NCC ने पूर्व नक्सली लीडर देवजी को बताया गद्दार, प्रेस नोट जारी कर कहा- जारी रहेगी लड़ाई

Harrison Masih | Apr 30, 2026, 18:37 IST
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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के बीच आंतरिक कलह सामने आई है, जहां नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी (NCC) ने पूर्व माओवादी नेता वेणुगोपाल देवजी को गद्दार बताते हुए आत्मसमर्पण पर तीखा हमला किया। NCC ने घोषणा की है कि उनका सशस्त्र संघर्ष और गोरिल्ला युद्ध जारी रहेगा।

NEWS IN SHORT

  • NCC ने माओवादी नेता वेणुगोपाल देवजी को ‘गद्दार’ घोषित किया।
  • देवजी के आत्मसमर्पण के बाद संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा।
  • NCC ने अपने बयान में गोरिल्ला युद्ध जारी रखने का दावा किया।
  • माओवादी संगठन का नेतृत्व और विचारधारा पर गहरे मतभेद सामने आए।
  • सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब माओवादी संगठन के इस आंतरिक टकराव पर है।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर माओवादी संगठन के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आ गई है। नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी (NCC) ने तीन पन्नों का एक प्रेस नोट जारी कर पूर्व माओवादी नेता वेणुगोपाल देवजी को निशाने पर लिया है। देवजी और वेणुगोपाल उर्फ सोनू को 'गद्दार' बताया गया और उनके आत्मसमर्पण के बाद उनका संगठन से कोई संबंध न होने की बात कही गई। यह घटनाक्रम नक्सलियों के बीच बढ़ते असंतोष और गहरे आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है।

गद्दारी का आरोप

NCC ने अपने प्रेस नोट में साफ कहा कि देवजी ने जब आत्मसमर्पण किया, तो वह अब संगठन के लिए 'गद्दार' बन चुके हैं। उनका संगठन से कोई संबंध नहीं रह गया है और उन्हें संगठन की विचारधारा का पालन नहीं करना चाहिए। इससे पहले, देवजी ने बिना हथियार के संघर्ष जारी रखने और माओवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की थी, जिसे NCC ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस प्रेस नोट से यह स्पष्ट हो गया है कि माओवादी संगठन अभी भी सशस्त्र संघर्ष और गोरिल्ला युद्ध के जरिए अपनी विचारधारा पर जोर देने की कोशिश कर रहा है।

जारी रहेगी लड़ाई

NCC ने यह भी कहा (press release) कि माओवादी संगठन कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन वह खत्म नहीं हुआ। संगठन का कहना है कि वे गोरिल्ला युद्ध के जरिए अपनी गतिविधियों को जारी रखेंगे और "क्रांति" की अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। इस दौरान, समिति ने यह भी साफ किया कि वह प्रतिबंधों के बावजूद अपनी लड़ाई जारी रखेगी, जिससे यह संकेत मिलता है कि माओवादी विचारधारा अब भी संगठन के लिए अहम है।



आंतरिक एकता का दावा, लेकिन असंतोष गहराता

NCC ने यह दावा भी किया कि संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की दरार या मतभेद नहीं हैं और वे पूरी तरह एकजुट हैं। हालांकि, देवजी का आत्मसमर्पण और उसके बाद संगठन का यह कड़ा रुख, माओवादी संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर गहरे मतभेदों को उजागर करता है। यह भी स्पष्ट हो गया है कि माओवादी अब अपने खोते हुए प्रभाव को पुनः स्थापित करने के लिए पुराने तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

नक्सल गतिविधियों पर बढ़ी सियासी हलचल

देवजी और अन्य माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण के बाद से नक्सल गतिविधियों में लगातार कमी आई है। हालांकि, NCC का यह बयान माओवादी संगठन की अस्तित्व की लड़ाई को फिर से जीवित करने की कोशिश प्रतीत होता है। इस मामले ने छत्तीसगढ़ और अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में सियासी हलचल बढ़ा दी है, जहां सुरक्षा एजेंसियां इस घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

संगठन में आंतरिक बंटवारे का संकेत

NCC के गठन के पीछे यह डर था कि शीर्ष नक्सली नेताओं के आत्मसमर्पण के बाद संगठन के भीतर दरारें पड़ सकती हैं। यह समिति छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में सक्रिय थी, लेकिन इन राज्यों में नक्सल गतिविधियों में कमी आ चुकी है। अब यह स्पष्ट हो रहा है कि नक्सलियों का नेतृत्व और उनकी रणनीतियों में बंटवारा बढ़ रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों की नजर

बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने इस प्रेस नोट को "गलत और भ्रामक" बताया है। उन्होंने कहा कि माओवादी संगठन अब जमीन पर लगभग समाप्त हो चुका है और उसका असर लगातार घटता जा रहा है। स्थानीय लोग अब शांति, विकास और मुख्यधारा से जुड़ने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस प्रकार के बयान अब समाज पर कोई असर नहीं डाल पा रहे हैं और यह केवल पुरानी विचारधारा को जीवित दिखाने की कोशिश है।

इस घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के भीतर के आंतरिक मतभेदों को और अधिक उजागर किया है, जो आने वाले समय में संगठन की दिशा और रणनीति पर असर डाल सकते हैं।

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