साय कैबिनेट में शामिल होंगी महिला विधायक, कांग्रेस के चेहरे में बदलाव की आहट
Arun Tiwari | May 18, 2026, 15:43 IST
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छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं।
Raipur छत्तीसगढ़ की राजनीति अगले कुछ हफ्तों में बड़े बदलावों की तरफ बढ़ रही है। यह बदलाव किसी बड़ी सियासी रणनीति का हिस्सा है। सरकार का आधा वक्त बीत गया है और आधा वक्त बाकी है। अगले विधानसभा चुनावों की तरफ छत्तीसगढ़ की सियासत बढ़ चली है। बीजेपी और कांग्रेस में यह परिवर्तन अगले चुनावों को देखते हुए ही हो रहा है।
एक तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस संगठन में भी बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। सत्ता और संगठन दोनों ही खेमों में अंदरखाने मंथन जारी है। यह सब कुछ अगले महीने में होने के आसार नजर आ रहे हैं। यानी अगला एक महीना दोनों ही राजनीतिक दलों के लिए परिवर्तन काल है।
सूत्रों के मुताबिक अगले महीने के अंत तक साय मंत्रिमंडल का विस्तार लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकता है। जबकि दो से चार मंत्रियों की विदाई की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में तैर रही हैं। खास बात यह है कि सरगुजा संभाग के दो मंत्रियों के नामों को लेकर सबसे ज्यादा अटकलें लगाई जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व को लेकर केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह संतुष्ट है। पार्टी आगामी चुनाव भी उनके नेतृत्व में लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि 2 से 4 मंत्रियों के विभाग या चेहरे बदले जा सकते हैं।
इस बार पार्टी नए और युवा चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में भावना बोहरा, पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी आदिवासी महिला विधायक का नाम शामिल बताया जा रहा है।
इस पूरे फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा महिला प्रतिनिधित्व को लेकर हो रही है। राज्य गठन के बाद से अब तक लगभग हर सरकार में एक महिला मंत्री जरूर रही है। लेकिन इस बार बीजेपी महिला चेहरों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में दिखाई दे रही है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि इस बार कम से कम दो महिला मंत्रियों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
यदि समीकरण अनुकूल रहे तो संख्या तीन तक भी पहुंच सकती है। महिला चेहरों में सबसे चर्चित नाम पूर्व मंत्री लता उसेंडी का बताया जा रहा है। यदि पार्टी पूर्व मंत्रियों को दोबारा मौका देती है तो बस्तर से लता उसेंडी मजबूत दावेदार बन सकती हैं। उनके जरिए बीजेपी आदिवासी और महिला दोनों समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।
यदि डिप्टी सीएम स्तर पर बदलाव होता है तो बीजेपी किसी महिला चेहरे को आगे ला सकती है। राजनीतिक चर्चाओं में लता उसेंडी और रेणुका सिंह के नाम सामने आ रहे हैं। इसके पीछे बीजेपी की सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति देखी जा रही है। पार्टी यदि किसी महिला आदिवासी या ओबीसी चेहरे को आगे करती है तो इससे महिला प्रतिनिधित्व के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक और सरगुजा-बस्तर क्षेत्र में भी मजबूत संदेश जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी अब सिर्फ सरकार चलाने पर नहीं बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की सामाजिक और क्षेत्रीय रणनीति पर भी फोकस कर रही है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो विधायक भावना बोहरा को क्षेत्रीय आधार पर मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। हालांकि बीजेपी अंतिम समय में कोई नया चेहरा सामने लाकर चौंका भी सकती है।
कांग्रेस में भी सियासी हलचल कम नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खेमे ने एक बार फिर संगठनात्मक लड़ाई में बढ़त बनाते हुए विधायक संगीता सिन्हा को प्रदेश महिला कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनवा दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में उन्हें स्थायी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।
कांग्रेस के भीतर यह नियुक्ति केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन का संकेत भी मानी जा रही है। राजनीतिक जानकार इसे भूपेश खेमे की बड़ी रणनीतिक जीत मान रहे हैं। वहीं पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि प्रदेश कांग्रेस में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है।
