छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : अकाउंटेंट के खातों से हुआ 26 करोड़ का लेन-देन
Aishwarya Dwivedi | Jun 06, 2026, 11:34 IST
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शराब घोटाले में ईडी ने भिलाई के व्यवसायी और उसके अकाउंटेंट के खिलाफ चार्जशीट पेश की। व्यवसायी ने अकाउंटेंट को डमी डायरेक्टर बनाकर 26 करोड़ का अवैध लेन-देन और 40 करोड़ की कमीशनखोरी की।
NEWS IN SHORT
- ईडी ने अदालत में छठी पूरक चार्जशीट पेश की।
- भिलाई के व्यवसायी और अकाउंटेंट नए आरोपी बने।
- अकाउंटेंट को मोहरा बनाकर डमी डायरेक्टर बनाया गया।
- अकाउंटेंट के खातों से 26 करोड़ का लेन-देन हुआ।
- नई फर्म बनाकर 40 करोड़ का कमीशन वसूला गया।
NEWS IN DETAIL
अकाउंटेंट का मोहरे की तरह इस्तेमाल
शुरुआत में इस अकाउंटेंट को हर महीने 1 लाख रुपए वेतन देने की बात कही गई, जिसे बाद में बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया। लेकिन जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि यह वेतन भी अंततः घूम-फिरकर वापस उसी व्यवसायी के पास पहुंच जाता था। इतना ही नहीं, अकाउंटेंट के बैंक खातों का इस्तेमाल करके 26 करोड़ रुपए की बड़ी राशि का लेनदेन व्यवसायी तक पहुंचाया गया।
एक अन्य मामले में, व्यवसायी के स्वामित्व वाली चार अन्य फर्मों से अकाउंटेंट के खाते में 1 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए, जो अंततः फिर से मुख्य व्यवसायी के पास ही पहुंचे। चार वर्षों के अंतराल में अकाउंटेंट के नाम पर करीब 97 लाख रुपए का वेतन दिखाया गया, जिसका लाभ भी अप्रत्यक्ष रूप से व्यवसायी को ही मिला।
40 करोड़ का कमीशन तंत्र
इस पूरे तंत्र के माध्यम से लगभग 40 करोड़ रुपए की अवैध कमीशन राशि अर्जित की गई। इस राशि का बंदरबांट भी पूरी योजना के साथ हुआ। इसमें से 4 करोड़ रुपये आरोपी ने अपने पिता के खाते में ट्रांसफर किए, जबकि बाकी की भारी-भरकम राशि अन्य व्यक्तियों, उनकी पत्नियों और सहयोगियों के खातों में भेजी गई। जांच में यह भी पाया गया कि यह अवैध धन भिलाई के एक प्रमुख व्यवसायी के निर्देश पर मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में निवेश किया गया था।
जांच एजेंसियों ने कंपनी के दस्तावेजों में शेयर होल्डिंग का जो ढांचा पाया, वह भी फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है, जहां असली लाभार्थियों को छिपाने के लिए डमी संचालकों को आगे रखा गया था।
निष्कर्ष
FAQ
- 3200 करोड़ रुपये का कथित शराब घोटाला मुख्य रूप से किस भारतीय राज्य से संबंधित है?
उत्तर: यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित है, जहाँ आबकारी विभाग और निजी सिंडिकेट के गठजोड़ से करोड़ों रुपये के राजस्व के नुकसान और अवैध कमाई का आरोप है। - शराब घोटाले की वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच कौन सी केंद्रीय एजेंसी कर रही है?
उत्तर: इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED - Enforcement Directorate) द्वारा की जा रही है, जो देश में वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने का काम करती है। - शराब सिंडिकेट द्वारा भारी-भरकम अवैध कमीशन वसूलने के उद्देश्य से किस विशेष नई फर्म या कंपनी का गठन किया गया था?
उत्तर: अवैध उगाही और कमीशनखोरी को कानूनी रूप देने या छिपाने के लिए 'ब्रेवस्की ब्रेवरेज' (Brewsky Beverages) नामक एक नई फर्म का गठन किया गया था, जिसमें एक अन्य व्यक्ति को नाममात्र का डायरेक्टर बनाया गया था।
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