सड़क पर आवारा मवेशियों की समस्या पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की सख्ती, अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड में एंट्री का आदेश
Krishna Kumar Sikander | Jul 17, 2025, 12:49 IST
Chhattisgarh High Court strict on the problem of stray cattle on the road the sootr
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 15 जुलाई 2025 को रतनपुर-केंदा मार्ग पर एक तेज रफ्तार हाइवा द्वारा 17 गायों को कुचलने और 5 को घायल करने की दुखद घटना ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को तत्काल कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रतनपुर-केंदा मार्ग पर 15 जुलाई 2025 को हुए एक दुखद हादसे में तेज रफ्तार हाइवा ने 17 गायों को कुचल दिया। इस घटना ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। इस हादसे में 17 मवेशियों की मौत और 5 के घायल होने के बाद हाई कोर्ट ने बुधवार, 16 जुलाई 2025 को विशेष डिवीजन बेंच गठित कर मामले की त्वरित सुनवाई की।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बार-बार निर्देशों के बावजूद सड़कों पर मवेशियों की मौत की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और ऐसी घटनाओं को उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही, मुख्य सचिव और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट मैनेजर को शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए गए।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा, जांच अधिकारी को गवाहों से जिरह का अधिकार, कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार
रतनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-45) पर ग्राम बारीडीह के पास एक पेट्रोल पंप के नजदीक सोमवार देर रात तेज रफ्तार हाइवा ने सड़क पर बैठी गायों को कुचल दिया। इस हादसे में 17 गायों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस घटना ने स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों में आक्रोश पैदा कर दिया।
पुलिस ने हाइवा चालक और मवेशी मालिकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 291 के तहत FIR दर्ज की है।हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "यह बेहद दुखद है कि कोर्ट के बार-बार निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू होने के दावों के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, 74 बच्चों को स्कूलों में फिर मिलेगा प्रवेश, आरटीई के तहत मिली बड़ी राहत
अब केवल जवाबदेही तय करना पर्याप्त नहीं है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड में ऐसी लापरवाही को दर्ज करना होगा।" कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब गाड़ियां मवेशियों को पकड़ने के लिए उपलब्ध हैं, तो सड़कों पर आवारा मवेशियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने SOP लागू की है और अब नगरीय निकायों से लेकर ग्राम पंचायतों तक जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि, कोर्ट ने इस जवाब को अपर्याप्त माना और कहा कि केवल जवाबदेही तय करना काफी नहीं है। कोर्ट ने मुख्य सचिव और NHAI के प्रोजेक्ट मैनेजर को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि सड़कों पर मवेशियों को रोकने के लिए गौशालाओं और पशु नियंत्रण तंत्र की क्या व्यवस्था है।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना मान्यता वाले स्कूलों में नए एडमिशन पर लगाई रोक...
छत्तीसगढ़ में सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। यह न केवल सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रही है, बल्कि मवेशियों की जान भी जा रही है। रतनपुर-केंदा मार्ग जैसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों पर मवेशियों का सड़क पर बैठना आम बात है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन और पशु मालिकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हाई कोर्ट ने इस मामले में स्थानीय निकायों, पंचायतों, और NHAI की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि यह एक सामूहिक जवाबदेही का मामला है।
ये खबर भी पढ़ें... मंदिर की संपत्ति पर पुजारी का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
रतनपुर पुलिस ने हादसे के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए हाइवा चालक और मवेशी मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज की। स्थानीय लोगों ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और प्रशासन से सड़कों पर मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय करने की मांग की। सामाजिक संगठनों और पशु कल्याण समूहों ने भी इस घटना की निंदा की और गौशालाओं की संख्या बढ़ाने तथा मवेशी मालिकों पर सख्ती करने की मांग उठाई।
