छत्तीसगढ़ में नहीं बैठती नेता-अफसरों में पटरी, कटारिया विवाद पर सीएस को पत्र
Arun Tiwari | Aug 03, 2026, 16:50 IST
अमित कटारिया विवाद
छत्तीसगढ़ के आईएएस अमित कटारिया के खिलाफ सांसद बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत लोकसभा की तक पहुंच गई है। लोकसभा सचिवालय ने मुख्य सचिव से पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
छत्तीसगढ़ की सियासत की रवायत कुछ ऐसी है जिसमें नेताओं और अफसरों की पटरी नहीं बैठती। आमतौर पर यह सुनने में आता है कि यहां पर सरकार दरअसल अधिकारी ही चला रहे हैं।
मंत्रियों की अपने सचिवों से नहीं बन रही है तो सांसद,विधायकों की भी अधिकारी नहीं सुनते हैं। फिर चाहे वे सत्ताधारी दल के नेता ही क्यों न हों। आईएएस अधिकारी अमित कटारिया के खिलाफ लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति में पहुंचा मामला इन दिनों चर्चा में है।
यह पहला मौका नहीं है, जब छत्तीसगढ़ के किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर जनप्रतिनिधि के विशेषाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगा हो।
इससे पहले भी एक आईएएस और दो आईपीएस पर इस तरह का आरोप लग चुका है। इन अधिकारियों को संसद के सामने अपनी सफाई देनी पड़ी थी।
बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आईएएस अमित कटारिया के खिलाफ लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कटारिया ने सांसद के साथ अभद्र, अपमानजनक और अवमाननापूर्ण व्यवहार किया तथा संसदीय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।
इस शिकायत के आधार पर लोकसभा सचिवालय ने राज्य शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर पूरे मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। लोकसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए पत्र में यह भी पूछा गया है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा सांसद को फैक्टुअल नोट उपलब्ध कराया जाता है, तो उसकी प्रति संबंधित सांसद को दिए जाने पर कोई आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
सचिवालय ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी और राज्य शासन की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण भी तलब किया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार जल्द ही पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा सचिवालय को भेजेगी।
विशेषाधिकार हनन समिति की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद कर रहे हैं। समिति में सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी सदस्य हैं। हालांकि सुनवाई के दौरान वे बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद विशेषाधिकार हनन समिति मामले की सुनवाई करेगी।
समिति यदि प्रथम दृष्टया शिकायत को सही पाती है, तो आईएएस अमित कटारिया को भी अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया जा सकता है।
समिति के निष्कर्ष के आधार पर आवश्यक होने पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को आगे की कार्रवाई के लिए अनुशंसा भी भेजी जा सकती है।
इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के तत्कालीन आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज हो चुकी है। उस समय राजनांदगांव से सांसद रहे संतोष पांडेय ने मौर्य के खिलाफ शिकायत की थी।
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उन्हें विशेषाधिकार समिति के सामने उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देना पड़ा था। इतना ही नहीं पूर्व राज्यसभा सांसद नंदकुमार साय भी आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठा चुके हैं।
उन्होंने तत्कालीन आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता और श्वेता सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की सूचना दी थी। जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए थे।
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच अधिकारों और कार्यक्षेत्र को लेकर लंबे समय से टकराव की स्थिति बनी हुई है।
जनप्रतिनिधियों का तर्क रहता है कि वे जनता के प्रति सीधे जवाबदेह हैं जबकि प्रशासनिक अधिकारी शासन-प्रशासन के नियमों के तहत निर्णय लेने का अधिकार अपने पास मानते हैं। इसी कारण कई बार दोनों पक्षों के बीच मतभेद सार्वजनिक विवाद का रूप ले लेते हैं।
स्वास्थ्य सचिव कटारिया के रवैये से नाराज बृजमोहन अग्रवाल, लोकसभा में शिकायत
नकटी बुलडोजर एक्शन पर बृजमोहन अग्रवाल नाराज : बोले- अफसरों पर हो सख्त एक्शन...
PDS में बायोमेट्रिक फेल? बृजमोहन अग्रवाल के सवाल पर केंद्र ने दिए निर्देश
Interview | क्यों हुई सरकार की बदनामी ? कौन जिम्मेदार ? बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल को सुनिए !
मंत्रियों की अपने सचिवों से नहीं बन रही है तो सांसद,विधायकों की भी अधिकारी नहीं सुनते हैं। फिर चाहे वे सत्ताधारी दल के नेता ही क्यों न हों। आईएएस अधिकारी अमित कटारिया के खिलाफ लोकसभा की विशेषाधिकार हनन समिति में पहुंचा मामला इन दिनों चर्चा में है।
यह पहला मौका नहीं है, जब छत्तीसगढ़ के किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर जनप्रतिनिधि के विशेषाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगा हो।
इससे पहले भी एक आईएएस और दो आईपीएस पर इस तरह का आरोप लग चुका है। इन अधिकारियों को संसद के सामने अपनी सफाई देनी पड़ी थी।
लोकसभा ने मांगी कटारिया की रिपोर्ट :
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कटारिया ने सांसद के साथ अभद्र, अपमानजनक और अवमाननापूर्ण व्यवहार किया तथा संसदीय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।
इस शिकायत के आधार पर लोकसभा सचिवालय ने राज्य शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर पूरे मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। लोकसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए पत्र में यह भी पूछा गया है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा सांसद को फैक्टुअल नोट उपलब्ध कराया जाता है, तो उसकी प्रति संबंधित सांसद को दिए जाने पर कोई आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
सचिवालय ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी और राज्य शासन की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण भी तलब किया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार जल्द ही पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा सचिवालय को भेजेगी।
विशेषाधिकार समिति में बृजमोहन :
समिति यदि प्रथम दृष्टया शिकायत को सही पाती है, तो आईएएस अमित कटारिया को भी अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया जा सकता है।
समिति के निष्कर्ष के आधार पर आवश्यक होने पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को आगे की कार्रवाई के लिए अनुशंसा भी भेजी जा सकती है।
पहले भी अधिकारियों की हो चुकी है शिकायत :
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उन्हें विशेषाधिकार समिति के सामने उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देना पड़ा था। इतना ही नहीं पूर्व राज्यसभा सांसद नंदकुमार साय भी आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठा चुके हैं।
उन्होंने तत्कालीन आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता और श्वेता सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की सूचना दी थी। जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए थे।
नेता अफसरों में टकराव :
जनप्रतिनिधियों का तर्क रहता है कि वे जनता के प्रति सीधे जवाबदेह हैं जबकि प्रशासनिक अधिकारी शासन-प्रशासन के नियमों के तहत निर्णय लेने का अधिकार अपने पास मानते हैं। इसी कारण कई बार दोनों पक्षों के बीच मतभेद सार्वजनिक विवाद का रूप ले लेते हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
नकटी बुलडोजर एक्शन पर बृजमोहन अग्रवाल नाराज : बोले- अफसरों पर हो सख्त एक्शन...
PDS में बायोमेट्रिक फेल? बृजमोहन अग्रवाल के सवाल पर केंद्र ने दिए निर्देश
Interview | क्यों हुई सरकार की बदनामी ? कौन जिम्मेदार ? बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल को सुनिए !
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava