छोटे कोचिंग सेंटरों पर ताले, बड़े संस्थानों में क्लास जारी, जयपुर में JDA की कार्रवाई पर भेदभाव के आरोप, जांच की मांग
Raghvendra Singh Rathore | Oct 30, 2026, 12:58 IST
जयपुर में छोटे कोचिंग सेंटर सील, बड़े संस्थान चालू; JDA पर भेदभाव का आरोप
जयपुर के गोपालपुरा बायपास पर कोचिंग संस्थानों के खिलाफ JDA की सीलिंग कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। छोटे कोचिंग सेंटरों को पूरी तरह बंद करने और बड़े संस्थानों के केवल बेसमेंट सील करने का आरोप लगा है। महासंघ ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से निष्पक्ष जांच की मांग की है। सवाल है कि जब नियम सभी के लिए समान हैं, तो कार्रवाई के तरीके अलग-अलग क्यों हैं?
जयपुर में कोचिंग संस्थानों के खिलाफ चल रही जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की कार्रवाई पर अब भेदभाव के गंभीर आरोप लगे हैं। गोपालपुरा बायपास पर छोटे कोचिंग संस्थानों को पूरी तरह सील करने, जबकि बड़े संस्थानों को केवल बेसमेंट बंद कर संचालन जारी रखने की अनुमति देने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ ने आरोप लगाया है कि JDA की कार्रवाई में एक समान मापदंड नहीं अपनाए जा रहे हैं। जिन संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या कम है, उनके पूरे परिसर बंद कर दिए गए, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों वाले कई संस्थान आज भी संचालित हो रहे हैं।
महासंघ ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन देकर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित संस्थानों को नियमानुसार राहत देने की मांग की है। दूसरी ओर, JDA का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनीश कुमार नाडार ने The Sootr से बातचीत में कहा कि JDA छोटे और बड़े कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अलग-अलग तरीके से कार्रवाई कर रहा है।
नाडार ने कहा कि जिन छोटे संस्थानों में सबसे कम बच्चे पढ़ते हैं, उन्हें पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वहीं, बड़े कोचिंग संस्थान पहले की तरह संचालित हो रहे हैं। बड़े संस्थानों में केवल बेसमेंट में चलने वाली गतिविधियों को बंद कराया गया है, जबकि बाकी हिस्सों में कक्षाएं जारी हैं।
उनका आरोप है कि JDA की यह कार्रवाई भेदभावपूर्ण है। जब सभी संस्थानों पर एक ही तरह के नियम लागू होते हैं, तो छोटे संस्थानों को पूरी तरह बंद करने और बड़े संस्थानों को संचालन जारी रखने देने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। महासंघ ने पाठशाला और मिस्टी क्लासेस जैसे छोटे संस्थानों की सीलिंग का मुद्दा भी उठाया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब JDA पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सामने गोपालपुरा बायपास के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत कर चुका है।11 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 10-बी विकास समिति ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 115 कोचिंग संस्थानों की सूची रखी थी। इसके बाद JDA, राजस्थान आवासन मंडल और नगर निगम के संयुक्त सर्वे में संबंधित भवनों और परिसरों का भौतिक सत्यापन किया गया।
JDA की ओर से 134 नोटिस जारी किए गए। इनमें 44 परिसरों को सील किया गया, जिनमें 26 कोचिंग सेंटर और 18 लाइब्रेरी शामिल थीं। इसके अतिरिक्त तीन कोचिंग संस्थान दूसरी जगह स्थानांतरित हो गए और 14 बंद या गैर-संचालित मिले। एक मामले में हाईकोर्ट की रोक थी, जबकि चार मामले JDA अपीलीय ट्रिब्यूनल में लंबित थे।
छोटे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा पहली बार सामने नहीं आया है। सितंबर में भी महासंघ ने 100 से कम विद्यार्थियों वाले संस्थानों को नोटिस देने का विरोध किया था। महासंघ का तर्क है कि राजस्थान के कोचिंग विनियमन संबंधी 2025 के कानूनी प्रावधानों में 100 से कम विद्यार्थियों वाले संस्थानों के लिए अलग व्यवस्था है। संगठन का कहना है कि ऐसे छोटे संस्थानों को बड़े व्यावसायिक कोचिंग सेंटरों की श्रेणी में रखकर कार्रवाई करना उचित नहीं है।
JDA की कार्रवाई से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। अधिकारियों ने बताया था कि सीलिंग अभियान में सबसे पहले उन परिसरों पर कार्रवाई की जा रही है, जहां विद्यार्थियों की सुरक्षा को ज्यादा खतरा है। विशेष रूप से बेसमेंट और असुरक्षित भवनों में संचालित संस्थानों को प्राथमिकता दी गई थी। अधिकारियों ने यह भी कहा था कि विद्यार्थियों की परीक्षाओं को देखते हुए कार्रवाई इस तरह की जा रही है कि उनकी पढ़ाई अचानक प्रभावित न हो।
यही तथ्य मौजूदा विवाद को महत्वपूर्ण बनाता है। यदि किसी बड़े संस्थान में केवल बेसमेंट असुरक्षित पाया गया और बाकी भवन नियमों के अनुरूप था, तो आंशिक सीलिंग का आधार हो सकता है। लेकिन यदि छोटे संस्थानों में भी उल्लंघन सीमित हिस्से तक था, तो पूरा परिसर बंद करने का कारण स्पष्ट होना चाहिए।
कोचिंग संस्थानों को गोपालपुरा बायपास से दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में रही है। JDA के प्रवर्तन DIG आनंद शर्मा ने बताया था कि चिह्नित 32 कोचिंग संस्थानों में से 18 स्थानांतरित हो चुके हैं। दूसरी ओर, संचालकों ने दावा किया कि प्रताप नगर के निर्धारित कोचिंग हब में केवल दो संस्थान पहुंचे हैं। बाकी में से कई महेश नगर की 80 फीट रोड की ओर चले गए।
संचालकों ने प्रताप नगर कोचिंग हब में संपत्तियों की ऊंची नीलामी कीमतों को स्थानांतरण में बड़ी बाधा बताया था। इससे एक और सवाल खड़ा होता है। यदि छोटे संस्थान निर्धारित कोचिंग हब का खर्च नहीं उठा सकते, तो उनके लिए सरकार और JDA के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था है? क्या उन्हें एक जगह से हटाकर दूसरे रिहायशी इलाके में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है?
