सरकारी खरीदी की डील विभाग से नहीं बंगले से, सीएम का अफसरों को नया फरमान, खटाई में पुलिस कमिश्नर सिस्टम

Arun Tiwari | Aug 03, 2025, 12:27 IST
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Government purchase deals are not done through departments but through bungalows the sootr
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छत्तीसगढ़ में सरकारी खरीदी में गड़बड़ी के मामलों से सरकार की किरकिरी हो रही है। छत्तीसगढ़ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को फिलहाल टाल दिया गया है। इन सभी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की अनसुनी खबरों को जानने के लिए 'सिंहासन छत्तीसी' कॉलम पढ़ें।

रायपुर : छत्तीसगढ़ में सरकारी खरीदी में गड़बड़ी के जितने मामले सामने आ रहे हैं उनसे सरकार की किरकिरी हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि सरकारी खरीदी की डील सीधे बंगलों से हो रही है। किसको ठेका मिलेगा,कितना कमीशन होगा सब बातें बंगलों पर ही तय हो रही हैं।

वहीं इन सब बातों को देखते हुए सीएम ने अफसरों को नया फरमान जारी कर दिया है। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में लागू होने वाला पुलिस कमिश्नर सिस्टम फिलहाल खटाई में पड़ गया है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए छत्तीसगढ़ का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।

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If there is any irregularity in government purchase then HOD will be held accountable the sootr
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बंगलों से हो रही है करॅप्शन की डील

छत्तीसगढ़ में सरकारी खरीदी का नया तरीका ईजाद हो गया है। सरकारी खरीदी का पूरा खेल मंत्रियों के बंगलों से खेला जा रहा है। खरीद-फरोख्त की पूरी मॉनिटरिंग बंगलों से हो रही है। 10 में से आधे से ज्यादा मंत्रियों के निज सचिव बंगले से कमीशन का पूरा हिसाब किताब कर रहे हैं। बंगले से ही सप्लायरों से डील होती है।

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दो-एक मंत्री तो अपने निज सचिवों के जाल में फंसकर अपनी रेप्युटेशन को मटियामेट कर चुके हैं। निज सचिवों ने माननीयों को कमाई ऐसा चस्का लगा दिया है कि आई लक्ष्मी को कोई नहीं ठुकरा रहा। खबर तो यहां तक है कि इसकी सारी खबर सीएम हाउस से दिल्ली तक जा रही है लेकिन मंत्रीजी हैं कि कमाई पर कमाई किए जा रहे हैं। अब तो डर ये भी है कि न जाने कब तक कुर्सी रहे,इसलिए एक ही सिद्धांत चल रहा है कि लूट सके तो लूट।

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सरकारी खरीद में गड़बड़ी तो नपेंगे एचओडी इन दिनों छत्तीसगढ़ में सरकारी खरीद का बड़ा गड़बड़झाला सामने आ रहा है। जेम में भी अब गेम हो रहे हैं। 32 हजार का जग, 10 लाख की टीवी, 1300 की हवाई चप्पल और ना जाने क्या क्या। एक के बाद एक सामने आए ऐसे मामलों ने सरकार को झकझोर दिया है। सरकार दंग है कि आखिर ये सब हो क्या रहा है। सीएम ने इसमें सख्ती दिखाई है। सचिवालय से फरमान जारी हो गया है कि यदि अब किसी सरकारी खरीद में झोल नजर आया तो सीधे सचिव,एचओडी और जिलों में कलेक्टरों की जवाबदेही होगी और उन पर सीधे कार्रवाई भी होगी। यह भी कहा गया है कि किसने कहा, किसने सिफारिश की, किसके दबाव में यह सब किया गया। इस तरह के बहाने नहीं चलेंगे। अब देखते हैँ कुछ असर होता है या इसे भी एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दिया जाएगा और खरीद-फरोख्त का यह खेला इसी तरह जारी रहेगा।


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Police commissioner system in trouble the sootr
Police commissioner system in trouble the sootr


खटाई में पुलिस कमिश्नर सिस्टम

छत्तीसगढ़ में बड़े जोर शोर से पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की चर्चाएं शुरु हुईं थीं। लेकिन अब यह मामला खटाई में पड़ गया है। पहले फेज में रायपुर और भिलाई-दुर्ग को मिलाकर पुलिस कमिश्नरेट बनाने का प्लान था। रायपुर और दुर्ग पुलिस ने इसके लिए सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी थी।

मगर चार महीने से ज्यादा हो गया, रायपुर में पुलिस कमिश्नर बिठाने कोई सुगबुगाहट नहीं है। इससे पहले भी कई बार रायपुर और बिलासपुर में पुलिस कमिश्नर बिठाने की बातें हुई मगर उसका क्रियान्वयन नहीं हो पाया। अलबत्ता, पिछली सरकार ने कमिश्नर सिस्टम लागू-लागू करते-करते रायपुर रेंज को दो हिस्सों में बांट दिया था।

सरकार बदली तो दोनों को एक किया गया। रिपोर्ट के हिसाब से यदि रायपुर अगर पुलिस कमिश्नरेट बन गया तो आईजी स्तर का कमिश्नर होगा, वहीं एसपी स्तर के कम-से-कम चार डिप्टी पुलिस कमिश्नर होंगे।

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