हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन में ब्यूरोक्रेसी का दखल: डॉक्टरों के पदों पर अफसरों की तैनाती से IMA भड़का, आर-पार की जंग का ऐलान
VINAY VERMA | Oct 27, 2026, 10:36 IST
छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों और सरकार के बीच टकराव
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और सरकार के बीच तनातनी तेज हो गई है। आईएमए के मुताबिक वजह है डॉक्टरों के पदों पर आईएएस बैठाने का सरकारी फैसला। आईएमए रायपुर ने इसे डॉक्टरों के हक पर डाका बताया है। संगठन ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इस विरोध में अब सियासत भी जुड़ गई है।
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ ने भी डॉक्टरों के समर्थन में मोर्चा खोला है। सवाल यह है कि अस्पतालों की कमान आखिर किसके हाथ में रहे?
आईएमए ने सबसे पहले आयुष्मान नोडल अधिकारी के पद पर सवाल उठाया है। आईएमए इसे विशुद्ध तकनीकी और चिकित्सकीय पद मानता है। नोडल अधिकारी यानी योजना का काम संभालने वाला तय अफसर।
यही आरोप स्टेट हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के डायरेक्टर पद पर भी है। संगठन के मुताबिक इससे डॉक्टरों की तरक्की के रास्ते बंद हो रहे हैं।
इस फैसले के केंद्र में आईएएस (IAS - Indian Administrative Service) अफसर हैं। आईएमए ने राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की तैनाती पर भी आपत्ति जताई है।
संगठन का तर्क है कि अस्पताल की कार्यप्रणाली डॉक्टर ही सबसे बेहतर समझता है। मरीजों का दर्द और जमीनी दिक्कतें भी डॉक्टर को ज्यादा करीब से दिखती हैं।
आईएमए के मुताबिक चिकित्सा नीति के फैसलों में क्लिनिकल अनुभव बेहद जरूरी है। संगठन का मानना है कि तकनीकी समझ के बिना अफसर सिर्फ फाइलें देख पाएंगे।
संगठन के मुताबिक ये पद अनुभव, योग्यता और कार्यक्षमता के आधार पर तय हैं। संगठन की दलील है कि इन पर अफसर आए तो डॉक्टरों की पदोन्नति रुकेगी।
IMA Raipur ने इस चलन को बेहद खतरनाक बताया है। संगठन के मुताबिक कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन का नया पद बनाया गया। यह पद डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) के ऊपर रखा गया है। इस पर प्रशासनिक अफसर को बिठाया गया है।
आईएमए ने कहा है कि पहले डायरेक्टर हेल्थ का पद डॉक्टरों से छीना गया। संगठन इसे खतरनाक ट्रेंड (चलन) की कड़ी बता रहा है। संगठन के मुताबिक इससे डॉक्टरों का नेतृत्व कमजोर हुआ है। लेकिन असली डर आगे का है।
आईएमए का अंदेशा है कि सरकार की नीयत यही रही तो और पद छिनेंगे। इनमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) का पद भी है। मेडिकल कॉलेजों के डीन और अस्पताल अधीक्षक का पद भी इसी आशंका में है।
डीन मेडिकल कॉलेज का प्रमुख होता है। अस्पताल अधीक्षक (एमएस) अस्पताल के रोजमर्रा के कामकाज का जिम्मा संभालता है। सीएमएचओ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी निभाता है। आईएमए को इन तीनों पदों पर भी अफसर बैठाए जाने का डर है। संगठन का सवाल सीधा है। क्या इन कुर्सियों पर भी अफसर बैठेंगे?
आईएमए की मांग साफ है, प्रशासनिक अफसरों की तैनाती का फैसला वापस हो। Indian Medical Association की रायपुर इकाई ने फैसले पर तुरंत पुनर्विचार मांगा है। संगठन ने साफ किया है कि डॉक्टरों के सम्मान से खिलवाड़ नहीं सहेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का मुद्दा भी संगठन ने उठाया है। आईएमए चेतावनी दे चुका है: जल्द कदम न उठे तो बड़ा आंदोलन होगा। प्रदेश भर के चिकित्सक संगठन इसमें एकजुट होकर उतर सकते हैं।
आईएमए के विरोध के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी सामने आई है। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ ने मांगों को जायज बताया है। प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने चेतावनी दी है। उनके मुताबिक मांगें न मानी गईं तो हड़ताल या टकराव के हालात बनेंगे। तब इसके सीधे जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री होंगे।
आईएमए पहले ही आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुका है। ऐसे में यह टकराव डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहा। इस तरह यह मामला अब सियासी मुद्दा भी बन गया है। अब नजर सरकार के अगले कदम पर है।
समझें क्या है पूरा मामला
- इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने अफसरों की दखलंदाजी का विरोध किया है।
- संगठन का आरोप है कि तकनीकी पदों पर गैर-चिकित्सक अफसर तैनात हो रहे हैं।
- आईएमए के मुताबिक ये पद डॉक्टरों की पदोन्नति के लिए तय हैं।
- संगठन ने सरकार से फैसले पर तुरंत पुनर्विचार की मांग की है।
- कांग्रेस ने हालात बिगड़ने पर स्वास्थ्य मंत्री को जिम्मेदार बताने की चेतावनी दी।
आयुष्मान नोडल अधिकारी का पद
यही आरोप स्टेट हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के डायरेक्टर पद पर भी है। संगठन के मुताबिक इससे डॉक्टरों की तरक्की के रास्ते बंद हो रहे हैं।
डॉक्टरों के पदों पर आईएएस क्यों खटके?
संगठन का तर्क है कि अस्पताल की कार्यप्रणाली डॉक्टर ही सबसे बेहतर समझता है। मरीजों का दर्द और जमीनी दिक्कतें भी डॉक्टर को ज्यादा करीब से दिखती हैं।
आईएमए के मुताबिक चिकित्सा नीति के फैसलों में क्लिनिकल अनुभव बेहद जरूरी है। संगठन का मानना है कि तकनीकी समझ के बिना अफसर सिर्फ फाइलें देख पाएंगे।
संगठन के मुताबिक ये पद अनुभव, योग्यता और कार्यक्षमता के आधार पर तय हैं। संगठन की दलील है कि इन पर अफसर आए तो डॉक्टरों की पदोन्नति रुकेगी।
कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन पर सवाल
डायरेक्टर हेल्थ का पद पहले, डीएमई बाद में
क्या डीन की कुर्सी पर भी बैठेंगे अफसर?
डीन मेडिकल कॉलेज का प्रमुख होता है। अस्पताल अधीक्षक (एमएस) अस्पताल के रोजमर्रा के कामकाज का जिम्मा संभालता है। सीएमएचओ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी निभाता है। आईएमए को इन तीनों पदों पर भी अफसर बैठाए जाने का डर है। संगठन का सवाल सीधा है। क्या इन कुर्सियों पर भी अफसर बैठेंगे?
प्रशासनिक अफसरों की तैनाती पर क्या मांग?
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का मुद्दा भी संगठन ने उठाया है। आईएमए चेतावनी दे चुका है: जल्द कदम न उठे तो बड़ा आंदोलन होगा। प्रदेश भर के चिकित्सक संगठन इसमें एकजुट होकर उतर सकते हैं।
डॉ. राकेश गुप्ता ने किसे ठहराया जिम्मेदार?
आईएमए पहले ही आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुका है। ऐसे में यह टकराव डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहा। इस तरह यह मामला अब सियासी मुद्दा भी बन गया है। अब नजर सरकार के अगले कदम पर है।
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