यहां मां दुर्गा ने किया था महिषासुर का वध, कहलाईं महिषासुर मर्दिनी
Kanak Durga Jha | Apr 02, 2025, 12:57 IST
Maa Durga killed Mahishasur Bade Dongar mountain bastar the sootr
Maa Durga killed Mahishasur Bade Dongar : बड़े डोंगर वही स्थान है जहां मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। आज भी इस पहाड़ी पर शेर के पंजे, भैंसे के सींग और माता के पदचिन्ह जैसी आकृतियां मौजूद हैं।
Maa Durga killed Mahishasur Bade Dongar : छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में स्थित बड़े डोंगर की पहाड़ी न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती है, बल्कि इसकी पौराणिक गाथाएं भी इसे आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनाती हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहां मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। आज भी इस पहाड़ी पर शेर के पंजे, भैंसे के सींग और माता के पदचिन्ह जैसी आकृतियां मौजूद हैं।
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बड़े डोंगर, कभी बस्तर की राजधानी रह चुका है। यह स्थान महाराजा पुरुषोत्तम देव के शासनकाल में बस्तर राज्य की राजधानी बना, लेकिन इसका इतिहास इससे भी प्राचीन है। यह क्षेत्र आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है, जहां बस्तर दशहरे की परंपराएं बड़े डोंगर में भी देखने को मिलती हैं।
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लोक कथाओं के अनुसार, सतयुग में महिषासुर राक्षस ने इस देवलोक पर आक्रमण कर त्राहि-त्राहि मचा दी थी। तब देवताओं के आह्वान पर माता पार्वती ने देवी दुर्गा का रूप धारण किया और महिषासुर से भयंकर युद्ध किया।
युद्ध के दौरान, महिषासुर अपनी जान बचाने के लिए जंगलों और पहाड़ों की ओर भागा, लेकिन बड़े डोंगर की पहाड़ी पर मां दुर्गा ने उसका अंत कर दिया। इसी युद्ध के अवशेष रूप में शेर के पंजे, के सींग और मां के पदचिन्ह पहाड़ी की चट्टानों पर उभरे हुए हैं, जहां आज भी पूजा-अर्चना की जाती है।
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बड़े डोंगर के पहाड़ों और जंगलों को 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। यह क्षेत्र बस्तर के लोगों के लिए गहरी आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। पहले बस्तर की राजधानी बड़े डोंगर में होने के कारण मां दंतेश्वरी का प्रमुख पर्व दशहरा भी यहीं से संचालित होता था।
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बड़े डोंगर, कभी बस्तर की राजधानी रह चुका है। यह स्थान महाराजा पुरुषोत्तम देव के शासनकाल में बस्तर राज्य की राजधानी बना, लेकिन इसका इतिहास इससे भी प्राचीन है। यह क्षेत्र आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है, जहां बस्तर दशहरे की परंपराएं बड़े डोंगर में भी देखने को मिलती हैं।
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महिषासुर का वध करने के लिए मां पार्वती ने धारण किया था देवी दुर्गा का रूप
युद्ध के दौरान, महिषासुर अपनी जान बचाने के लिए जंगलों और पहाड़ों की ओर भागा, लेकिन बड़े डोंगर की पहाड़ी पर मां दुर्गा ने उसका अंत कर दिया। इसी युद्ध के अवशेष रूप में शेर के पंजे, के सींग और मां के पदचिन्ह पहाड़ी की चट्टानों पर उभरे हुए हैं, जहां आज भी पूजा-अर्चना की जाती है।
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बड़े डोंगर का धार्मिक महत्व
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FAQ
- कोंडागांव जिले के बड़े डोंगर की पहाड़ी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व क्या है?
बड़े डोंगर की पहाड़ी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है क्योंकि इसे लोक मान्यताओं के अनुसार, वही स्थान माना जाता है जहां मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। यहां शेर के पंजे, भैंसे के सींग और माता के पदचिन्ह जैसी आकृतियां आज भी मौजूद हैं, जो इस युद्ध की याद दिलाती हैं। - लोक कथाओं के अनुसार, महिषासुर का वध किसने किया और कहां किया था?
लोक कथाओं के अनुसार, महिषासुर का वध मां पार्वती ने देवी दुर्गा का रूप धारण करके किया था। यह युद्ध बड़े डोंगर की पहाड़ी पर हुआ था, जहां मां दुर्गा ने महिषासुर को मारा था। - बड़े डोंगर का बस्तर के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में क्या महत्व है?
बड़े डोंगर का बस्तर के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि इसे 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। यहां बस्तर दशहरे की परंपराएं भी मनाई जाती हैं, और यह स्थान बस्तर के लोगों के लिए गहरी आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है।
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