हाई कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल कागजी कार्रवाई और दावे पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार और संबंधित विभागों से ठोस और दीर्घकालिक समाधान की अपेक्षा की है। सड़कों पर मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए गौशालाओं का निर्माण, पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय करना, और सड़क सुरक्षा उपायों को लागू करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रतनपुर-केंदा मार्ग पर 17 गायों की दुखद मौत ने एक बार फिर सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या को उजागर किया है। हाई कोर्ट का सख्त रुख और सर्विस रिकॉर्ड में लापरवाही दर्ज करने का निर्देश इस दिशा में एक बड़ा कदम है। यह मामला न केवल प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल उठाता है, बल्कि पशु कल्याण और सड़क सुरक्षा जैसे व्यापक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करता है। अब यह देखना होगा कि सरकार और NHAI इस मामले में कोर्ट के निर्देशों का कितनी गंभीरता से पालन करते हैं।
thesootr links
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट मवेशी हादसा | रतनपुर-केंदा मार्ग गायों की मौत | हाई कोर्ट जवाबदेही सर्विस रिकॉर्ड | आवारा मवेशी सड़क हादसा | बिलासपुर गाय हादसा FIR | Chhattisgarh High Court Cattle Incident | Cows die on Ratanpur-Kenda road | High Court Accountability Service Records | stray cattle road accident | Bilaspur cow incident FIR
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बार-बार निर्देशों के बावजूद सड़कों पर मवेशियों की मौत की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और ऐसी घटनाओं को उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया। साथ ही, मुख्य सचिव और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट मैनेजर को शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए गए।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा, जांच अधिकारी को गवाहों से जिरह का अधिकार, कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार
हादसे की पृष्ठभूमि और कोर्ट की नाराजगी
पुलिस ने हाइवा चालक और मवेशी मालिकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 291 के तहत FIR दर्ज की है।हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "यह बेहद दुखद है कि कोर्ट के बार-बार निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू होने के दावों के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, 74 बच्चों को स्कूलों में फिर मिलेगा प्रवेश, आरटीई के तहत मिली बड़ी राहत
अब केवल जवाबदेही तय करना पर्याप्त नहीं है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड में ऐसी लापरवाही को दर्ज करना होगा।" कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब गाड़ियां मवेशियों को पकड़ने के लिए उपलब्ध हैं, तो सड़कों पर आवारा मवेशियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?
पहले भी उठ चुका है मुद्दा: 33 बार हो चुकी सुनवाई हाई कोर्ट में सड़कों पर आवारा मवेशियों और इससे होने वाले हादसों को लेकर 2019 से जनहित याचिकाएं (PIL) दायर हैं। इन याचिकाओं में सड़कों की खराब स्थिति, मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाएं, और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। अब तक इस मामले में 33 बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ है। 28 अप्रैल 2025 को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने दावा किया था कि मवेशी हादसों को रोकने के लिए SOP लागू की गई है। उस समय चीफ जस्टिस सिन्हा ने चेतावनी दी थी कि यह SOP कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू हो। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि आवारा मवेशी केवल ग्रामीणों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक व्यापक सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा है। इसके बावजूद, रतनपुर-केंदा मार्ग पर हुई ताजा घटना ने सरकार और प्रशासन की लापरवाही को फिर से उजागर कर दिया। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2025 को निर्धारित की है, लेकिन इस हादसे के बाद विशेष बेंच गठित कर तत्काल सुनवाई की गई।
राज्य सरकार और NHAI पर कोर्ट का दबाव
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना मान्यता वाले स्कूलों में नए एडमिशन पर लगाई रोक...
सड़कों पर आवारा मवेशी: एक गंभीर समस्या
ये खबर भी पढ़ें... मंदिर की संपत्ति पर पुजारी का अधिकार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
पुलिस कार्रवाई और स्थानीय प्रतिक्रिया
कोर्ट की अपेक्षाएं
प्रशासनिक गंभीरता की आवश्यता
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट मवेशी हादसा | रतनपुर-केंदा मार्ग गायों की मौत | हाई कोर्ट जवाबदेही सर्विस रिकॉर्ड | आवारा मवेशी सड़क हादसा | बिलासपुर गाय हादसा FIR | Chhattisgarh High Court Cattle Incident | Cows die on Ratanpur-Kenda road | High Court Accountability Service Records | stray cattle road accident | Bilaspur cow incident FIR
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari