अफसरों की कमी से जूझ रहा छत्तीसगढ़, आईएएस और आईपीएस के कई पद रिक्त!

Amresh Kushwaha | Feb 10, 2026, 10:29 IST
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chhattisgarh administrative crisis ias ips shortage impact
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छत्तीसगढ़ में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की भारी कमी के कारण प्रशासनिक ढांचा दबाव में है। 200 से अधिक पद रिक्त होने और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के चलते विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ प्रशासन इन दिनों एक गंभीर चुनौती से गुजर रहा है। राज्य में नीति-निर्धारण और कानून व्यवस्था का काम देखने वाले आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अफसरों की कमी साफ नजर आ रही है। स्वीकृत पदों के मुकाबले तैनात अफसरों की संख्या काफी कम है। इसका सीधा असर राज्य के कामकाज पर पड़ रहा है। आलम यह है कि एक-एक अधिकारी को कई अहम विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।

आईएएस कैडर के 202 पद स्वीकृत, सिर्फ 173 तैनात

जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के कुल 202 पद हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ 173 अफसर ही काम कर रहे हैं। इसका मतलब है कि 29 पद खाली हैं। यदि हम ऊपर के स्तर की बात करें, तो प्रदेश में पांच चीफ सेक्रेटरी लेवल के अफसर हैं। इनमें से चार एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से दो अफसरों की पोस्टिंग मंत्रालय से बाहर की गई है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति ने बढ़ाई राज्य की चिंता

राज्य में अफसरों की कमी का सबसे बड़ा कारण अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना है। फिलहाल, छत्तीसगढ़ के 21 आईएएस अधिकारी केंद्र सरकार में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें अमित अग्रवाल और निधि छिब्बर जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। हाल ही में एस हरीश और डॉ. प्रियंका शुक्ला ने भी दिल्ली का रुख किया है। ये अफसर केंद्र में नीति निर्माण, डिजिटल पहचान, स्वास्थ्य और निवेश जैसे अहम क्षेत्रों में बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

आईपीएस और आईएफएस का भी यही हाल

प्रशासनिक अमले के साथ-साथ पुलिस और वन विभाग भी खाली पदों से जूझ रहा है।

  • आईपीएस (IPS) में कुल 153 पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ 134 अफसर ही काम कर रहे हैं। हालांकि दिसंबर में 5 नए आईपीएस अफसर मिले हैं, फिर भी 19 पद खाली हैं।
  • आईएफएस (IFS) में स्थिति और भी गंभीर है। वन विभाग में 153 पदों के मुकाबले सिर्फ 118 अफसर तैनात हैं, यानी 35 पद खाली पड़े हैं।

30 दिग्गज अफसर संभालेंगे दूसरे राज्यों का मोर्चा

एक तरफ राज्य में अफसरों की कमी है, तो दूसरी तरफ चुनावी जिम्मेदारियों ने और दबाव बढ़ा दिया है। आगामी विधानसभा चुनावों के लिए छत्तीसगढ़ के 25 आईएएस और 5 आईपीएस अफसरों को चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। अगले महीने बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी में चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है। इसके बाद ऋतु सेन, सिद्धार्थ कोमल परदेशी और अवनीश शरण जैसे तेजतर्रार अफसर चुनाव ड्यूटी पर रहेंगे।

जानें क्या है प्रतिनियुक्ति का गणित

अक्सर सवाल उठता है कि ये अफसर कितने समय के लिए राज्य से बाहर जाते हैं। तो नियम के मुताबिक, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति स्थायी तबादला नहीं होता। यह आमतौर पर 5 साल के लिए होती है, जिसे खास हालात में 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है। डिप्टी सेक्रेटरी या डायरेक्टर स्तर पर यह समय 4-5 साल का होता है। यह अनुभव अफसरों को जॉइंट सेक्रेटरी या सेक्रेटरी बनने में मदद करता है, लेकिन राज्य में उनकी कमी बनी रहती है।

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