CM मोहन यादव ने पलटा पीएचक्यू का प्रस्ताव, सीनियर आईपीएस अधिकारियों को सौंपी संभागों की कमान
Ravi Kant Dixit | Apr 09, 2026, 19:59 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. सीएम मोहन यादव ने पीएचक्यू का प्रस्ताव पलट दिया। सीनियर आईपीएस अधिकारियों को संभागों की कमान सौंपी गई। कानून व्यवस्था के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने एक बार फिर पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) का प्रस्ताव पलट दिया है। पीएचक्यू ने जूनियर अफसरों को संभागों की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन जैसे ही खबर मुख्यमंत्री तक पहुंची तो उन्होंने पीएचक्यू के प्रस्ताव को खारिज करते हुए सीनियर अफसरों को जिम्मेदारी दी।
दरअसल, मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर संभागीय स्तर पर निगरानी की पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। अपर मुख्य सचिव (ACS) मॉडल की तर्ज पर पुलिस महकमे में भी नई व्यवस्था लागू करते हुए स्पेशल डीजी स्तर के अधिकारियों को मैदान में उतारा गया है।
इस फैसले के पीछे की कहानी दिलचस्प है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने पहले अपने स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया था। प्रस्ताव में एडीजी स्तर के अधिकारियों के नाम शामिल कर सरकार को भेजा गया। जब यह फाइल सीएम सचिवालय पहुंची तो वहां से निर्देश आया कि जिम्मेदारी और सीनियर अधिकारियों को दी जाए।
इसके बाद पूरी कवायद बदली और अब स्पेशल डीजी स्तर के अधिकारियों को संभागों का प्रभारी बनाया गया है। अब ये सीनियर अफसर सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संभागों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करेंगे। साथ ही रेंज स्तर पर तैनात आईजी के साथ मिलकर पूरे सिस्टम की निगरानी करेंगे।
जैसे ही सीनियर अफसरों की सूची सामने आई, पुलिस मुख्यालय भोपाल में हलचल मच गई। जिन अधिकारियों के नाम इस सूची में आए, वे खुद हैरान रह गए। दफ्तरों में एक ही सवाल गूंजता रहा कि हमारा नाम कैसे आ गया? इस अचानक हुए बदलाव ने सिस्टम के भीतर भी एक अलग तरह की बेचैनी पैदा कर दी है।
शुरुआती प्रस्ताव में पीएचक्यू ने एडीजी स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके तहत अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यानी एडीजी जयदीप प्रसाद को ग्वालियर, एडीजी केपी वेंकटेश्वर राव को शहडोल, एडीजी मोहम्मद शाहिद अबसार को चंबल, एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा को उज्जैन और एडीजी यश कुमार सोलोमन को भोपाल संभाग का प्रभारी बनाया गया था, लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा देर टिक नहीं पाई और वरिष्ठता के आधार पर पूरी सूची बदल दी गई।
हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है। पीएचक्यू के फैसलों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में भी जूनियर अफसरों को संभागों की कमान सौंपी जा रही थी, जबकि सीएम चाहते थे कि सीनियर अधिकारियों को ही जिम्मेदारी दी जाए। इसके बाद डीजी स्तर के अफसरों को संभागों का काम दिया गया है।
नई व्यवस्था में डीजी, स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अफसरों को संभागीय जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत-
इस पूरी कवायद के पीछे सबसे बड़ा कारण समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सरकार की तैयारी है। हाल ही में कैबिनेट बैठक में CM मोहन यादव ने गृह विभाग को यूसीसी लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार को अंदेशा है कि इस मुद्दे पर कुछ वर्गों की ओर से विरोध हो सकता है, जिसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में पहले से ही पूरे प्रदेश में मजबूत निगरानी तंत्र खड़ा किया जा रहा है।
इसी रणनीति के तहत रेंज स्तर के आईजी के ऊपर अब संभागीय स्तर पर सीनियर अफसरों की एक अतिरिक्त परत तैयार की गई है, जो सीधे मॉनिटरिंग और सुपरविजन करेंगे।
8 अप्रैल को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संभाग स्तर पर कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यों की समीक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए यह नई जिम्मेदारी तय की गई है।
इंदौर, ग्वालियर और रीवा संभाग में पहले से प्रभारी नियुक्त थे और वे अपना कार्य जारी रखेंगे। इसके अलावा सात अन्य संभागों में नए अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है।
ये खबरें भी पढ़ें...
