एडीजी की चेतावनी के बाद हड़कंप, पीसीसीएफ ने मांगी रिपोर्ट

Rajesh Lahoti | Jul 06, 2026, 14:51 IST
Share
बस्तर में नया टकराव 2026
बस्तर में नया टकराव 2026

बस्तर में नक्सलवाद कमजोर होने के बाद विस्थापित आदिवासी परिवार अपने गांवों में लौट रहे हैं और सामान्य जीवन शुरू कर रहे हैं। लेकिन वन विभाग द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से विवाद बढ़ गया है।

छत्तीसगढ़ में वर्षों तक नक्सलवाद की आग में झुलसते रहे बस्तर में अब हालात बदल रहे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद जिन गांवों से लोग कभी जान बचाकर भागे थे, अब वहीं लौटकर फिर से खेती-किसानी और सामान्य जीवन शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच वन विभाग की कार्रवाई ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पुलिस मुख्यालय ने खुद वन विभाग को पत्र लिखकर चेताया है कि विभाग की कार्यशैली नक्सल प्रभावित इलाकों में नया असंतोष पैदा कर रही है और कभी भी कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो सकती है। चेतावनी इतनी गंभीर है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को तत्काल सभी संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करनी पड़ी है।

पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट ने बढ़ाई सरकार की चिंता

एडीजी नक्सल विवेकानद ने 24 जून को लिखे पत्र में साफ कहा है कि बीजापुर और आसपास के इलाकों में नक्सलवाद कमजोर पड़ने के बाद बड़ी संख्या में विस्थापित आदिवासी परिवार अपने गांवों में लौट रहे हैं। वर्षों बाद उन्हें उम्मीद जगी है कि अब वे अपनी जमीन पर खेती करेंगे और सामान्य जीवन जी सकेंगे, लेकिन वन विभाग द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण का हवाला देकर खेतों, झोपड़ियों और अन्य निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी तेजी से बढ़ रही है। पुलिस ने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया है कि यदि इस स्थिति को समय रहते नहीं संभाला गया तो यह असंतोष भविष्य में गंभीर कानून-व्यवस्था की समस्या का रूप ले सकता है। जिन इलाकों में बड़ी मुश्किल से शांति लौट रही है, वहां सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी हालात को फिर बिगाड़ सकती है।

ADG letter
ADG letter


जंगल बचाने की कार्रवाई या लौटते ग्रामीणों पर सख्ती

वन विभाग का तर्क है कि आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता, लेकिन दूसरी ओर सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन परिवारों ने वर्षों तक नक्सली हिंसा झेली, गांव छोड़े और अब शांति लौटने पर वापस आए हैं, उनके पुनर्वास का रास्ता आखिर कौन तय करेगा? स्थानीय स्तर पर यह धारणा बन रही है कि सुरक्षा बलों ने जिन इलाकों को नक्सलवाद से मुक्त कराया, वहां लौटने वाले लोगों को अब दूसरे सरकारी विभागों की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि पुलिस मुख्यालय ने अपने पत्र में केवल प्रशासनिक पहलू नहीं, बल्कि सामाजिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी प्रमुखता से उठाया है।

letter
letter


पीसीसीएफ ने मांगी पूरी रिपोर्ट

पुलिस मुख्यालय की गंभीर आपत्ति के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने 1 जुलाई 2026 को मुख्य वन संरक्षक, जगदलपुर को पत्र जारी कर पूरे मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। निर्देश दिया गया है कि वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई, उससे उत्पन्न परिस्थितियों और वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए। माना जा रहा है कि रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य स्तर पर पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी और आगे की रणनीति तय होगी। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि सरकार भी इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। पुलिस और वन विभाग के बीच हुए इस आधिकारिक पत्राचार ने प्रशासनिक समन्वय पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुनर्वास मॉडल पर होंगे सवालिया निशान

बस्तर में सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में है और अब विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पुनर्वास पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। लेकिन यदि गांव लौट रहे आदिवासियों और वन विभाग के बीच टकराव बढ़ता है तो यह सरकार के पुनर्वास मॉडल पर भी सवाल खड़े करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल संरक्षण और आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना अब सबसे बड़ी चुनौती है। यदि इस मुद्दे पर संवेदनशील और समन्वित निर्णय नहीं लिए गए तो वर्षों की मेहनत से बनी शांति पर फिर से संकट के बादल मंडरा सकते हैं। अब सबकी निगाहें उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो सात दिनों के भीतर सरकार के सामने आएगी। यह रिपोर्ट केवल वन विभाग की कार्रवाई का ब्यौरा नहीं होगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि नक्सलवाद के बाद बस्तर की नई तस्वीर विकास की बनेगी या सरकारी विभागों के टकराव की।

ये खबरें भी पढ़ें...

छत्तीसगढ़ वन विभाग में प्रशासनिक सर्जरी, 7 IFS की बदली जिम्मेदारियां

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी जीत : 17 लाख की इनामी नक्सली कमला सोरी ने किया आत्मसमर्पण

नक्सलवाद को बड़ा झटका! आखिरी कमांडर सोड़ी केशा ने 42 साथियों के साथ किया सरेंडर

Bijapur Naxal encounter: 3 नक्सलियों के मारे जाने की खबर, दोनों ओर से फायरिंग जारी

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद
  • बस्तर
  • नक्सलवाद
  • पीसीसीएफ
  • छत्तीसगढ़ वन विभाग
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं