भोजशाला पर बोले सीएम मोहन यादव- मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से लाने को राज्य सरकार करेगी प्रयास
Sanjay Gupta | May 15, 2026, 19:48 IST
bhojshala cm mohan yadav
Indore: धार भोजशाला पर हाईकोर्ट के आए ऐतिहासिक फैसले पर सीएम डॉ. मोहन यादव की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने लंदन म्यूजियम से मां वाग्देवी की प्रतिमा लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा जरूरी प्रयास करने की बात कही है।
धार भोजशाला पर इंदौर हाईकोर्ट के फैसले का बीजेपी सरकार ने स्वागत किया है। वहीं सीएम डॉ. मोहन यादव ने इसमें अहम बात कही है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर स्वरूप मान्य किया है। साथ ही हिंदू फ्रंट की लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा लाकर परिसर में स्थापित करने की मांग को भी मंजूर किया है।
सीएम ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक और मां वाग्देवी की आराधना स्थली माना। यह निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है। ASI के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा।
सीएम ने आगे अहम बात कही कि हाईकोर्ट द्वारा मां वाग्देवी की प्रतिमा को UK (ब्रिटेन) से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने का निर्देश स्वागत योग्य है। इस दिशा में राज्य सरकार भी आवश्यक प्रयास करेगी।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा है कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक चेतना, सत्य एवं सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण पुष्टि है। भोजशाला के पूजा स्थान की पद्द्ति हिन्दू मंदिर की रही है। न्यायालय के निर्णय से भोजशाला में अब निरंतर पूजा का हिन्दुओं को अधिकार मिल गया है। हम उम्मीद करते हैं कि भोजशाला केवल मां वाग्देवी की पूजा का स्थान न रहे अपितु पुरातन काल की तरह संस्कृत और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का एक वैश्विक केंद्र बने। यह निर्णय संतुलित है, अच्छा है।
मां वाग्देवी की प्रतिमा पर कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है, जिसे उसके मूल स्थान भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।
हिंदू पक्ष और याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस ऐतिहासिक संघर्ष एवं वाद में हिंदू पक्ष की ओर से प्रमुख याचिकाकर्ताओं एवं अधिवक्ताओं ने दीर्घकालीन कानूनी लड़ाई लड़ी।
इस प्रकरण में प्रमुख रूप से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी, हरिशंकर जैन,राजेश जोशी, वर्षा पाराशर,वागीश पाराशर देवेंद्र नगर, उत्कर्ष दुबे, रोहित शुक्ला, मणि मुंजाल यादव, ललित नामदेव शालिनी जोशी, प्रियंका शर्मा, पूजा वर्मा, पार्थ यादव, शिवांगी परमार सौरभ सिंह एवं अन्य अधिवक्तागण एवं याचिकाकर्तागण द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
इन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल भोजशाला प्रकरण में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों के संरक्षण तथा धार्मिक अधिकारों से संबंधित न्यायशास्त्र में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा।
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सीएम मोहन यादव ने यह कहा
लंदन से लाएंगे मां की प्रतिमा: सीएम
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है।
ASI के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 15, 2026
विश्व हिंदू परिषद ने भी दी प्रतिक्रिया
मां वाग्देवी की प्रतिमा पर कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है, जिसे उसके मूल स्थान भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।
हिंदू पक्ष ने किया स्वागत, यह अधिवक्ता थे शामिल
इस प्रकरण में प्रमुख रूप से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी, हरिशंकर जैन,राजेश जोशी, वर्षा पाराशर,वागीश पाराशर देवेंद्र नगर, उत्कर्ष दुबे, रोहित शुक्ला, मणि मुंजाल यादव, ललित नामदेव शालिनी जोशी, प्रियंका शर्मा, पूजा वर्मा, पार्थ यादव, शिवांगी परमार सौरभ सिंह एवं अन्य अधिवक्तागण एवं याचिकाकर्तागण द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
इन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल भोजशाला प्रकरण में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों के संरक्षण तथा धार्मिक अधिकारों से संबंधित न्यायशास्त्र में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा।
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