कफ सिरप कांड: हाईकोर्ट से दो आरोपियों को जमानत, अभियोजन का विरोध भी नहीं आया काम
Neel Tiwari | Jun 30, 2026, 23:11 IST
Photograph: (THESOOTR)
CHHINDWARA. परासिया कफ सिरप केस में हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को जमानत दी। अभियोजन ने भूमिका गंभीर बताई, फिर भी अदालत ने राहत मंजूर की। ट्रायल और जांच अभी जारी हैं।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- 30 जून 2026 को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने सुनाया आदेश।
- मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सतीश वर्मा और शैलेश सिंह पांड्या को मिली जमानत।
- अभियोजन ने दोनों की भूमिका गंभीर बताते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया।
- मामला कथित रूप से जहरीले कफ सिरप के निर्माण, प्रचार और वितरण से जुड़ा है।
- मामले की जांच और अन्य आरोपियों के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है।
अभियोजन ने दोनों की भूमिका गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया था, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के विश्लेषण के बाद अदालत ने राहत प्रदान कर दी।
हाईकोर्ट से दो आरोपियों को राहत
अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का विश्लेषण करने के बाद दोनों आरोपियों को राहत दी। इसके साथ ही लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद दोनों आरोपियों के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
अभियोजन ने बताया था दोनों की भूमिका गंभीर
अभियोजन ने यह भी आशंका जताई कि आरोपियों को जमानत मिलने से मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और साक्ष्यों तथा गवाहों पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों पर विचार करते हुए उन्हें जमानत देने का आदेश पारित किया।
कब हुई थी गिरफ्तारी और क्या हैं आरोप
दोनों तब से न्यायिक हिरासत में रहकर मुकदमे का सामना कर रहे थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों आरोपी कथित रूप से कोल्ड्रिफ नामक कफ सिरप के प्रचार, सप्लाई और डॉक्टरों के माध्यम से उसके प्रिस्क्रिप्शन बढ़ाने की गतिविधियों में शामिल थे। इस पूरे मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने की थी।
डॉक्टरों और फार्मा नेटवर्क की भूमिका
अभियोजन का दावा था कि सतीश वर्मा श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में कार्यरत था और कंपनी तथा मुख्य आरोपी के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य करता था।
जांच के दौरान उसके घर से एक रजिस्टर भी बरामद होने का दावा किया गया, जिसमें डॉक्टरों को दिए गए उपहार और अन्य लाभों का विवरण दर्ज होने की बात कही गई।
28 वर्षों की सेवा का भी अभियोजन ने किया उल्लेख
अभियोजन ने इस आधार पर जमानत का विरोध किया और कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में कई अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज की जा चुकी हैं। हालांकि इस बार हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के परीक्षण के बाद दोनों आरोपियों को राहत प्रदान कर दी।
मामले की जांच और ट्रायल अभी जारी
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