अगले विधानसभा चुनाव में अब लगभग दो से ढाई साल का समय बचा है। ऐसे में पार्टी जिस चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी उसी की अगुआई में चुनावी रणनीति तैयार होगी। लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस अब जमीनी नेताओं को ज्यादा महत्व देने की तैयारी में है।
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि दीपक बैज कांग्रेस अध्यक्ष के रुप में प्रभावी साबित नहीं हुए हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी को हर चुनाव में हार ही मिली है। वे अपनी टीम भी तैयार नहीं कर पाए। उनका कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। ऐसे में अब जो पीसीसी चीफ बनेगा उसकी अगुवाई में ही अगला विधानसभा चुनाव होगा।
टीएस सिंहदेव ने एक बार फिर अध्यक्ष पद का दावा ठोक दिया है। दीपक बैज अध्यक्ष बने रहना चाहते हैं। भूपेश बघेल की राष्ट्रीय नेतृत्व से नजदीकी के कारण उनकी राय की अनदेखी नहीं की जा सकती है। बघेल के खेमे से विधायक उमेश पटेल की दावेदारी है। पार्टी के सूत्रों की मानें तो आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए नए पीसीसी चीफ को कमान सौंपी जा सकती है।
बीजेपी और कांग्रेस अब चुनाव से ठीक पहले बदलाव करने के बजाय पहले से रणनीतिक तैयारी के मॉडल पर काम कर रही हैं। बीजेपी सत्ता बचाने तो कांग्रेस सत्ता पाने की दौड़ में हैं। बदलाव के पीछे 2028 विधानसभा चुनाव के लिए अभी से मजबूत टीम तैयार करना। नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना और युवा, आक्रामक और सामाजिक संतुलन वाले नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
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एक तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस संगठन में भी बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। सत्ता और संगठन दोनों ही खेमों में अंदरखाने मंथन जारी है। यह सब कुछ अगले महीने में होने के आसार नजर आ रहे हैं। यानी अगला एक महीना दोनों ही राजनीतिक दलों के लिए परिवर्तन काल है।
विष्णु की टीम में बदलाव :
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व को लेकर केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह संतुष्ट है। पार्टी आगामी चुनाव भी उनके नेतृत्व में लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि 2 से 4 मंत्रियों के विभाग या चेहरे बदले जा सकते हैं।
इस बार पार्टी नए और युवा चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में भावना बोहरा, पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी आदिवासी महिला विधायक का नाम शामिल बताया जा रहा है।
बढ़ेगा महिला प्रतिनिधित्व :
यदि समीकरण अनुकूल रहे तो संख्या तीन तक भी पहुंच सकती है। महिला चेहरों में सबसे चर्चित नाम पूर्व मंत्री लता उसेंडी का बताया जा रहा है। यदि पार्टी पूर्व मंत्रियों को दोबारा मौका देती है तो बस्तर से लता उसेंडी मजबूत दावेदार बन सकती हैं। उनके जरिए बीजेपी आदिवासी और महिला दोनों समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।
महिला डिप्टी सीएम फार्मूला भी चर्चा में :
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी अब सिर्फ सरकार चलाने पर नहीं बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की सामाजिक और क्षेत्रीय रणनीति पर भी फोकस कर रही है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो विधायक भावना बोहरा को क्षेत्रीय आधार पर मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। हालांकि बीजेपी अंतिम समय में कोई नया चेहरा सामने लाकर चौंका भी सकती है।
कांग्रेस में भी बदलाव :
कांग्रेस के भीतर यह नियुक्ति केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन का संकेत भी मानी जा रही है। राजनीतिक जानकार इसे भूपेश खेमे की बड़ी रणनीतिक जीत मान रहे हैं। वहीं पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि प्रदेश कांग्रेस में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है।
अगले विधानसभा चुनाव में अब लगभग दो से ढाई साल का समय बचा है। ऐसे में पार्टी जिस चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी उसी की अगुआई में चुनावी रणनीति तैयार होगी। लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस अब जमीनी नेताओं को ज्यादा महत्व देने की तैयारी में है।
नए पीसीसी चीफ की चर्चा :
टीएस सिंहदेव ने एक बार फिर अध्यक्ष पद का दावा ठोक दिया है। दीपक बैज अध्यक्ष बने रहना चाहते हैं। भूपेश बघेल की राष्ट्रीय नेतृत्व से नजदीकी के कारण उनकी राय की अनदेखी नहीं की जा सकती है। बघेल के खेमे से विधायक उमेश पटेल की दावेदारी है। पार्टी के सूत्रों की मानें तो आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए नए पीसीसी चीफ को कमान सौंपी जा सकती है।
अभी से क्यों कर तैयारी :
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