News Strike: सदन और सोशल मीडिया में शिवराज सिंह चौहान हुए ट्रोल, नप गया सरकारी टीचर, अब कोर्ट जाने की तैयारी
Harish Divekar | Mar 20, 2026, 07:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. शिवराज सिंह चौहान के भाषण पर ट्रोलिंग और सोशल मीडिया पर विवाद बढ़े। इसके चलते एक टीचर को सस्पेंड किया गया है। अब कोर्ट जाने की तैयारी।
News In Short
- शिवराज के भाषण पर सोशल मीडिया में ट्रोलिंग।
- सोशल शेयर पर शेयर किया शिवराज का भाषण।
- सरकारी टीचर की टिप्पणी पर कार्रवाई।
- कुशवाहा का कोर्ट जाने का ऐलान।
- ट्रोलिंग की परंपरा पर लगाम की आवश्यकता।
News In Detail
आप जरूर ये सोच सकते हैं कि सदन में दिया भाषण अलग बात है और एक टीचर का सस्पेंशन अलग बात है, लेकिन गहराई से देखेंगे और सोशल मीडिया को ठीक तरह से खंगालेंगे तो पता चल जाएगा कि इस भाषण का कनेक्शन संसद से लेकर विदिशा लोकसभा सीट तक है और विपक्ष के निशाने से लेकर टीचर के सस्पेंशन तक है।
शिवराज की लोकप्रियता और एंटीइकंबेंसी का संघर्ष
कभी खुद को मामा बताकर तो कभी खुद को भाई बताकर शिवराज हमेशा खुद को जनता से कनेक्ट करते रहे। अपनी इमेज भी उन्होंने प्रदेश के मुखिया से ज्यादा पांव-पांव वाले भईया के रूप में बनाई। लाडली लक्ष्मी और लाडली बहना योजना भी उन्हीं की ब्रेन चाइल्ड कही जा सकती हैं।
लेकिन जैसे हर उगता सूरज अस्त होता है उसी तरह हर लोकप्रियता को चरम पर जाने के बाद नीचे आना ही पड़ता है। शिवराज सिंह चौहान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके नाम और काम और खासतौर से भाषणों को घोषणा भर कहा गया और विपक्ष ने उन्हें घोषणा वीर की उपाधि दे डाली। नतीजा ये हुआ कि शिवराज के फेस पर एंटीइकंबेंसी बढ़ी और बीजेपी ने उन्हें सीएम के पद से हटा दिया।
शिवराज की राजनीति में जिम्मेदारी और मोदी से रिश्ते
इस बीच ये भी अटकलें लगती रहीं कि वो पीएम मोदी की पसंद कभी नहीं रहे। एक बात और याद दिला दें जब पीएम पद के लिए नरेंद्र मोदी का नाम बीजेपी में आगे बढ़ रहा था। तब उनका कंपेरिजन बार-बार शिवराज सिंह चौहान से भी हो रहा था। उन्हें कुछ खबरों में संघ की पहली पसंद बनाकर भी प्रमोट किया गया था, लेकिन फिर पीएम मोदी की पॉपुलेरिटी इतनी बढ़ी कि ये सारी बातें आई गईं हो गई।
पर कहीं कोई टीस न रह जाए इस वजह से शिवराज सिंह चौहान पीएम मोदी के गुणगान करने में पीछे नहीं रहते। इस बार उन्हें मौका मिला तो सदन में जमकर पीएम की तारीफ की और बीजेपी के दूसरे नेताएं की तर्ज पर नेहरूजी से कंपेरिजन भी किया।
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शिवराज सिंह चौहान के भाषण पर तकरार और तंज
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी इस बयान के लिए पूर्व सीएम पर जमकर निशाना साधा। ये भी कहा कि पीएम मोदी को जो भाषण पसंद आते हैं उन्हें वो शेयर करते हैं, लेकिन इतनी चाटुकारिता भी पसंद नहीं आती इसलिए वो शिवराज के भाषण शेयर नहीं करते।
