राज्योत्सव पर रायपुर के आसमान में दिखेगा रोमांच, ध्रुव हेलीकॉप्टर भरेंगे उड़ान, 2 नवंबर को होगा शानदार एयर शो
Harrison Masih | Oct 30, 2026, 13:17 IST
नवा रायपुर सेंध लेक में 2 नवंबर को दिखाएगी करतब, आज आसमान में उड़ान भरेंगे वायुसेना के हेलीकॉप्टर
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के जश्न में इस बार आसमान में भी रोमांच देखने को मिलेगा। 2 नवंबर को नवा रायपुर के सेंध लेक क्षेत्र में भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर टीम अपना शानदार प्रदर्शन करेगी। इस दौरान स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर आसमान में कई तरह के करतब दिखाएंगे। हेलीकॉप्टरों की एक साथ उड़ान और उनका शानदार तालमेल लोगों के लिए खास आकर्षण रहेगा।
इस बड़े आयोजन से पहले आज यानी 30 अक्टूबर को सारंग टीम के हेलीकॉप्टर रायपुर के ऊपर से गुजरेंगे। ये हेलीकॉप्टर दोपहर में शहर के आसमान में नजर आएंगे। शहरवासी अपने घरों की छतों से इनकी उड़ान देख सकेंगे। आज का यह नजारा 2 नवंबर को होने वाले Air Show की झलक होगा।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर 2 नवंबर को नवा रायपुर में एयर शो का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए सेंध लेक क्षेत्र को चुना गया है। यहां भारतीय वायुसेना की सारंग टीम अपने हवाई करतब दिखाएगी।
इस कार्यक्रम में कई हेलीकॉप्टर एक साथ आसमान में उड़ान भरेंगे। वे अलग-अलग तरीके से अपनी कला दिखाएंगे। कभी एक साथ दिशा बदलेंगे, तो कभी आसमान में अलग-अलग आकृतियां बनाएंगे।
हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी में एयर शो के शुरू होने का सही समय नहीं बताया गया है।
आज होने वाली उड़ान इसी आयोजन से जुड़ी है। 30 अक्टूबर को दोपहर में हेलीकॉप्टर रायपुर के ऊपर से गुजरेंगे। ऐसे में शहर के लोगों को घर की छतों से इनका नजारा देखने का मौका मिलेगा।
आज की उड़ान 2 नवंबर के बड़े एयर शो से पहले हो रही है। सारंग टीम अपने शानदार हवाई करतब और पायलटों के तालमेल के लिए जानी जाती है।
हेलीकॉप्टर को हवा में संभालना आसान काम नहीं होता। खासकर जब कई हेलीकॉप्टर एक साथ उड़ान भर रहे हों। सभी पायलटों को एक-दूसरे की दिशा, रफ्तार और दूरी का ध्यान रखना पड़ता है।
आज की उड़ान से रायपुर के लोगों को इस खास टीम की एक झलक देखने को मिलेगी। वहीं, 2 नवंबर को होने वाला मुख्य प्रदर्शन इससे भी ज्यादा रोमांचक होगा।
एयर शो से पहले सारंग टीम के अधिकारियों ने राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की। यह मुलाकात गुरुवार को लोक भवन में हुई।
इस दौरान एयर कमोडोर नंदा कुमार बाला भी मौजूद रहे। वे एंटी नक्सल टास्क फोर्स के हेडक्वार्टर में एयर ऑफिसर कमांडिंग हैं।
उनके साथ टीम के कई अन्य अधिकारी भी इस मुलाकात में शामिल हुए। इनमें कैप्टन वैभव विशाल, ग्रुप कैप्टन अभिजीत कुमार और कमांडर प्रियांशु शामिल थे।
इसके अलावा स्क्वाड्रन लीडर अंकिता सिंह, स्क्वाड्रन लीडर विनय पाठक, लेफ्टिनेंट शशांक और लेफ्टिनेंट साई अक्षय भी मौजूद रहे।
सारंग टीम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी मुलाकात की। हालांकि, मुख्यमंत्री के साथ हुई इस मुलाकात की तारीख की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कब बनी थी
भारतीय वायुसेना की सारंग टीम का गठन साल 2003 में हुआ था। इसके बाद टीम ने फरवरी 2004 में पहली बार विदेश में अपना प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन सिंगापुर के एशियन एयरोस्पेस एयर शो में हुआ था। इसके बाद सारंग टीम ने देश और विदेश के कई बड़े एयर शो में हिस्सा लिया।
टीम के प्रदर्शन में हेलीकॉप्टरों का शानदार तालमेल देखने को मिलता है। पायलट एक साथ उड़ान भरते हैं और हवा में कई तरह के करतब दिखाते हैं।
सारंग टीम का प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की तैयारी और तकनीकी क्षमता को भी दिखाता है।
सारंग टीम स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर यानी ALH ध्रुव का इस्तेमाल करती है। इन हेलीकॉप्टरों को भारत में बनाया गया है।
ध्रुव हेलीकॉप्टर एक साथ उड़ान भरने और तेजी से दिशा बदलने में सक्षम हैं। इनकी मदद से पायलट हवा में कई तरह के करतब दिखाते हैं।
इन हेलीकॉप्टरों का रंग और डिजाइन भी काफी खास है। इनका डिजाइन मोर से प्रेरित है। यही वजह है कि सारंग टीम की अलग पहचान बनती है।
इस टीम का प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इससे देश में बनी तकनीक और वायुसेना के कौशल की जानकारी भी मिलती है।
सारंग टीम में कुल 5 हेलीकॉप्टर होते हैं। इनमें से आमतौर पर 4 हेलीकॉप्टर हवाई करतब दिखाते हैं। पांचवें हेलीकॉप्टर को बैकअप के तौर पर रखा जाता है।
प्रदर्शन के दौरान सभी हेलीकॉप्टरों का तालमेल बहुत जरूरी होता है। पायलटों को एक तय दूरी बनाकर रखनी पड़ती है। उन्हें अपनी गति और दिशा का भी ध्यान रखना होता है।
अगर किसी एक हेलीकॉप्टर की गति या दिशा में बदलाव होता है, तो बाकी पायलटों को भी उसके अनुसार तालमेल बनाना पड़ता है।
यही वजह है कि इस तरह के प्रदर्शन के लिए पायलटों को काफी अभ्यास करना पड़ता है।
सारंग टीम के एयर शो का सबसे खास हिस्सा फॉर्मेशन फ्लाइंग होता है। इसमें कई हेलीकॉप्टर एक साथ उड़ान भरते हैं। सभी हेलीकॉप्टर एक तय दूरी और दिशा में रहते हैं।
इस दौरान दर्शकों को कई तरह के नजारे देखने को मिलते हैं।
2 नवंबर को कहां होगा एयर शो?
इस कार्यक्रम में कई हेलीकॉप्टर एक साथ आसमान में उड़ान भरेंगे। वे अलग-अलग तरीके से अपनी कला दिखाएंगे। कभी एक साथ दिशा बदलेंगे, तो कभी आसमान में अलग-अलग आकृतियां बनाएंगे।
हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी में एयर शो के शुरू होने का सही समय नहीं बताया गया है।
आज होने वाली उड़ान इसी आयोजन से जुड़ी है। 30 अक्टूबर को दोपहर में हेलीकॉप्टर रायपुर के ऊपर से गुजरेंगे। ऐसे में शहर के लोगों को घर की छतों से इनका नजारा देखने का मौका मिलेगा।
आज की उड़ान क्यों है खास?
हेलीकॉप्टर को हवा में संभालना आसान काम नहीं होता। खासकर जब कई हेलीकॉप्टर एक साथ उड़ान भर रहे हों। सभी पायलटों को एक-दूसरे की दिशा, रफ्तार और दूरी का ध्यान रखना पड़ता है।
आज की उड़ान से रायपुर के लोगों को इस खास टीम की एक झलक देखने को मिलेगी। वहीं, 2 नवंबर को होने वाला मुख्य प्रदर्शन इससे भी ज्यादा रोमांचक होगा।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिली सारंग टीम
इस दौरान एयर कमोडोर नंदा कुमार बाला भी मौजूद रहे। वे एंटी नक्सल टास्क फोर्स के हेडक्वार्टर में एयर ऑफिसर कमांडिंग हैं।
उनके साथ टीम के कई अन्य अधिकारी भी इस मुलाकात में शामिल हुए। इनमें कैप्टन वैभव विशाल, ग्रुप कैप्टन अभिजीत कुमार और कमांडर प्रियांशु शामिल थे।
इसके अलावा स्क्वाड्रन लीडर अंकिता सिंह, स्क्वाड्रन लीडर विनय पाठक, लेफ्टिनेंट शशांक और लेफ्टिनेंट साई अक्षय भी मौजूद रहे।
सारंग टीम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी मुलाकात की। हालांकि, मुख्यमंत्री के साथ हुई इस मुलाकात की तारीख की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कब बनी थी सारंग हेलीकॉप्टर टीम ?
यह प्रदर्शन सिंगापुर के एशियन एयरोस्पेस एयर शो में हुआ था। इसके बाद सारंग टीम ने देश और विदेश के कई बड़े एयर शो में हिस्सा लिया।
टीम के प्रदर्शन में हेलीकॉप्टरों का शानदार तालमेल देखने को मिलता है। पायलट एक साथ उड़ान भरते हैं और हवा में कई तरह के करतब दिखाते हैं।
सारंग टीम का प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की तैयारी और तकनीकी क्षमता को भी दिखाता है।
ध्रुव हेलीकॉप्टर क्यों हैं खास?
ध्रुव हेलीकॉप्टर एक साथ उड़ान भरने और तेजी से दिशा बदलने में सक्षम हैं। इनकी मदद से पायलट हवा में कई तरह के करतब दिखाते हैं।
इन हेलीकॉप्टरों का रंग और डिजाइन भी काफी खास है। इनका डिजाइन मोर से प्रेरित है। यही वजह है कि सारंग टीम की अलग पहचान बनती है।
इस टीम का प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इससे देश में बनी तकनीक और वायुसेना के कौशल की जानकारी भी मिलती है।
सारंग टीम में कितने हेलीकॉप्टर होते हैं?
प्रदर्शन के दौरान सभी हेलीकॉप्टरों का तालमेल बहुत जरूरी होता है। पायलटों को एक तय दूरी बनाकर रखनी पड़ती है। उन्हें अपनी गति और दिशा का भी ध्यान रखना होता है।
अगर किसी एक हेलीकॉप्टर की गति या दिशा में बदलाव होता है, तो बाकी पायलटों को भी उसके अनुसार तालमेल बनाना पड़ता है।
यही वजह है कि इस तरह के प्रदर्शन के लिए पायलटों को काफी अभ्यास करना पड़ता है।
फॉर्मेशन फ्लाइंग में दिखेंगे शानदार करतब
इस दौरान दर्शकों को कई तरह के नजारे देखने को मिलते हैं।
- सभी हेलीकॉप्टरों का एक साथ उड़ान भरना।
- एक साथ अपनी दिशा बदलना।
- तेजी से ऊपर की ओर उड़ान भरना।
- आसमान में अलग-अलग आकृतियां बनाना।
- एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर करतब दिखाना।
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