अयोध्या पदयात्रा से पहले दिग्विजय सिंह बोले- मैं 50 का महसूस करता हूं तो किसी को आपत्ति क्यों?
Sandeep Kumar | Oct 04, 2026, 16:43 IST
दिग्विजय सिंह ने RSS-VHP पर निशाना साधा हैं। उन्होंने कहा है कि हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म की मूल भावना बिगाड़ी है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को दशहरे के दिन महाकाल मंदिर से अयोध्या के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे। इसके पहले उन्होंने अंग्रेजी कहावत का हवाला देकर अपनी बात समझाई हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद को 50 साल का मानते हैं। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा, दान और निर्माण खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं।
शिवधाम से रामधाम की पदयात्रा
80 साल की उम्र, 1000 किलोमीटर का सवाल
– दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री
यह जवाब उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में पदयात्रा के सवाल पर दिया। सोचिए एक बार। 80 की उम्र में 1000 किलोमीटर पैदल चलना आसान है क्या?
सनातन और हिंदुत्व पर क्या बोले
उनका आरोप है कि आरएसएस (RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh) और वीएचपी (VHP – Vishwa Hindu Parishad) इस भावना को बिगाड़ रहे हैं।
राम मंदिर चढ़ावा और चंदे पर आरोप
उनके मुताबिक पहले चंदे में घपला हुआ, फिर निर्माण में गड़बड़ी। बाद में रामलला की चढ़ोत्री में कथित हेराफेरी हुई। उन्होंने कहा कि इसमें विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोग शामिल हैं।
चंपत राय रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव हैं। दिग्विजय के मुताबिक वे आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपराओं से उनका कोई लेना-देना नहीं। उनका आरोप है कि चढ़ावा आरएसएस के चुनावी चंदे में लग रहा है। दिग्विजय ने कहा कि वे इसके खिलाफ लड़ेंगे।
200 से 300 करोड़ की कथित चोरी
उनका आरोप है कि चोरी कैमरों में कैद हुई। आठ महीने का सीसीटीवी (CCTV – Closed Circuit Television) फुटेज डिलीट किया गया। कुल कथित चोरी 200 से 300 करोड़ रुपए हो सकती है (यह आंकड़ा अभी confirm नहीं हुआ है)। ठेकों में कमीशनखोरी और मंदिर के पास जमीन खरीद के आरोप भी लगाए।
3264 करोड़ दान और लागत का हिसाब
यह रकम 1000 रुपए देने वाले करीब 3.26 करोड़ लोगों के बराबर है। आखिर इस दान का हिसाब किसके पास है?
हिसाब देने की बात अधर्म कैसे हुई?
– दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री
यह सवाल उन्होंने दान और लागत के आंकड़ों पर उठाया।
1989 की रामशिला और चांदी की ईंटें
दिग्विजय आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की विचारधारा का समर्थन नहीं करते। लेकिन मंदिर निर्माण के पक्ष में हमेशा रहे। उन्होंने 1989 में श्रद्धानुसार योगदान दिया और बाद में दान भी दिया।
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