JDA की विजिलेंस विंग के DIG आनंद शर्मा ने कहा है कि कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। भेदभाव के आरोपों पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई विशिष्ट औपचारिक शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाएगी।
JDA पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, शेष नियम-विरुद्ध संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी थी।
गोपालपुरा बायपास का विवाद केवल कोचिंग संस्थानों की सीलिंग तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर रिहायशी इलाकों में नियमों के विरुद्ध संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक और विद्यार्थियों की सुरक्षा का सवाल है। दूसरी ओर, छोटे संस्थानों के साथ समान व्यवहार और उनकी पढ़ाई से जुड़े विद्यार्थियों का भविष्य भी महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना JDA की जिम्मेदारी है। लेकिन कार्रवाई किस आधार पर की गई, कौन-सा नियम तोड़ा गया और किसी परिसर को पूरी तरह बंद करने के बजाय केवल उसका एक हिस्सा क्यों सील किया गया, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ ने आरोप लगाया है कि JDA की कार्रवाई में एक समान मापदंड नहीं अपनाए जा रहे हैं। जिन संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या कम है, उनके पूरे परिसर बंद कर दिए गए, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों वाले कई संस्थान आज भी संचालित हो रहे हैं।
महासंघ ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन देकर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित संस्थानों को नियमानुसार राहत देने की मांग की है। दूसरी ओर, JDA का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
छोटे संस्थान पूरी तरह बंद, बड़े कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई जारी
नाडार ने कहा कि जिन छोटे संस्थानों में सबसे कम बच्चे पढ़ते हैं, उन्हें पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वहीं, बड़े कोचिंग संस्थान पहले की तरह संचालित हो रहे हैं। बड़े संस्थानों में केवल बेसमेंट में चलने वाली गतिविधियों को बंद कराया गया है, जबकि बाकी हिस्सों में कक्षाएं जारी हैं।
उनका आरोप है कि JDA की यह कार्रवाई भेदभावपूर्ण है। जब सभी संस्थानों पर एक ही तरह के नियम लागू होते हैं, तो छोटे संस्थानों को पूरी तरह बंद करने और बड़े संस्थानों को संचालन जारी रखने देने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। महासंघ ने पाठशाला और मिस्टी क्लासेस जैसे छोटे संस्थानों की सीलिंग का मुद्दा भी उठाया है।
134 नोटिस, 44 परिसर सील, कार्रवाई के रिकॉर्ड पर उठे सवाल
JDA की ओर से 134 नोटिस जारी किए गए। इनमें 44 परिसरों को सील किया गया, जिनमें 26 कोचिंग सेंटर और 18 लाइब्रेरी शामिल थीं। इसके अतिरिक्त तीन कोचिंग संस्थान दूसरी जगह स्थानांतरित हो गए और 14 बंद या गैर-संचालित मिले। एक मामले में हाईकोर्ट की रोक थी, जबकि चार मामले JDA अपीलीय ट्रिब्यूनल में लंबित थे।
पहले भी छोटे संस्थानों को लेकर उठ चुके हैं सवाल
JDA ने खुद माना था, खतरनाक बेसमेंट को दी जा रही प्राथमिकता
यही तथ्य मौजूदा विवाद को महत्वपूर्ण बनाता है। यदि किसी बड़े संस्थान में केवल बेसमेंट असुरक्षित पाया गया और बाकी भवन नियमों के अनुरूप था, तो आंशिक सीलिंग का आधार हो सकता है। लेकिन यदि छोटे संस्थानों में भी उल्लंघन सीमित हिस्से तक था, तो पूरा परिसर बंद करने का कारण स्पष्ट होना चाहिए।
कोचिंग हब में शिफ्टिंग के दावों पर भी विवाद
संचालकों ने प्रताप नगर कोचिंग हब में संपत्तियों की ऊंची नीलामी कीमतों को स्थानांतरण में बड़ी बाधा बताया था। इससे एक और सवाल खड़ा होता है। यदि छोटे संस्थान निर्धारित कोचिंग हब का खर्च नहीं उठा सकते, तो उनके लिए सरकार और JDA के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था है? क्या उन्हें एक जगह से हटाकर दूसरे रिहायशी इलाके में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है?
JDA का पक्ष: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हो रही कार्रवाई
JDA पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, शेष नियम-विरुद्ध संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी थी।
अब कार्रवाई की पारदर्शिता पर जवाब देना होगा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना JDA की जिम्मेदारी है। लेकिन कार्रवाई किस आधार पर की गई, कौन-सा नियम तोड़ा गया और किसी परिसर को पूरी तरह बंद करने के बजाय केवल उसका एक हिस्सा क्यों सील किया गया, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
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