जमीन खरीदने से पहले जांच करना खरीददार की जिम्मेदारी, हाईकोर्ट ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

Harrison Masih | Apr 06, 2026, 14:43 IST
Share
cg-high-court-land-purchase-buyer-responsibility-decision
cg-high-court-land-purchase-buyer-responsibility-decision

हाईकोर्ट ने जमीन खरीदी-बिक्री से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यदि जमीन का विवाद पहले से कोर्ट में लंबित हो, तो बाद में खरीदने वाले व्यक्ति को अलग से सुनवाई का अधिकार नहीं मिलता। खरीदने से पहले रिकॉर्ड की जांच करना खरीदार की जिम्मेदारी है।

NEWS IN SHORT

  • हाईकोर्ट ने जमीन विवाद केस पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
  • जमीन खरीदने से पहले रिकॉर्ड की जांच खरीदार की जिम्मेदारी है।
  • लंबित मामले के दौरान खरीदी गई जमीन पर खरीदार को अलग से सुनवाई का अधिकार नहीं।
  • कोर्ट ने ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 55 का हवाला दिया।

NEWS IN DETAIL

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमीन खरीदी-बिक्री और मालिकाना हक से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि जमीन खरीदने से पहले रिकॉर्ड की गहराई से जांच करना खरीदार की जिम्मेदारी होती है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमीन से संबंधित मामला पहले से कोर्ट में लंबित है, तो ऐसे खरीदार को अलग से सुनवाई का अधिकार नहीं मिलता। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

लंबित मामले में खरीदार को अलग से सुनवाई जरूरी नहीं

सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा कि यदि जमीन का विवाद पहले से अदालत में विचाराधीन है, तो बाद में जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को अलग से पक्षकार बनाना या नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं है। ऐसे मामलों में खरीदार कानूनी रूप से अपने विक्रेता के अधिकारों का ही उत्तराधिकारी माना जाता है।

टेमरी गांव की जमीन बना विवाद का कारण

यह मामला रायपुर जिले के ग्राम टेमरी स्थित 0.376 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। इस जमीन को दीप्ति अग्रवाल ने नवंबर 2025 में बहुरलाल साहू और यतिराम साहू से करीब 1 करोड़ 20 लाख 28 हजार रुपए में खरीदा था।

इसी जमीन के मालिकाना हक को लेकर संजय कुमार नचरानी और साहू परिवार के बीच पहले से राजस्व न्यायालय में विवाद चल रहा था।

1997 से दर्ज था नाम, तकनीकी गलती का दावा

संजय कुमार नचरानी ने दावा किया कि उन्होंने यह जमीन 1997 में खरीदी थी और उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज था, लेकिन तकनीकी त्रुटि के कारण पोर्टल पर पुराना नाम दिखने लगा। विवाद के दौरान दीप्ति अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर अपना पक्ष सुनने की मांग की।

कोर्ट ने खरीदार की जिम्मेदारी तय की

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह बोनाफाइड परचेजर हैं और बिना सुने आदेश पारित कर उनके अधिकारों का हनन हुआ है।

वहीं संजय नचरानी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जब जमीन का सौदा हुआ, उस समय मामला कोर्ट में लंबित था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने से पहले जमीन के रिकॉर्ड की जांच करना खरीदार की जिम्मेदारी थी।

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट का हवाला

कोर्ट ने अपने फैसले में ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 55 का हवाला देते हुए कहा कि खरीदार को संपत्ति से जुड़े दोषों और लंबित मामलों की जानकारी खुद प्राप्त करनी होती है।

यदि विक्रेता केस हार जाता है, तो खरीदार का दावा भी कमजोर हो जाता है।

Sootr Alert

जमीन खरीदने से पहले रिकॉर्ड और लंबित मामलों की जांच जरूर करें। पोर्टल की जानकारी पर ही पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। लंबित केस वाली संपत्ति खरीदना कानूनी विवाद बढ़ा सकता है।

आगे क्या

राजस्व न्यायालय में मूल मालिकाना हक का विवाद जारी रहेगा। संबंधित पक्ष आगे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। इस फैसले का असर भविष्य के जमीन खरीद मामलों पर भी पड़ सकता है। खरीदारों के लिए ड्यू डिलिजेंस और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (CG High Court) का यह फैसला जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी संदेश देता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि लंबित विवाद वाली जमीन खरीदने से पहले पूरी जांच करना खरीदार की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में बाद में सुनवाई का अधिकार स्वतः नहीं बनता। यह निर्णय भविष्य में संपत्ति खरीदने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी और मार्गदर्शन दोनों है।

ये खबरें भी पढ़ें...

पेंड्रा में राजमेरगढ़ पहाड़ी पर जमीन की खरीद-बिक्री पर विवाद, प्रदेश की सबसे ऊंची पहाड़ी में से एक है, प्रशासन ने लगाई रोक

CG News: छत्तीसगढ़ में जमीन खरीद-बिक्री के नियम कड़े,अब कृषि भूमि पर 5 डिसमिल से कम की नहीं होगी रजिस्ट्री

चांद पर जमीन खरीदने वाला वर्मा परिवार धरती पर नहीं चुका पा रहा कर्ज, बैंक के साथ बड़े फ्रॉड का मामला आया सामने

हवाला पर कार्रवाई: रीवा में कारोबारियों ने जमीन खरीदी नकली खाते से किया 5 करोड़ का भुगतान

Tags:
  • CG News
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • CG High Court
  • जमीन विवाद
  • जमीन की खरीद-बिक्री
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई