ग्वालियर में अंबेडकर विवाद के बीच भीम आर्मी ने स्थगित किया आंदोलन, 15 अक्टूबर को स्कूलों की छुट्टी
Sourabh Bhatnagar | Oct 14, 2025, 14:34 IST
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मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है। हालात ये हैं कि अगर मामला सुलझा नहीं, तो बीजेपी को बिहार में नुकसान हो सकता है। यह मामला एक बयान से जुड़ा है। आइए जानते हैं...
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 15 अक्टूबर को होने वाला आंदोलन अब टल गया है। पहले आंदोलन के आयोजकों ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी थी। अब उन्होंने पुलिस को आवेदन देकर इसे वापस ले लिया है। इस बीच, जिले में संभावित तनाव को देखते हुए कलेक्टर ने 15 अक्टूबर को कक्षा 12वीं तक की छुट्टी घोषित कर दी है।
ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने इसका आधिकारिक आदेश जारी किया है। छुट्टी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय कार्यक्रम और संभावित यातायात बाधाओं के कारण बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी के मुताबिक,यह आदेश जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त तथा सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में लागू होगा। हालांकि, इस दौरान सभी शिक्षक अपने स्कूलों में उपस्थित रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और सभी संबंधित विद्यालयों को इसका पालन करना अनिवार्य है।
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असल में, बाबा साहब अंबेडकर को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के बाद अंबेडकर समर्थकों ने इस आंदोलन का ऐलान किया था। अंबेडकरवादियों ने इस मामले पर क्या कहा और ये पूरा मामला क्या है, चलिए जानते हैं...
भीम आर्मी (आजाद समाज पार्टी) के नेता सुनील अस्तेय ने आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित करने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि कानून, प्रशासन और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
उन्होंने आगे कहा कि यह स्थगन किसी समझौते का संकेत नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक विराम है। हमारी सभी मांगें और मुद्दे जस के तस हैं। जब भी वक्त और हालात सही होंगे, हम और भी ताकत से मैदान में उतरेंगे।
उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से अपील है कि वे शांति, अनुशासन और संयम बनाए रखें। हमारी लड़ाई संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में जारी रहेगी।
अनिल मिश्रा डरने के बजाय अपने बयान पर कायम रहे। उन्होंने खुद ही थाने जाकर गिरफ्तारी दी। थाने में भी उन्होंने वही कहा कि संविधान अंबेडकर ने नहीं लिखा।
इस मामले में कांग्रेस ने अंबेडकरवादियों का समर्थन किया है। वहीं बीजेपी के लिए यह विवाद परेशानी बन गया है। बीजेपी वह पार्टी है, जो एक बार "माई का लाल" जैसे बयान की वजह से मुश्किलों में पड़ चुकी है।
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मिश्रा के इस बयान से उठी चिंगारी सोशल मीडिया के जंगल में आग की तरह फैल गई थी और आंदोलन तक पहुंच चुकी थी। इसने ग्वालियर चंबल में ब्राह्मण वर्सेज दलित की राजनीति को गरमा दिया है। बयान तो जमीनी स्तर पर हो रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर लॉबिंग तेज हो गई है।
इसी वजह से मामला तेजी से फैल रहा है। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हालात को काबू करने का दबाव बढ़ रहा है। दिल्ली से भी लगातार सवाल आ रहे हैं। डर इस बात का है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संविधान बचाने का मिशन ग्वालियर चंबल में भारी न पड़ जाए।
हालात इस कदर चिंताजनक हैं कि बीजेपी को बिहार चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी चिंता के चलते बीजेपी आलाकमान मध्यप्रदेश के हालात को लेकर चिंतित है। खबरें हैं कि खुद केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह सीएम मोहन यादव से रोज रिपोर्ट ले रहे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो मोहन यादव समेत पूरी सरकार के सिर में दर्द हो सकता है।
यह पूरा मामला ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित (अंबेडकर प्रतिमा विवाद) करने को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा हुआ है। ग्वालियर अंबेडकर प्रतिमा केइस मुद्दे पर जूनियर और सीनियर अधिवक्ताओं के बीच पहले भी तनाव और झड़पें हो चुकी हैं। इसी विवाद (अंबेडकर मूर्ति विवाद) के बीच, पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने अपनी विवादित टिप्पणी सोशल मीडिया पर की थी। इसने स्थिति को और तूल दे दिया।
ग्वालियर के एसपी धर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि आंदोलन के आयोजकों ने आंदोलन वापस ले लिया है। उन्होंने पुलिस को एक कॉल ऑफ ज्ञापन दिया है। बता दें कि कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिले में अगले आदेश तक प्रदर्शन, रैली और धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाई है।
ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने इसका आधिकारिक आदेश जारी किया है। छुट्टी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय कार्यक्रम और संभावित यातायात बाधाओं के कारण बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी के मुताबिक,यह आदेश जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त तथा सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में लागू होगा। हालांकि, इस दौरान सभी शिक्षक अपने स्कूलों में उपस्थित रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और सभी संबंधित विद्यालयों को इसका पालन करना अनिवार्य है।
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असल में, बाबा साहब अंबेडकर को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के बाद अंबेडकर समर्थकों ने इस आंदोलन का ऐलान किया था। अंबेडकरवादियों ने इस मामले पर क्या कहा और ये पूरा मामला क्या है, चलिए जानते हैं...
