन?
पश्चिम बंगाल में जल्द ही चुनाव होने हैं। ये प्रदेश किस कदर बीजेपी के लिए नाक का सवाल बना हुआ है ये सब जानते हैं। पिछले कई चुनावों से बीजेपी यहां पर एड़ी चोटी का जोर लगा रही है, लेकिन अब तक कामयाबी नहीं मिली है। आने वाले चुनाव के लिए भी बीजेपी ने अपनी सारी ताकत पश्चिम बंगाल में झोंक दी है।
अब बीजेपी को किसी ऐसे लीडर की सख्त जरूरत है जो पश्चिम बंगाल की समझ भी रखता हो और वहां संगठन को मजबूत भी बनाकर रख सके। इसके लिए कैलाश विजयवर्गीय से बेहतर और कौन से नेता हो सकते हैं।
कैलाश विजवर्गीय को पश्चिम बंगाल की राजनीति की भी समझ है और वो वहां के संगठन को भी अच्छे से जानते हैं। या यूं कहा जा सकता है कि वहां के संगठन को खड़ा करने का क्रेडिट उनके खाते में भी है।
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बंगाल में विजयवर्गीय का बढ़ सकता है दबदबा
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने परिवर्तन यात्रा निकालना भी शुरू कर ही दिया है। इस परिवर्तन यात्रा का जिम्मा कैलाश विजयवर्गीय को सौंपा जा सकता है।
कैलाश विजयवर्गीय बीजेपी के दबंग नेता माने जाते हैं। इसलिए ममता बैनर्जी जैसी मुखर और दबंग नेता का सामना करने के लिए भी वो एक परफेक्ट चॉइस हो सकते हैं।
बात सिर्फ मुखर होने या फिर दबंग होने की नहीं है। कैलाश विजवर्गीय पहले भी संगठन में रहते हुए पश्चिम बंगाल में पार्टी को मजबूत करने का काम बखूबी किया भी है।
साल 2015 में बीजेपी ने कैलाश विजवर्गीय को पश्चिम बंगाल भेजा था। बतौर राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजवर्गीय करीब छह साल वो बंगाल में रहे। इस दौरान बीजेपी अपने दम पर विधानसभा चुनाव तो नहीं जीत सकी। लेकिन लोकसभा में जरूर पार्टी की सीटें 18 तक पहुंच गईं।
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विजयवर्गीय की रणनीति से बंगाल में बदलाव
साल 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 294 में से 77 सीटें जीतीं। हालांकि, पार्टी ने उस चुनाव में 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। बीजेपी लक्ष्य तक तो नहीं पहुंची, लेकिन सीटों में इजाफा जरूर हुआ। सीटों के अलावा पार्टी का वोट शेयर भी काफी ज्यादा बढ़ा था।
2016 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी का वोट शेयर 10.2 परसेंट था। जो 2021 के चुनाव में बढ़कर 38.09 परसेंट हो गया था। बीजेपी जो पिछले चुनाव में नहीं कर सकी। वो करने की उम्मीद शायद इस बार हो। बीजेपी एक बार फिर दो सौ सीटें जीतने की मंशा के साथ ही मैदान में उतरेगी।
विजयवर्गीय को भेजा जा सकता है पश्चिम बंगाल
इस लिहाज से हम मान सकते हैं कि डेढ़ महीने के भीतर बंगाल में सारी राजनीतिक उठापटक हो जाएगी। तब तक कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में रहेंगे। इस बीच हो सकता है कि मध्यप्रदेश की सियासत में भी शांति आ जाए और एक नई शुरुआत के साथ प्रदेश सरकार और उनके मंत्री कदमताल कर सकें।
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