छत्तीसगढ़ में सट्टा सिंडिकेट का खुलासा ; सात बड़े गिरोह चला रहे करोड़ों का खेल, AI की मदद से पुलिस को दे रहे चुनौती

Aishwarya Dwivedi | May 03, 2026, 10:56 IST
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छत्तीसगढ़ में आईपीएल और टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान सट्टा गिरोह सक्रिय हैं। रायपुर के सात प्रमुख सिंडिकेट AI और नए डोमेन के जरिए करोड़ों का अवैध कारोबार ओडिशा व गोवा से संचालित कर रहे हैं।

NEWS IN SHORT

  • रायपुर में सक्रिय 110 से अधिक अवैध सट्टेबाजी साइट्स और ऐप्स।
  • सटोरिये अब AI से सस्ते और सुरक्षित सट्टा ऐप बना रहे।
  • गिरोह का संचालन अब गोवा, ओडिशा और कोलकाता से हो रहा।
  • जेल से छूटने के बाद सटोरिये फिर नेटवर्क में शामिल हुए।
  • 2026 तक सट्टे का टर्नओवर 1.25 लाख करोड़ होने का अनुमान।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब ऑनलाइन सट्टेबाजी का गढ़ बनती जा रही है। महादेव ऐप पर हुई बड़ी कार्रवाइयों के बावजूद शहर में सट्टा सिंडिकेट पूरी तरह सक्रिय है। ताजा जांच में रायपुर के 7 प्रमुख गिरोहों के नाम सामने आए हैं, जो अलग-अलग वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए रोजाना करोड़ों रुपये का दांव लगवा रहे हैं। पुलिस की सख्ती से बचने के लिए इन गिरोहों के सरगना अब छत्तीसगढ़ छोड़कर गोवा, ओडिशा और कोलकाता जैसे राज्यों से अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहे हैं।

इन 7 गिरोहों के हाथ में है सट्टे की कमान

जांच एजेंसियों ने शहर में सक्रिय जिन प्रमुख गिरोहों और उनकी वेबसाइट्स को चिन्हित किया है, उनका विवरण इस प्रकार है:

1.विक्रम राज कोरी गिरोह: इस गैंग में अख्तर मेमन, हर्ष नारवानी (बाबू) और सागर पिंजानी जैसे 5 मुख्य सदस्य शामिल हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से Allpanelexch.com आईडी के जरिए अपना कारोबार फैला रहा है।


2. सागर पिंजानी गैंग: सागर पिंजानी न केवल कोरी गिरोह से जुड़ा है, बल्कि उसका अपना अलग सिंडिकेट भी है। इसमें रितिक, शुभम धुरंधर और विशाल बेलानी सहित 6 सहयोगी सक्रिय हैं, जो Power7777.com का संचालन करते हैं।


3. रितेश गोविन्दानी गिरोह: रितेश के साथ बाबू बत्रा, सागर हेमनानी और कमलेश साहू जैसे लोग जुड़े हैं। इनका नेटवर्क classicexch99.com वेबसाइट के जरिए फैला हुआ है।


4. गुलशन उर्फ बाबू खेमानी गिरोह: यह रायपुर का बड़ा नेटवर्क माना जाता है। इसमें करण खेमानी, ब्रह्मानंद खेमानी और दीनू मास्टर जैसे 5 प्रमुख नाम हैं, जो 3STUMPS247.com और diamondmaster.com जैसी साइट्स संभाल रहे हैं।


5. कमल राघवानी सिंडिकेट: कमल के साथ पियूष जैन और जित्तू सिंह मुख्य पार्टनर हैं। इस गिरोह की खासियत यह है कि इनके पास फरार चल रहे 6 ऐसे आरोपी हैं जिनका काम केवल फर्जी बैंक खातों और सिम कार्ड की व्यवस्था करना है। यह Classic7777.com आईडी चलाते हैं।


6. गौरव सचदेवा और दीपक गैंग: यह गिरोह ऋषभ रंगलानी और ओम खेमानी की मदद से Powerexch.com के जरिए सट्टा खिलवा रहा है।


7. अर्पित लोवंशी नेटवर्क: अर्पित अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर ramco777.com का संचालन कर रहा है।

Seven Betting Gangs Unmasked
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जेल से छूटते ही फिर सक्रिय, बदला काम करने का तरीका

हैरानी की बात यह है कि रायपुर पुलिस ने आईपीएल के पिछले 36 दिनों में 29 सटोरियों को दबोचा है, लेकिन इनमें से अधिकांश जमानत पर बाहर आते ही दोबारा गिरोह में शामिल हो गए हैं। अब ये गिरोह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का सहारा ले रहे हैं। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये अपराधी महज 5 से 50 हजार रुपये में सट्टा ऐप बनवा लेते हैं। ये ऐप्स प्ले स्टोर पर नहीं होते, बल्कि गुप्त तरीके से 'APK' फाइल के जरिए ग्राहकों के फोन में इंस्टॉल कराए जाते हैं, जिससे इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

महादेव ऐप की तर्ज पर डोमेन बदलकर खेल जारी

सीबीआई, ईडी और ईओडब्ल्यू जैसी एजेंसियों की सख्ती के बाद भी सट्टे का यह काला कारोबार थमा नहीं है। सटोरियों ने पुराना डोमेन ब्लॉक होने पर नया नाम रख लिया है। अकेले रायपुर में इस समय 110 से ज्यादा अवैध साइट्स और ऐप्स चल रहे हैं। सिंडिकेट का प्रभाव केवल रायपुर तक सीमित नहीं है; महासमुंद, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव और रायगढ़ में भी इनके गुर्गे सक्रिय हैं।

45 करोड़ लोग प्रभावित, अरबों का टर्नओवर

आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेम्स के जाल में फंस चुके हैं, जिन्हें करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 तक अवैध सट्टेबाजी का यह कारोबार 1.25 लाख करोड़ रुपये (15 बिलियन डॉलर) के आंकड़े को छू सकता है। फिलहाल, रायपुर पुलिस और साइबर सेल इन गिरोहों के तकनीकी मददगारों और सिम सप्लाई करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।

निष्कर्ष

कठोर कानूनी कार्रवाई और वेबसाइट्स ब्लॉक होने के बावजूद सट्टा गिरोह तकनीक का सहारा लेकर पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। AI के माध्यम से सस्ते ऐप बनाना और बाहरी राज्यों से नेटवर्क संचालित करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। जब तक तकनीकी लूपहोल्स और जमानत के बाद की गतिविधियों पर सख्ती नहीं होगी, यह सिंडिकेट बढ़ता रहेगा।

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