बस्तर में मलेरिया से 10 दिन में 3 बच्चों की मौत, दो साल से नहीं बंटी मच्छरदानी
Harrison Masih | Jul 27, 2026, 09:47 IST
मलेरिया से 3 बच्चों की मौत 2026
बस्तर संभाग में मलेरिया का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। नारायणपुर बालक आश्रम में 10 दिनों के भीतर मलेरिया से तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। जनवरी 2026 से अब तक संभाग में 8 हजार 426 मलेरिया मरीज सामने आए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए अभियान का 14वां चरण चल रहा है। लेकिन इसके बावजूद संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा।
यह स्थिति साफ बताती है कि जमीनी स्तर पर अभियान और हकीकत में बड़ा फासला है। आंकड़े हर जिले में बढ़ते मरीजों की तस्वीर पेश कर रहे हैं।
नारायणपुर आश्रम में तीसरी मौत
बीते 10 दिनों में हुई मौतों में स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में मिले नौ मलेरिया पॉजिटिव छात्र
गंभीर हालत को देखते हुए दो बच्चों को इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया। बाकी बच्चों का इलाज स्थानीय स्तर पर जारी है।
झाड़-फूंक में गंवाया कीमती समय
बाद में उसे रायपुर रेफर किया गया, लेकिन जब तक वह अस्पताल पहुंचा, तब तक काफी देर हो चुकी थी। लगातार हो रही मौतों के बाद प्रशासन की टीम आश्रम पहुंची और बच्चों का दोबारा टेस्ट किया गया।
बस्तर में मलेरिया
बीजापुर में सबसे ज्यादा मरीज
इसके बाद सुकमा में 1 हजार 686, दंतेवाड़ा में 1 हजार 344, नारायणपुर में 896, बस्तर में 809, कोंडागांव में 329 और कांकेर में 189 मरीज दर्ज किए गए हैं। संभाग में कुल 8 हजार 426 मलेरिया मरीजों में से 7021 पी. फाल्सीपेरम और 1168 पी. विवेक्स से पीड़ित पाए गए हैं। 254 मरीज मिक्स मलेरिया के हैं।
जिला अधिकारी बोले, राहत की बात यह है
उनका कहना है कि राहत की बात यह है कि मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आ रही है। हालांकि आंकड़े अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।
दो साल से नहीं बंटी मेडिकेटेड मच्छरदानी
बस्तर में मानसून के साथ जुलाई से दिसंबर तक मलेरिया का पीक सीजन रहता है। इसके बावजूद 2024 से अब तक इस क्षेत्र में मेडिकेटेड मच्छरदानी का वितरण नहीं हुआ है। इससे पहले संभाग में हर साल औसतन 17 लाख मेडिकेटेड मच्छरदानी बांटी जाती थीं।
इस सीजन में भी नहीं मिलेगी मच्छरदानी
इसका मतलब है कि इस पूरे सीजन में भी लोगों तक मच्छरदानी नहीं पहुंच पाएगी। पहले तीन-तीन साल के रोटेशन के तहत हर साल किसी न किसी जिले में मच्छरदानी बांटी जाती थी, लेकिन बीते दो साल से यह प्रक्रिया पूरी तरह ठप है।
बजट मंजूर, फिर भी खरीदी अटकी
मलेरिया कंसल्टेंट के मुताबिक मच्छरदानी की खरीदी की जिम्मेदारी सीजीएमएससी (CGMSC - Chhattisgarh Medical Services Corporation) की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन-किन जिलों और गांवों को कितनी मच्छरदानी की जरूरत है, जिससे वितरण की योजना भी अटकी हुई है।
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