रजिस्ट्रेशन सस्पेंड फिर भी अफसरों ने खुला छोड़ा नर्सिंग होम-अल्ट्रासाउंड सेंटर

Sanjay Sharma | Jan 22, 2025, 22:20 IST
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Gwalior administration did not seal NGO nursing home
Gwalior administration did not seal NGO nursing home

ग्वालियर में अनाधिकृत लिंग परीक्षण की शिकायतों से घिरे एनजीओ में भारी गड़बड़ियां मिलने के बावजूद प्रशासन नरमी बरत रहा है। नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड किया गया लेकिन नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील नहीं किया गया है।

BHOPAL. अनाधिकृत लिंग परीक्षण की शिकायतों से घिरे एनजीओ में भारी गड़बड़ियां मिलने के बावजूद ग्वालियर जिला प्रशासन नरमी बरत रहा है। कलेक्टर के आदेश पर की गई जांच के बाद सीएमएचओ ने एनजीओ के नर्सिंग होम का पंजीयन निरस्त करने की फौरी कार्रवाई की है। हांलाकि अब तक न तो नर्सिंग होम और उसमें संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील नहीं किया गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी फैमिली प्लानिंग एनजीओ के इस सेंटर पर लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या का अंदेशा जता चुका है। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर हो रहे दिखावे की शिकायत मुख्य सचिव अनुराग जैन से की गई है।

कलेक्टर के आदेश पर हुई थी जांच

ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र में पंडित विहार कॉलोनी में एफपीएआई का नर्सिंग होम का संचालित है। इसी के अंदर अल्ट्रासाउंड मशीन सेंटर भी चल रहा है। सेंटर में अनाधिकृत लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या की आशंका की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इसके चलते साल 2024 में कलेक्टर के आदेश पर सीएमएचओ और तहसीलदार की टीमों द्वारा जांच की गई थी। इस दौरान नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटर में कई अनियमितताएं मिली थीं। मरीजों के साथ ही यहां गर्भ जांच के लिए आने वाली महिलाओं का रिकॉर्ड भी अस्त-व्यस्त पाया गया था। कई महिलाओं की जांच संबंधी जानकारी भी गायब थी। वहीं जांच दल को नर्सिंग होम में डॉक्टर भी नहीं मिले थे और गर्भ जांच करने वाली नर्स भी वहां से गायब हो गई थीं।

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आयोग के आदेश की भी अनदेखी

ग्वालियर शहर में एनजीओ के नर्सिंग होम में अल्ट्रासाउंड सेंटर द्वारा गैरकानूनी तरीके से गर्भ जांच की आड़ में लिंग परीक्षण की शिकायतें प्रदेश के हेल्थ कमिश्नर के साथ ही राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग तक भी पहुंची थीं। इस पर 8 जुलाई 2024 को आयोग की रजिस्ट्रार गोमती मनोचा ने प्रदेश के हेल्थ कमिश्नर को पत्र लिखा था। इसके जरिए एफपीएआई के ग्वालियर और अन्य जिलों में संचालित नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों में लिंग परीक्षण से अवगत कराया गया था। साथ ही भ्रूण हत्या की आशंका को देखते हुए इसकी रोकथाम के भी आदेश दिए थे। बाल अधिकार संरक्षण आयोग, हेल्थ कमिश्नर और विभाग के निर्देशों की अनदेखी को देखते हुए अब प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी मुख्य सचिव अनुराग जैन से भी शिकायत की गई है। जिसमें विदेशी फंडिंग से संचालित एनजीओ के सेंटर पर लिंग परीक्षण से लिंगानुपात पर विपरीत असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

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रजिस्ट्रेशन निलंबित पर खुला छोड़ा सेंटर

प्रशासन एवं स्वास्थ्य अमले की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। जांच के बाद 14 नवंबर 2024 को नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया गया। सीएमएचओ सचिन श्रीवास्तव ने पीसीपीएनडी और एमटीपी एक्ट यानी गर्भ जांच में लिंग परीक्षण संबंधी सख्त कानून का उल्लंघन मान रहे हैं। जिसका उल्लेख भी प्रतिवेदन में किया है। इसके बाद भी न तो नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील किया गया न गर्भ जांच करने वाली मशीन जब्त की गई। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि रजिस्ट्रेशन निलंबित करने के बाद नर्सिंग होम और जांच खुला छोड़ने के पीछे क्या वजह रही। स्वास्थ्य अधिकारियों की अनदेखी की वजह अब भी सेंटर पर लिंग परीक्षण जैसी गतिविधि चल रही हैं।

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लिंगानुपात में ग्वालियर की स्थिति खराब

साल 2021 में ग्वालियर जिला लिंगानुपात के मामले में प्रदेश में नीचे से दूसरे स्थान पर था। यानी इस जिले में अब भी लोगों पर बेटा और बेटी को लेकर पुरानी मानसिकता हावी है। साल 2020 तक ग्वालियर में लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 917 महिला था। जबकि 2001 में मार्च से सितम्बर के बीच सामने आए हैल्थ सर्वे ने जिले की स्थिति को चिंताजनक बताया था। इस दौरान प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या घटकर 877 पहुंच गई थी। यानी ग्वालियर जिले में लिंगानुपात अभी भी बाकी के जिलों से अच्छा नहीं है। बावजूद इस स्थिति को स्वास्थ्य अधिकारी ही अनदेखा कर लिंग परीक्षण की आशंका वाले संस्थानों पर सख्ती नहीं दिखा रहे।

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