इंतजार खत्म! आ गया एमपी पुलिस भर्ती 2025 रिजल्ट, इस डायरेक्ट लिंक से करें चेक
केन-बेतवा लिंक परियोजना: बुंदेलखंड के सैकड़ों गांवों की बुझेगी प्यास, सुधरेगा भूजल स्तर
मध्यप्रदेश पंचायत सचिव भर्ती: 23 हजार पदों पर होंगी नियुक्ति, जानें भर्ती के नए नियम
मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत, फसल बीमा योजना में 25% तक बढ़े क्लेम सेटलमेंट
दरअसल, मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर संभागीय स्तर पर निगरानी की पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। अपर मुख्य सचिव (ACS) मॉडल की तर्ज पर पुलिस महकमे में भी नई व्यवस्था लागू करते हुए स्पेशल डीजी स्तर के अधिकारियों को मैदान में उतारा गया है।
इस फैसले के पीछे की कहानी दिलचस्प है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने पहले अपने स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया था। प्रस्ताव में एडीजी स्तर के अधिकारियों के नाम शामिल कर सरकार को भेजा गया। जब यह फाइल सीएम सचिवालय पहुंची तो वहां से निर्देश आया कि जिम्मेदारी और सीनियर अधिकारियों को दी जाए।
इसके बाद पूरी कवायद बदली और अब स्पेशल डीजी स्तर के अधिकारियों को संभागों का प्रभारी बनाया गया है। अब ये सीनियर अफसर सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संभागों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करेंगे। साथ ही रेंज स्तर पर तैनात आईजी के साथ मिलकर पूरे सिस्टम की निगरानी करेंगे।
पीएचक्यू में मची हलचल
पहले किन अफसरों को दी गई थी जिम्मेदारी
हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है। पीएचक्यू के फैसलों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में भी जूनियर अफसरों को संभागों की कमान सौंपी जा रही थी, जबकि सीएम चाहते थे कि सीनियर अधिकारियों को ही जिम्मेदारी दी जाए। इसके बाद डीजी स्तर के अफसरों को संभागों का काम दिया गया है।
अब किन सीनियर अफसरों को मिला जिम्मा
- वरुण कपूर (डीजी जेल)- भोपाल
- आदर्श कटियार (स्पेशल डीजी प्रशासन)- इंदौर
- उपेंद्र कुमार जैन (डीजी EOW)- उज्जैन
- प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (डीजी होमगार्ड)- ग्वालियर
- पंकज कुमार श्रीवास्तव (स्पेशल डीजी CID व इंटेलिजेंस)- जबलपुर
- अनिल कुमार (स्पेशल डीजी महिला सुरक्षा)- रीवा
- जी अखेतो सेमा (स्पेशल डीजी जेल)- चंबल
- रवि कुमार गुप्ता (स्पेशल डीजी रेल)- नर्मदापुरम
- अनंत कुमार सिंह (स्पेशल डीजी एमपी पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन)- सागर
- राजाबाबू सिंह (एडीजी ट्रेनिंग)- शहडोल
यूसीसी की तैयारी और सख्त निगरानी की रणनीति
सरकार को अंदेशा है कि इस मुद्दे पर कुछ वर्गों की ओर से विरोध हो सकता है, जिसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में पहले से ही पूरे प्रदेश में मजबूत निगरानी तंत्र खड़ा किया जा रहा है।
इसी रणनीति के तहत रेंज स्तर के आईजी के ऊपर अब संभागीय स्तर पर सीनियर अफसरों की एक अतिरिक्त परत तैयार की गई है, जो सीधे मॉनिटरिंग और सुपरविजन करेंगे।
आदेश में क्या कहा गया है
इंदौर, ग्वालियर और रीवा संभाग में पहले से प्रभारी नियुक्त थे और वे अपना कार्य जारी रखेंगे। इसके अलावा सात अन्य संभागों में नए अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है।
ये खबरें भी पढ़ें...
इंतजार खत्म! आ गया एमपी पुलिस भर्ती 2025 रिजल्ट, इस डायरेक्ट लिंक से करें चेक
केन-बेतवा लिंक परियोजना: बुंदेलखंड के सैकड़ों गांवों की बुझेगी प्यास, सुधरेगा भूजल स्तर
मध्यप्रदेश पंचायत सचिव भर्ती: 23 हजार पदों पर होंगी नियुक्ति, जानें भर्ती के नए नियम
मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत, फसल बीमा योजना में 25% तक बढ़े क्लेम सेटलमेंट
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari