CG के 36% ट्रैफिक जवानों के फेफड़ों में संक्रमण, 5 गुना तक जहरीली हुई हवा
Anjali Dwivedi | Feb 14, 2026, 13:07 IST
chhattisgarh-traffic-police-health-report
रायपुर, भिलाई और बिलासपुर के ट्रैफिक जवानों के स्वास्थ्य परीक्षण में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जहरीली हवा के कारण 36% जवानों के फेफड़ों में संक्रमण मिला है, जो WHO मानकों से 5 गुना अधिक है।
News In Short
- छत्तीसगढ़ के 36% ट्रैफिक पुलिस जवानों के फेफड़ों में संक्रमण फैल चुका है।
- रायपुर में करीब 6 लाख वाहन 15 साल से पुराने हैं, जो प्रदूषण का मुख्य कारण हैं।
- जवानों में सांस फूलना, पुरानी खांसी, एलर्जी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
- वायु सुधार के लिए मिले 300 करोड़ रुपए में से अब तक 191 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
News In Detail
एक अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों पर 10-10 घंटे ड्यूटी करने वाले 36% जवानों के फेफड़े अब शत-प्रतिशत ठीक नहीं हैं। उनमें संक्रमण फैल चुका है।
0ccacfc0-330
मौत की दस्तक देती जहरीली हवा
यह विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के मानक से 5 गुना ज्यादा है। इस प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह वाहनों से निकलता धुआं और उड़ती धूल है, जिसका सीधा असर वहां तैनात छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों पर पड़ रहा है।
डर ऐसा कि जांच से किया इनकार
रायपुर: 6% जवानों की हालत गंभीर
भिलाई और बिलासपुर: फेफड़ों पर ब्रोंकाइटिस का साया
वहीं बिलासपुर में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 34% जवानों के फेफड़ों में 'रिस्ट्रिक्टिव लंग्स डिसीज' के लक्षण मिले हैं।
करोड़ों का फंड, फिर भी हालात जस के तस
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत भी करोड़ों रुपए दिए गए हैं, लेकिन असलियत यह है कि आज भी ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ा जवान बिना किसी सुरक्षा के जहरीली हवा को सांस में खींचने के लिए मजबूर है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह साफ हुआ है कि चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी प्रदूषण की वजह से हाई रिस्क पर हैं। वाहनों के धुएं से निकलने वाले कार्बन और बेंजीन कैंसर के प्रमुख कारक (Carcinogens) हैं। प्रशासन के सामने हमने कई बार यह मुद्दा उठाया है। यदि हमें ट्रैफिक जवानों को बचाना है, तो चौराहों पर 10 फीट के 'ग्लास केबिन' बनाने होंगे। इससे वे सुरक्षित रहकर भी ट्रैफिक को आसानी से नियंत्रित कर सकेंगे।
अंबेडकर अस्पताल की क्लीनिकल स्टडी स्पष्ट करती है कि रायपुर में वायु प्रदूषण से सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ा है। सड़क या हाईवे के किनारे रहने वाले और वहां अधिक समय बिताने वाले कर्मचारियों के फेफड़ों की कार्यक्षमता तेजी से घट रही है। इनमें अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और गंभीर श्वसन रोग उभर रहे हैं। बचाव के लिए अनिवार्य रूप से मास्क लगाएं और समय-समय पर फेफड़ों की जांच करवाते रहें।
छत्तीसगढ़ में बस्तर फाइटर्स: नक्सलवाद के खिलाफ राज्य की नई पहल
छत्तीसगढ़ सरकार के लिए पर्यटन बना घाटे का सौदा, नुकसान पूरा करने के लिए 19 निवेशकों को न्यौता
कोंडागांव में सरकारी मक्का प्लांट पर हमला, दफ्तर-गाड़ियों में तोड़फोड़
दंतेवाड़ा में 500 के नकली नोटों का जाल, ऐसे करें असली नोट की पहचान
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman