बिना मोबाइल ट्रेनिंग कैंप में जाते हैं नेता,राहुल गांधी का ट्रेनर सिखा रहा कराटे
Arun Tiwari | Jun 27, 2026, 17:35 IST
राहुल गांधी का ट्रेनर सिखा रहा कराटे
रायपुर में कांग्रेस के 10-दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में जिला अध्यक्षों के लिए कड़े नियम लागू हैं, जहाँ मोबाइल जमा कराकर अनुशासन, योग, सांगठनिक गुर और राहुल गांधी के ट्रेनर द्वारा कराटे सिखाए जा रहे हैं।
RAIPUR : रायपुर में चल रहे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण को लेकर बड़े कड़े नियमों का पालन किया जा रहा है। नेताओं को सेशन में जाने से पहले अपना मोबाइल फोन बाहर जमा करना पड़ता है। यह मोबाइल उनको तभी मिलता है जब प्रशिक्षण सत्र खत्म हो जाता है। जिला अध्यक्षों को कराटे की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। जिन ट्रेनर ने राहुल गांधी को कराटे सिखाया है वही छत्तीसगढ़ के जिला अध्यक्षों को कराटे सिखा रहे हैं। इस शिविर में योग अभ्यास भी अनिवार्य किया गया है। सुबह योगा करने के बाद ही अन्य काम शुरु होते हैं। नेताओं की फिटनेस पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चल रहे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में अनुशासन, संगठन और फिटनेस पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने इस प्रशिक्षण को केवल राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे संगठनात्मक क्षमता, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक दक्षता विकसित करने का माध्यम बनाया है। यही वजह है कि शिविर में शामिल जिला अध्यक्षों के लिए कई कड़े नियम लागू किए गए हैं। नेताओं को फिट बनाने के लिए मेहनत करवाई जा रही है ताकि वे लोगों के बीच सक्रिय रहें जिसका परिणाम आने वाले चुनावों में नजर आए।
सबसे अहम नियम मोबाइल फोन को लेकर बनाया गया है। प्रशिक्षण सत्र में प्रवेश करने से पहले सभी जिला अध्यक्षों को अपना मोबाइल फोन बाहर निर्धारित काउंटर पर जमा कराना पड़ता है। सत्र के दौरान किसी भी नेता को मोबाइल रखने की अनुमति नहीं है। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद ही उन्हें उनका मोबाइल वापस दिया जाता है। पार्टी का मानना है कि मोबाइल फोन से दूरी बनाने से प्रतिभागियों का पूरा ध्यान प्रशिक्षण पर केंद्रित रहेगा और वे बिना किसी व्यवधान के सत्र में सक्रिय भागीदारी कर सकेंगे।
इसके अलावा शिविर के अंदर की बातें,तस्वीरें या वीडियो बाहर नहीं जाते। सूत्रों के अनुसार शिविर में संगठन को मजबूत करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने, जनसंपर्क बढ़ाने और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और वरिष्ठ नेताओं द्वारा सत्र लिए जा रहे हैं। इन सत्रों में जिला अध्यक्षों को संगठन संचालन के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं।
इस प्रशिक्षण शिविर की एक खास बात यह भी है कि इसमें कराटे का प्रशिक्षण भी शामिल किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने शारीरिक फिटनेस और आत्मरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला अध्यक्षों के लिए कराटे सत्र आयोजित किए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी को कराटे का प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षक ही रायपुर में जिला अध्यक्षों को भी कराटे की बारीकियां सिखा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान संतुलन, अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शिविर में योग अभ्यास भी अनिवार्य किया गया है। हर दिन की शुरुआत योग सत्र से होती है और योग पूरा होने के बाद ही अन्य प्रशिक्षण गतिविधियां शुरू होती हैं। योग के माध्यम से प्रतिभागियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ तनाव प्रबंधन के तरीके भी बताए जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि एक सक्रिय और ऊर्जावान संगठन के लिए नेतृत्व का शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना भी उतना ही आवश्यक है।
कांग्रेस के इस प्रशिक्षण शिविर में अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। निर्धारित समय पर सभी प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है और पूरे दिन का कार्यक्रम तय समय-सारिणी के अनुसार संचालित हो रहा है। पार्टी नेतृत्व का मकसद जिला अध्यक्षों को केवल राजनीतिक रूप से दक्ष बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा नेतृत्व तैयार करना है जो संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ-साथ व्यक्तिगत अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली का भी उदाहरण प्रस्तुत कर सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया जा रहा है। मोबाइल से दूरी, नियमित योग, कराटे प्रशिक्षण और संगठनात्मक विषयों पर गहन चर्चा यह संकेत देती है कि पार्टी अपने जिला नेतृत्व को अधिक अनुशासित, सक्रिय और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
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फिटनेस पर फोकस :
मोबाइल से दूरी :
इसके अलावा शिविर के अंदर की बातें,तस्वीरें या वीडियो बाहर नहीं जाते। सूत्रों के अनुसार शिविर में संगठन को मजबूत करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने, जनसंपर्क बढ़ाने और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और वरिष्ठ नेताओं द्वारा सत्र लिए जा रहे हैं। इन सत्रों में जिला अध्यक्षों को संगठन संचालन के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं।
कराटे की ट्रेनिंग :
शिविर में योग अभ्यास भी अनिवार्य किया गया है। हर दिन की शुरुआत योग सत्र से होती है और योग पूरा होने के बाद ही अन्य प्रशिक्षण गतिविधियां शुरू होती हैं। योग के माध्यम से प्रतिभागियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ तनाव प्रबंधन के तरीके भी बताए जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि एक सक्रिय और ऊर्जावान संगठन के लिए नेतृत्व का शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना भी उतना ही आवश्यक है।
अनुशासन का खास ध्यान :
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया जा रहा है। मोबाइल से दूरी, नियमित योग, कराटे प्रशिक्षण और संगठनात्मक विषयों पर गहन चर्चा यह संकेत देती है कि पार्टी अपने जिला नेतृत्व को अधिक अनुशासित, सक्रिय और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
FAQ
- रायपुर में कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर कितने दिनों का है और इसमें क्या होता है?
उ. यह 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर है जिसमें जिला अध्यक्ष भाग ले रहे हैं। इसमें योग, कराटे, संगठन प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास और चुनावी रणनीति के सत्र शामिल हैं। मोबाइल बैन और तय समय-सारिणी के साथ सख्त अनुशासन बनाए रखा जा रहा है। - शिविर में मोबाइल फोन क्यों बैन किया गया है?
उ. ट्रेनिंग सत्र के दौरान नेताओं का पूरा ध्यान प्रशिक्षण पर केंद्रित रखने के लिए मोबाइल जमा कराया जाता है। इसके साथ ही शिविर की बातें, तस्वीरें और वीडियो बाहर न जाएं, यह भी इसकी वजह है। सत्र समाप्त होने के बाद मोबाइल वापस मिलता है। - राहुल गांधी के कराटे ट्रेनर CG में क्यों आए?
उ. कांग्रेस नेतृत्व ने जिला अध्यक्षों की शारीरिक फिटनेस और आत्मरक्षा को ध्यान में रखकर कराटे सत्र शामिल किए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी के कराटे प्रशिक्षक ही रायपुर में आकर जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।
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