फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, नहीं मिलेगी पेंशन-ग्रेच्युटी

Aishwarya Dwivedi | May 09, 2026, 09:43 IST
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हाईकोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी रोकने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि अवैध नियुक्ति पर भविष्य के लाभ नहीं मिलेंगे।

NEWS IN SHORT

  • फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नियुक्ति पूरी तरह अवैध है।
  • रिटायरमेंट के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी।
  • जांच किसी भी समय, रिटायरमेंट के बाद भी संभव है।
  • सेवा के दौरान प्राप्त वेतन की वसूली नहीं की जाएगी।
  • हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कड़े निर्णय को सही ठहराया।

NEWS IN DETAIL

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा का लाभ उठाने वालों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बेहद सख्त और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति का आधार ही 'फर्जी' है, तो वह सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य किसी भी प्रकार के सेवा लाभों का हकदार नहीं होगा। कोर्ट के इस कड़े रुख से राज्य में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

सेवानिवृत्त अधिकारी के लाभ पर रोक का मामला

यह मामला रायपुर के कृष्णापुरी अमलीडीह निवासी पीएल नायक से जुड़ा है। नायक ने अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के तहत बंजारा जाति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सरकारी सेवा में सहायक संचालक के पद पर नियुक्ति पाई थी। पदोन्नति पाते हुए वे जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय में डिप्टी डायरेक्टर के पद तक पहुंचे और 30 जून 2021 को सेवानिवृत्त हुए।

उनकी सेवानिवृत्ति के बाद, विभाग ने उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाते हुए पेंशन, ग्रेच्युटी औरजीपीएफ (GPF) समेत अन्य सभी लाभों पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ उन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने कोई जानकारी नहीं छिपाई और लंबी सेवा के बाद लाभ रोकना अनुचित है।

पेंशन पर रोक, वेतन पर राहत

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु स्पष्ट किए:

1. नियुक्ति का आधार अवैध: यदि नियुक्ति ही गलत प्रमाण पत्र पर हुई है, तो उसे कानूनी रूप से सही नहीं माना जा सकता।

2. जांच की कोई समय सीमा नहीं: जाति प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच सेवा के दौरान या रिटायरमेंट के बाद, कभी भी की जा सकती है।

3. वेतन की वसूली नहीं, पर लाभ नहीं: कोर्ट ने उदारता दिखाते हुए यह तो कहा कि सेवा के दौरान दिए गए वेतन की वसूली नहीं की जाएगी, लेकिन भविष्य के लाभ (पेंशन आदि) पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।

758 फर्जी प्रमाण पत्रों का हुआ खुलासा

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य गठन के बाद से अब तक 758 फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों की जांच की गई है। इनमें से 267 प्रमाण पत्र आधिकारिक रूप से अमान्य पाए जा चुके हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की एक सूची भी जारी की है जिनके प्रमाण पत्र निरस्त किए गए हैं।

फैसले का प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब उन सभी मामलों में कार्रवाई तेज होगी जो लंबे समय से जांच समितियों के पास लंबित थे। यह फैसला उन वास्तविक पात्र उम्मीदवारों के लिए न्याय की उम्मीद लेकर आया है, जिनका हक फर्जी प्रमाण पत्र धारकों ने छीना था। अब सरकारी विभागों में लंबित जांचों को गति मिलने के साथ-साथ दोषियों की बर्खास्तगी और लाभ रोकने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि धोखाधड़ी से प्राप्त नौकरी का आधार ही शून्य होता है। यह निर्णय वास्तविक पात्र उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक शुचिता बनाए रखेगा।

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