ग्वालियर- प्रशासन और ज्ञापन...
प्रशासन से लगातार चर्चा के बाद ग्वालियर का सौहार्द भाई चारा ना बिगड़े और प्रशासन के बार बार आग्रह निवेदन करने पर निम्न बिंदुओं को पूरा करने का भरोसा दिलाने के बाद और बाबा साहब पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मिश्रा दुबारा मीडिया में अभद्र टिप्पणी ना… pic.twitter.com/zlPRuhpUSs
— Sunil Astay (@SunilAstay) October 14, 2025
स्थगन किसी समझौते का संकेत नहीं
उन्होंने आगे कहा कि यह स्थगन किसी समझौते का संकेत नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक विराम है। हमारी सभी मांगें और मुद्दे जस के तस हैं। जब भी वक्त और हालात सही होंगे, हम और भी ताकत से मैदान में उतरेंगे।
उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से अपील है कि वे शांति, अनुशासन और संयम बनाए रखें। हमारी लड़ाई संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में जारी रहेगी।
जय भीम साथियों,
15 अक्टूबर को बुलाए गए आंदोलन को लेकर महत्वपूर्ण सूचना..
कानून, प्रशासन और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, तथा संगठन के साथियों से गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है कि हमारा आंदोलन फ़िलहाल अस्थाई रूप से स्थगित किया जा रहा है।
यह निर्णय संगठन की… pic.twitter.com/jyCkNEvKjZ
— Sunil Astay (@SunilAstay) October 13, 2025
इसलिए हो रहा था आंदोलन
हाल ही में, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और एडवोकेट अनिल मिश्रा के बयान ने सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया था। उन्होंने भीमराव अंबेडकर को अंग्रेजों का एजेंट बताया था और बी एन राव को असली संविधान निर्माता करार दिया। इस बयान के बाद अंबेडकर समर्थकों ने पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ भड़काऊ बयान देने का मामला दर्ज किया।
मामले ने ऐसे पकड़ा तूल
अनिल मिश्रा डरने के बजाय अपने बयान पर कायम रहे। उन्होंने खुद ही थाने जाकर गिरफ्तारी दी। थाने में भी उन्होंने वही कहा कि संविधान अंबेडकर ने नहीं लिखा।
इस मामले में कांग्रेस ने अंबेडकरवादियों का समर्थन किया है। वहीं बीजेपी के लिए यह विवाद परेशानी बन गया है। बीजेपी वह पार्टी है, जो एक बार "माई का लाल" जैसे बयान की वजह से मुश्किलों में पड़ चुकी है।
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ग्वालियर में अंबेडकर पोस्ट विवाद के बाद हाई अलर्ट, 50 को नोटिस जारी
बयान ने गरमाई ब्राह्मण वर्सेज दलित की राजनीति
इसी वजह से मामला तेजी से फैल रहा है। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हालात को काबू करने का दबाव बढ़ रहा है। दिल्ली से भी लगातार सवाल आ रहे हैं। डर इस बात का है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संविधान बचाने का मिशन ग्वालियर चंबल में भारी न पड़ जाए।
हालात इस कदर चिंताजनक हैं कि बीजेपी को बिहार चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी चिंता के चलते बीजेपी आलाकमान मध्यप्रदेश के हालात को लेकर चिंतित है। खबरें हैं कि खुद केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह सीएम मोहन यादव से रोज रिपोर्ट ले रहे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो मोहन यादव समेत पूरी सरकार के सिर में दर्द हो सकता है।
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