राज्य आजीविका मिशन से छिना पोषण आहार सिस्टम, सप्लायर्स का करोड़ों का भुगतान अधर में
Neel Tiwari | Aug 17, 2026, 17:02 IST
आजीविका मिशन से छिना पोषण आहार सिस्टम
टेक होम राशन व्यवस्था में बदलाव से भुगतान अटका है। राज्य जीविका मिशन को व्यवस्था से अलग किया गया। जिम्मेदारी महिला एवं बाल कल्याण विभाग को मिली। MSME सप्लायर्स के करीब 348 करोड़ रुपए लंबित हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- टेक होम राशन का काम आजीविका मिशन से वापस लिया गया।
- अब इसकी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग को मिली।
- प्रदेश में सप्लायर के लगभग 348 करोड़ के भुगतान अटके हैं।
- सरकार ने विवाद में मध्यस्थता का विकल्प बताया।
- अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने इस विकल्प पर सवाल उठाया।
आजीविका फोरम खत्म, फिर मध्यस्थता कैसे होगी?
अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने कोर्ट में तर्क रखा। उन्होंने संस्था की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाया। उनका सवाल था, मध्यस्थता अब किसके सामने होगी? यह सवाल सुनवाई का सबसे अहम बिंदु बन गया।
याचिकाकर्ता ने काम पूरा किया
यह टेंडर पांच मई 2022 को जारी हुआ था। टेंडर में पोषण आहार सामग्री की सप्लाई शामिल थी। कंपनी ने इसके बाद जरूरी समझौते किए। उसने सोया आटा और ग्रिट्स की सप्लाई की। विटामिन और मिनरल प्री मिक्स भी सप्लाई किया गया।
टेंडर में 30 दिन में भुगतान की शर्त थी
कंपनी का कहना है कि उसने सभी सप्लाई पूरी की। इसके बावजूद बड़ी रकम का भुगतान नहीं हुआ। सात इकाइयों से 10.63 करोड़ से ज्यादा बकाया कंपनी ने सात क्षेत्रीय इकाइयों से भुगतान मांगा है। याचिका में इन इकाइयों का बकाया दर्ज है। कंपनी के लेजर में 10 करोड़ 63 लाख 98 हजार 650.09 बकाया बताया गया है।
याचिका के अनुसार भुगतान काफी समय से लंबित है। कंपनी ने मंडला और सागर इकाइयों को पत्र भेजे। इसके बाद प्रधान कार्यालय में भी शिकायत दी गई। एक मई 2025 को प्रधान कार्यालय को आवेदन दिया गया। कंपनी ने भुगतान नहीं मिलने की शिकायत की। उसने बजट मिलने के बावजूद पैसा रोकने का आरोप लगाया।
बदली टेक होम राशन व्यवस्था
सप्लायर ने इस बदलाव पर चिंता जताई है। उसका कहना है कि इससे भुगतान प्रभावित हो गई है। याचिका में भुगतान सुरक्षित करने की मांग की गई है। अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने मध्यस्थता पर उठाया सवाल
मध्यस्थता का विकल्प बताया गया
ऐसे में मध्यस्थता का विकल्प कैसे चलेगा, यह सवाल है। कोर्ट ने सरकार से इसी स्थिति पर जवाब मांगा। कोर्ट के जवाब के बाद स्थिति साफ हो सकती है।
बैंक कर्ज लेकर की सप्लाई
याचिका में संपत्ति नीलामी की आशंका जताई गई है। कंपनी ने सप्लाई में अपनी गलती नहीं मानी है। उसका कहना है कि सामान समय पर तैयार किया गया। इसके बाद तय जगहों पर सामान पहुंचाया गया।
राज्य आजीविका मिशन क्या काम है?
पोषण आहार व्यवस्था भी इससे जुड़ी रही है। महिला समूहों से जुड़े संयंत्र पोषण आहार तैयार करते हैं। यह आहार आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद यह तय हितग्राहियों तक पहुंचता है।
इस व्यवस्था का मकसद पोषण सुधारना है। इसका लक्ष्य कुपोषण की समस्या कम करना भी है। अब टेक होम राशन की जिम्मेदारी बदल गई है। यह जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग को मिली है।
अब सरकार के जवाब पर टिकी अगली सुनवाई
जवाब में मध्यस्थता की स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है। सरकार को भुगतान रोकने की वजह भी बतानी होगी। आजीविका मिशन की मौजूदा भूमिका भी स्पष्ट होगी। फिलहाल इस मामले में अगली कार्रवाई अहम रहेगी।
पूरे प्रदेश के सप्लायर के 348 करोड़ अटके
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