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विंध्य में कांग्रेस की गुटबाजी! दीपक बावरिया के बाद प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा से हाथापाई, विवाद पहुंचा भोपाल
Ramanand Tiwari | Jul 02, 2026, 15:37 IST
प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा से हाथापाई
सीधी कांग्रेस भवन में प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा के साथ धक्का-मुक्की हुई। पार्टी ने दो नेताओं को आजीवन निष्कासित कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इससे विंध्य में चल रही असली गुटबाजी की जांच रुक गई...
समझें क्या है पूरा मामला...
- सीधी कांग्रेस भवन में प्रवक्ता व विधानसभा प्रभारी डॉ. विनोद शर्मा के साथ कथित धक्का-मुक्की हुई।
- घटना के बाद कांग्रेस ने दो नेताओं को तत्काल आजीवन निष्कासित कर दिया है।
- पार्टी की कार्रवाई के बावजूद विवाद की असली वजह पर सवाल बरकरार है।
- सूत्रों के अनुसार विंध्य में वर्चस्व की लड़ाई और गुटबाजी इस विवाद की बड़ी वजह मानी जा रही है।
- घटना वाले दिन दोनों नेताओं की विधायक अजय सिंह के साथ तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
- इससे पहले दीपक बावरिया प्रकरण और हाल ही में यूथ कांग्रेस की बैठक में भी विवाद सामने आ चुका है।
वहीं, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल निष्कासन से पूरा मामला खत्म हो गया, या फिर घटना के पीछे की असली वजह की निष्पक्ष जांच भी होनी चाहिए थी?
सीधी से फिर उठे कांग्रेस की गुटबाजी के सवाल
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल कार्रवाई कर देना ही पर्याप्त था या फिर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच भी होनी चाहिए थी, ताकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सके।
क्या निष्कासन से दब गया असली विवाद?
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यदि घटना की निष्पक्ष जांच होती तो यह भी स्पष्ट होता कि आखिर विवाद किस वजह से बढ़ा था। साथ ही, इसके पीछे किसका प्रभाव या समर्थन था।
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विंध्य में वर्चस्व की लड़ाई या संगठनात्मक विवाद?
जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में जातीय और राजनीतिक समीकरणों की प्रतिस्पर्धा भी समय-समय पर संगठन के भीतर तनाव की वजह बनती रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उमंग सिंघार के दौरे के बाद बढ़ी दूरियां?
इसी पृष्ठभूमि में सीधी की घटना को भी कई नेता उसी गुटीय संघर्ष की कड़ी मान रहे हैं।
2018 का दीपक बावरिया प्रकरण भी बना था सुर्खियों में
मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद समर्थकों ने विरोध किया और कथित धक्का-मुक्की की घटना सामने आई। बाद में पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में छह कार्यकर्ताओं को निष्कासित कर दिया था।
भोपाल में भी नहीं थमा विवाद
प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया और अन्य वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत कराया गया। बाद में दोनों पक्षों ने विवाद समाप्त होने की बात कही, लेकिन घटना का वीडियो सामने आने के बाद संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठे।
संगठन मजबूत होगा या गुटबाजी भारी पड़ेगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक विवाद में बदलते रहे तो आगामी चुनावों में इसका असर संगठन की एकजुटता और चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।
बड़ा सवाल
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