छत्तीसगढ़ शराब घोटाला, चैतन्य बघेल की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ी

Krishna Kumar Sikander | Aug 04, 2025, 15:49 IST
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Chhattisgarh liquor scam the sootr
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को रायपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 दिन की और न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था।

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। रायपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने उनकी 14 दिन की न्यायिक हिरासत अवधि समाप्त होने पर उन्हें दोबारा 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चैतन्य को 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित बघेल निवास से धन शोधन निवार rण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। उन पर शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।

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ईडी का बड़ा दावा, 2,500 करोड़ का घोटाला

ईडी की जांच के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान यह शराब घोटाला हुआ, जिससे राज्य के खजाने को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। जांच में सामने आया कि इस घोटाले से उत्पन्न अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों ने हड़प लिया।

ईडी ने दावा किया कि चैतन्य बघेल ने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि प्राप्त की और इसे अपनी रियल एस्टेट कंपनी ‘बघेल डेवलपर्स’ के प्रोजेक्ट ‘विठ्ठलपुरम’ में निवेश किया। इस धन को ठेकेदारों को नकद भुगतान और फर्जी बैंक प्रविष्टियों के जरिए लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है।

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1,000 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति का संचालन

ईडी ने अपनी रिमांड रिपोर्ट में खुलासा किया कि चैतन्य ने शराब घोटाले से उत्पन्न 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अनवर ढेबर और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर इस धन को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को हस्तांतरित करते थे।

इसके अलावा, त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर चैतन्य ने उनके कर्मचारियों के नाम पर फ्लैट खरीद की आड़ में 5 करोड़ रुपये की अवैध राशि का लेन-देन किया। ईडी के अनुसार, ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से प्राप्त धन को जमा किया था।

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घोटाले में कई बड़े नाम शामिल

इस मामले में ईडी पहले ही कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां कर चुकी है, जिनमें पूर्व मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों शामिल हैं। जांच में सामने आया कि शराब सिंडिकेट ने नकली होलोग्राम और बोतलों का उपयोग कर गैर-कानूनी शराब बिक्री की, जिससे राज्य को भारी राजस्व हानि हुई। ईडी ने अब तक इस मामले में 205 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है और जांच को गहराई से आगे बढ़ा रही है।

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राजनीतिक विवाद और भूपेश बघेल का जवाब

चैतन्य की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई तमनार में कोयला खदानों के लिए अवैध पेड़ कटाई के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए की गई, जिसे कांग्रेस विधानसभा में उठाने वाली थी। भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया, लेकिन साथ ही कहा कि वे न्यायपालिका पर भरोसा रखते हैं और सहयोग करेंगे। कांग्रेस ने इस कार्रवाई के खिलाफ 22 जुलाई को राज्य भर में ‘चक्का जाम’ आंदोलन भी किया।

कानूनी लड़ाई और आगे की जांच

चैतन्य बघेल और उनके पिता भूपेश बघेल ने ईडी और सीबीआई की जांच के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस याचिका की सुनवाई 4 अगस्त को होनी है। चैतन्य के वकील फैजल रिजवी ने ईडी पर तथ्यों को छिपाने और कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि चैतन्य ने पूछताछ में सहयोग नहीं किया और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई। जांच अब भी जारी है, और ईडी का दावा है कि इस घोटाले के तार बघेल परिवार के करीबी सहयोगियों तक जुड़े हैं।

और जटिल होता जा रहा मामला

छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला न केवल एक वित्तीय कांड है, बल्कि यह राज्य की राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा रहा है। चैतन्य बघेल की 14 दिन की न्यायिक हिरासत और ईडी की गहन जांच से यह मामला और जटिल होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और आगे की जांच इस घोटाले के और खुलासे कर सकती है, जिससे छत्तीसगढ़ की सियासत में नया मोड़ आ सकता है।

FAQ

  1. चैतन्य बघेल को ईडी ने क्यों गिरफ्तार किया और उन पर क्या आरोप हैं?
    ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि प्राप्त की और उसे अपनी रियल एस्टेट कंपनी 'बघेल डेवलपर्स' के प्रोजेक्ट में निवेश किया। इसके अलावा, उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति के संचालन में भी भूमिका निभाई।
  2. शराब घोटाले में किन अन्य प्रमुख लोगों की भूमिका सामने आई है?
    ईडी की जांच में कई हाई-प्रोफाइल नाम सामने आए हैं, जिनमें पूर्व मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों शामिल हैं। इन पर नकली होलोग्राम और बोतलों के माध्यम से गैर-कानूनी शराब बिक्री का आरोप है, जिससे राज्य को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की राजस्व हानि हुई।
  3. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी?
    भूपेश बघेल ने चैतन्य की गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि यह कार्रवाई तमनार कोयला खदान मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और न्यायपालिका पर भरोसा जताया। कांग्रेस ने इसके विरोध में 22 जुलाई को राज्यभर में 'चक्का जाम' आंदोलन भी किया।
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