बात ही बात में राजीव शुक्ला ने ये भी कह डाला कि लगता है जैसे देश का विकास 2014 से पहले कभी हुआ ही नहीं था। खैर ये तो सदन की बात है। सदन में पक्ष और विपक्ष की ये तकरार चलती ही रहती है।
अब तो सदन की कार्यवाही लाइव स्ट्रीम होती है इसलिए आप ऐसे चुटीले भाषण और तंज खुद ही सुन सकते हैं। एक दौर में जब लाइव की व्यवस्था नहीं थी तब अखबारों में हास परिहास के खास कॉलम आया करते थे ताकि सदन के कुछ चटपटे लम्हें जनता तक पहुंच सके।
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सोशल मीडिया पर शिवराज की स्पीच का असर
ये मामला भी बड़ा दिलचस्प है। जिसमें कितनी राजनीति है और कितनी बेबसी है। इसका अंदाजा भी आप ही लोगों को लगाना है। विदिशा में बीजेपी के नेता हैं गगन दुबे। जिनके फेसबुक पर 12 हजार फॉलोअर्स हैं। मिलियन्स में फॉलोअर्स की गिनती करने वाले ये न सोचें कि सिर्फ 12 हजार फॉलोअर्स वाला ये अकाउंट कोई आम अकाउंट है।
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सोशल मीडिया पर पोस्ट और टीचर का विवाद
जिस अकाउंट से ये ट्वीट हुआ उसे गंजबसौदा के जमनिया शासकीय प्राथमिक शाला के टीचर गोविंद सिंह कुशवाहा का बताया जा रहा है। यहां हम आपको ये क्लियर कर दें कि किसी भी राजनेता पर इस तरह की गई टिप्पणी का हम समर्थन नहीं करते हैं। जनता को अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन वो एक दायरे में और मर्यादा में ही होना चाहिए।
गगन दुबे की वॉल पर जब ये कमेंट आया तब गगन दुबे ने इस टीचर की सोशल कुंडली खंगालने में देर नहीं लगाई। उन्होंने एक पिक पोस्ट की। जो शायद कुशवाहा के सोशल मीडिया अकाउंट के बायो की है। इसमें आप मप्र कर्मचारी कांग्रेस जिलाध्यक्ष लिखा हुआ देख सकते हैं। गगन दुबे ने ये सवाल भी किया कि सरकारी नौकरी में रहते हुए आप देश के कृषि मंत्री पर इस तरह की भाषा बोलने के लिए अधिकृत हैं क्या।
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कुशवाहा की सस्पेंशन और कोर्ट जाने की धमकी
खुद पर कार्रवाई होने के बाद कुशवाहा भी भड़के हुए हैं। उन्होंने मीडिया हाउसेस से बात करते हुए कोर्ट जाने की धमकी तक दी है। कुशवाहा का दावा है कि वो पोस्ट उन्होंने किया ही नहीं है। न किसी का नाम लिया है। ऐसे में उन्हें सजा क्यों दी गई है।
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शिवराज के भाषण पर ट्रोलिंग और सजा की बहस
एक बार फिर बता दें कि किसी भी राजनेता पर इस तरह की टिप्पणी का हम समर्थन नहीं करते, लेकिन सोशल मीडिया पर आप देखेंगे तो इससे भी ज्यादा बुरी तरह नेताओं की ट्रोल आर्मी एक दूसरे पर निशाने साधती है।
अगर गलत है तो इस गलती की सजा सबको ही दी जानी चाहिए और सबसे जरूरी तो ये है कि ट्रोलिंग की इस परंपरा पर ही लगाम कसी जानी जाहिए। ताकि राजनीति और राजनेता दोनों की ही मर्यादा बनी रही। विरोध या नाराजगी दर्ज कराने के और भी कई तरीके हो सकते हैं।
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