सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ डीजीपी पर की कड़ी टिप्पणी, कहा आप अक्षम अधिकारी हैं
Arun Tiwari | Aug 07, 2026, 20:11 IST
डीजीपी अरुण डॉ गौतम को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
छत्तीसगढ़ में कस्टोडियल डेथ मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने डीजीपी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने डीजीपी कहा कि आप अक्षम हैं।
छत्तीसगढ़ में कस्टोडियल डेथ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस के मुखिया यानी डीजीपी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को अक्षम अधिकारी बताया।
अदालत ने डीजीपी अरुणदेव गौतम से कहा यू आर टोटली इनकंपिटेंट। डीजीपी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए इस सुनवाई में जुड़े थे। हिरासत में मौत के मामले में कोर्ट सुनवाई कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट हिरासत में हुई मौत की न्यायिक जांच न कराने पर नाराज हुई।यह मामला 2024 का का है। अदालत ने मामले की जांच और पुलिस की भूमिका पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ स्तर पर जिम्मेदारी का निर्वहन सही ढंग से होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह दलील दी गई कि हिरासत में युवक की मौत सिर में गंभीर चोट लगने के कारण हुई थी। इसके बावजूद मामले की जांच और कार्रवाई में कई सवाल खड़े हुए।
न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे नागरिकों के जीवन और मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यदि पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अदालत ने कहा कि न्यायिक जांच केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि तथ्यों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम बननी चाहिए।
पीठ ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और जांच किस स्तर पर पहुंची है। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि शुरुआती जांच में ही गंभीर खामियां सामने आती हैं तो इससे पूरे जांच तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य की होती है। यदि हिरासत के दौरान किसी की मौत होती है तो उसके कारणों की गहराई से जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करना अनिवार्य है।
अदालत ने इस तरह के मामलों में संवेदनशील और जवाबदेह रवैया अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संकेत दिया कि मामले की न्यायिक जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात न हो।
अदालत ने राज्य सरकार से अपेक्षा जताई कि वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
यह मामला एक बार फिर देश में कस्टोडियल डेथ के मामलों और पुलिस जवाबदेही को लेकर बहस के केंद्र में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों को पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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अदालत ने डीजीपी अरुणदेव गौतम से कहा यू आर टोटली इनकंपिटेंट। डीजीपी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए इस सुनवाई में जुड़े थे। हिरासत में मौत के मामले में कोर्ट सुनवाई कर रही थी।
मौत की न्यायिक जांच न कराने पर नाराज :
न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ स्तर पर जिम्मेदारी का निर्वहन सही ढंग से होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
कार्रवाई पर सवाल :
न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे नागरिकों के जीवन और मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यदि पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अदालत ने कहा कि न्यायिक जांच केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि तथ्यों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम बननी चाहिए।
अब तक क्या कार्रवाई :
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य की होती है। यदि हिरासत के दौरान किसी की मौत होती है तो उसके कारणों की गहराई से जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करना अनिवार्य है।
अदालत ने इस तरह के मामलों में संवेदनशील और जवाबदेह रवैया अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संकेत दिया कि मामले की न्यायिक जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात न हो।
अदालत ने राज्य सरकार से अपेक्षा जताई कि वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
कस्टोडियल डेथ फिर चर्चा में :
FAQ
- कस्टोडियल डेथ क्या होती है?
कस्टोडियल डेथ वह स्थिति होती है जब किसी व्यक्ति की पुलिस या न्यायिक हिरासत के दौरान मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना कानून और मानवाधिकारों के लिहाज से आवश्यक माना जाता है। - कस्टोडियल डेथ के मामलों में जांच क्यों जरूरी होती है?
न्यायिक जांच का उद्देश्य हिरासत में हुई मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाना, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा करना और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या दोष सामने आए तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना होता है।
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