एमपी की 35 सड़कें होंगी फोरलेन, भोपाल-इंदौर समेत ये बड़े मार्ग शामिल
Sourabh Bhatnagar | Sept 18, 2026, 13:17 IST
bhopal raisen mp 35 roads forlane white topping
मध्य प्रदेश की 35 सड़कों पर ट्रैफिक दबाव तय सीमा से ज्यादा हो गया है, इसलिए इन्हें फोरलेन किया जाएगा। भोपाल-सांची-विदिशा, भोपाल-रायसेन-मंडीदीप, इंदौर-उज्जैन और जबलपुर-दमोह-सागर मार्ग शामिल हैं। वाइट टॉपिंग तकनीक से सड़कें मजबूत बनाई जाएंगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश की 35 सड़कों पर ट्रैफिक दबाव तय सीमा से ज्यादा हो गया है।
- इंडियन रोड कांग्रेस के मानक के मुताबिक इन्हें फोरलेन करना जरूरी है।
- भोपाल-सांची-विदिशा और भोपाल-रायसेन-मंडीदीप जैसे रास्ते चौड़े होंगे।
- इंदौर-उज्जैन मार्ग को फोरलेन से सिक्सलेन बनाया जा रहा है।
- वाइट टॉपिंग तकनीक से सड़कों की मजबूती भी बढ़ाई जाएगी।
35 सड़कों पर क्यों दबाव
पीसीयू का मतलब पैसेंजर कार यूनिट होता है। इसमें हर वाहन को कार के बराबर गिना जाता है। ट्रक, बस और बाइक भी इसमें शामिल होते हैं। इन सड़कों से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं।
ज्यादा ट्रैफिक के कारण सड़कें छोटी पड़ने लगी हैं। वाहनों की रफ्तार भी धीमी हो जाती है। इंडियन रोड कांग्रेस यानी आईआरसी ने इसका मानक तय किया है। इसके मुताबिक इतनी व्यस्त सड़कों को फोरलेन करना जरूरी है।
इसी वजह से पीडब्ल्यूडी ने इन 35 सड़कों को चौड़ा करने का फैसला लिया है।
भोपाल से जुड़ी 4 सड़कें
दूसरी सड़क भोपाल-रायसेन-मंडीदीप कनेक्टर है। यह क्षेत्र औद्योगिक इलाके के रूप में जाना जाता है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में भारी ट्रक गुजरते हैं। इसी वजह से इस सड़क को भी चौड़ा करने का प्रस्ताव है।
इंदौर-उज्जैन में सिक्सलेन
सड़क चौड़ी होने से श्रद्धालुओं को आने-जाने में आसानी होगी। शहर में लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा जबलपुर-दमोह-सागर मार्ग को भी अपग्रेड किया जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए यह मार्ग अहम माना जाता है।
इन दोनों सड़कों के अपग्रेड होने से महाकोशल और मालवा क्षेत्र को फायदा होगा। व्यापार के साथ आम लोगों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी।
वाइट टॉपिंग से क्या फायदा
बारिश में भी सड़क जल्दी खराब नहीं होती। भारी वाहनों के दबाव में भी यह तकनीक कारगर मानी जाती है। पीडब्ल्यूडी के मुताबिक इससे रखरखाव का खर्च घटेगा। आने वाले वर्षों में बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सरकार के पैसे की भी बचत होगी।
कई राज्यों में इस तकनीक का इस्तेमाल पहले से हो रहा है। मध्य प्रदेश में भी इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं।
सड़क सुरक्षा पर भी असर
ट्रैफिक पुलिस के लिए भी व्यवस्था संभालना आसान होगा। लंबी दूरी के सफर में समय की बचत होगी। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को भी राहत मिलेगी।
मंत्री ने क्या कहा
मंत्री ने बताया कि वाइट टॉपिंग वाली सड़कों पर वाहन आसानी से चल सकेंगे। उन्हें बार-बार रुकना नहीं पड़ेगा। इससे ईंधन की बचत होगी और लोगों का सफर भी जल्दी पूरा होगा। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को प्रदेश के विकास के लिए जरूरी बताया।
सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट का काम जल्द शुरू होगा। इससे प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होगी। आम लोगों को रोजाना के सफर में राहत मिलेगी। व्यापार और पर्यटन को भी फायदा होगा। सड़कें चौड़ी होने से हादसों का खतरा घटेगा और ओवरटेकिंग सुरक्षित होगी।
फिलहाल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। आने वाले महीनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इससे प्रदेश का सड़क नेटवर्क और मजबूत होगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
- सवाल 1: मध्य प्रदेश में कौन सी सड़कें फोरलेन की जाएंगी?
जवाब: मध्य प्रदेश में 35 टू-लेन सड़कों को फोरलेन किया जाएगा। इनमें भोपाल-सांची-विदिशा, भोपाल-रायसेन-मंडीदीप, इंदौर-उज्जैन और जबलपुर-दमोह-सागर मार्ग शामिल हैं। इन सभी सड़कों पर रोज 10 हजार पीसीयू से ज्यादा वाहनों का दबाव है, इसलिए इन्हें चौड़ा करने का फैसला लिया गया है। - सवाल 2: सड़कों को फोरलेन करने का पैमाना क्या है?
जवाब: इंडियन रोड कांग्रेस यानी आईआरसी (Indian Road Congress) के मानक के अनुसार यह तय होता है। अगर किसी सड़क पर रोज 10 हजार पीसीयू यानी पैसेंजर कार यूनिट से ज्यादा वाहन गुजरते हैं, तो उसे फोरलेन करना जरूरी माना जाता है। मध्य प्रदेश की 35 सड़कें इसी पैमाने पर खरी उतरी हैं। - सवाल 3: वाइट टॉपिंग तकनीक से सड़कों को क्या फायदा होगा?
जवाब: वाइट टॉपिंग तकनीक में सड़क पर मजबूत कार्पेटिंग की परत चढ़ाई जाती है। इससे सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहती है और बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। गाड़ियां भी बिना रुके तेज चल पाती हैं, जिससे ईंधन और समय दोनों की बचत होती है।
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