गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक भर्ती विवाद, हाईकोर्ट ने नए विज्ञापन पर लगाई रोक

Krishna Kumar Sikander | Aug 24, 2025, 11:35 IST
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Assistant Professor recruitment dispute in Guru Ghasidas Central University the sootr
Assistant Professor recruitment dispute in Guru Ghasidas Central University the sootr

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में फोरेंसिक साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक पद की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। विश्वविद्यालय ने 22 मई, 2025 को इस पद के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में फोरेंसिक साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक पद की भर्ती प्रक्रिया ने कानूनी मोड़ ले लिया है। विश्वविद्यालय ने मई 22, 2025 को एक विज्ञापन जारी किया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस विज्ञापन पर रोक लगा दी। साथ ही रजिस्ट्रार के साथ एग्जीक्यूटिव काउंसिल को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा है। यह मामला जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान सामने आया।

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विवाद की जड़ 2019 का विज्ञापन और उसका निरस्तीकरण

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने वर्ष 2019 में फोरेंसिक साइंस विभाग में सहायक प्राध्यापक पद के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन के तहत मौमिता सिंहा आइ. अर्जुन राव के अलावा कई ने आवेदन किया था। जब दस्तावेज का सत्यापन हो गया और प्रक्रिया पूरी करने के बाद चयन सूची जारी की गई तो उसमें आइ. अर्जुन राव का नाम 8वें और मौमिता सिंहा का नाम 17वें स्थान पर शामिल हुआ।

साक्षात्कार की प्रक्रिया के दौरान एक अन्य अभ्यर्थी, सुषमा उपाध्याय, ने अपनी अपात्रता के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। इस याचिका के चलते कोर्ट ने विश्वविद्यालय को साक्षात्कार के परिणाम घोषित करने से रोक दिया था। हालांकि, अंतिम सुनवाई में सुषमा की याचिका खारिज हो गई।

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विश्वविद्यालय ने चयन सूची को अंतिम रूप नहीं दिया। इसके बाद, विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने 2019 के विज्ञापन को यह कहकर रद्द कर दिया कि विज्ञापन जारी होने के छह वर्ष बीत चुके हैं और चयन सूची की वैधता केवल एक वर्ष होती है।

नया विज्ञापन और अभ्यर्थियों का विरोध

एग्जीक्यूटिव काउंसिल के निर्णय के बाद विश्वविद्यालय ने 22 मई 2025 को सहायक प्राध्यापक पद के लिए नया विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए। इस कदम से 2019 की भर्ती प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थी आइ. अर्जुन राव और मौमिता सिंहा नाराज हो गए। उनका तर्क था कि 2019 की प्रक्रिया में उनकी मेहनत और चयन के बाद भी परिणाम घोषित नहीं किए गए।

अब नया विज्ञापन जारी कर उनकी उम्मीदों पर पानी फेरा जा रहा है। दोनों अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें 2019 की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और नए विज्ञापन को रद्द करने की मांग की गई।

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हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद 22 मई 2025 के नए विज्ञापन पर तत्काल रोक लगा दी। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और एग्जीक्यूटिव काउंसिल को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब तलब किया है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय को 2019 की भर्ती प्रक्रिया के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस रोक से भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, और अभ्यर्थियों के बीच उम्मीद जगी है कि पुरानी प्रक्रिया को न्याय मिल सकता है।

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विश्वविद्यालय की स्थिति और भविष्य

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के फोरेंसिक साइंस विभाग में सहायक प्राध्यापक की भर्ती का यह मामला न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और मनमाने निर्णय अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने 2019 की भर्ती को रद्द करने का फैसला समय की सीमा का हवाला देकर लिया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यह निर्णय उनके साथ अन्याय है, क्योंकि देरी विश्वविद्यालय की ओर से हुई। हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप से अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय अपने जवाब में क्या तर्क देता है और क्या 2019 की चयन सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट के निर्णय से न केवल याचिकाकर्ताओं, बल्कि अन्य अभ्यर्थियों और विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ेगा।

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