बेटे की मौत के बाद दंपती को हाईकोर्ट से नई उम्मीद, 52 वर्षीय महिला को IVF की मंजूरी

Neel Tiwari | Jul 17, 2026, 22:48 IST
Share
52 वर्षीय महिला को IVF की मंजूरी
52 वर्षीय महिला को IVF की मंजूरी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 52 वर्षीय महिला को IVF कराने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि यदि मेडिकल बोर्ड महिला को फिट मानता है तो केवल उम्र के आधार पर इलाज से इनकार नहीं किया जा सकता।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • बेटे की मौत के बाद दंपती ने IVF का सहारा लिया।
  • महिला की उम्र के कारण अस्पताल ने प्रक्रिया रोकी।
  • मेडिकल रिपोर्ट में महिला को फिट बताया गया।
  • दंपती ने हाईकोर्ट में उम्र सीमा को चुनौती दी।
  • कोर्ट ने मेडिकल फिटनेस को अहम आधार माना।

52 साल की महिला को बड़ी राहत

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संतान की चाह रखने वाले एक दंपती को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 52 साल की महिला को IVF कराने की अनुमति दे दी। अदालत ने साफ कहा कि यदि मेडिकल जांच महिला को फिट बताती है तो केवल उम्र के आधार पर इलाज नहीं रोका जा सकता। यह आदेश जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने दिया।

कोर्ट पहुंचे थे दंपती

याचिका में बताया गया कि दंपती का एक ही बेटा था। वर्ष 2025 में 21 साल की उम्र में बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई। इसके बाद दोनों पूरी तरह अकेले रह गए। बढ़ती उम्र के कारण प्राकृतिक तरीके से संतान होना संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने IVF तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया।

अस्पताल ने उम्र का हवाला देकर रोक दी प्रक्रिया

दंपती ने सरकारी अस्पताल में IVF कराने के लिए संपर्क किया। अस्पताल ने महिला की मेडिकल जांच भी कराई। जांच में उन्हें इलाज के लिए उपयुक्त माना गया। इसके बाद भी अस्पताल ने प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। कारण यह बताया गया कि महिला की उम्र 50 साल से अधिक है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम में यही अधिकतम सीमा तय है।

हाईकोर्ट में कई फैसलों का हवाला

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय और अधिवक्ता पार्थ पांडेय ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि केरल, पंजाब एवं हरियाणा, कलकत्ता हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहले भी ऐसे मामलों में राहत दे चुके हैं। उन फैसलों में मेडिकल फिटनेस को उम्र से अधिक महत्व दिया गया था।

मेडिकल बोर्ड ने कराई कई चरणों में जांच

हाईकोर्ट ने पहले दंपती को भोपाल के मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने का निर्देश दिया। कई विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उनकी जांच की। महिला की अलग से स्त्री रोग विशेषज्ञ ने भी जांच की। कुछ अतिरिक्त जांच के दौरान उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा मिला। इसके बाद इलाज और दोबारा जांच की सलाह दी गई।

डॉक्टरों ने IVF या सरोगेसी के लिए उपयुक्त बताया

बाद में अस्पताल की विशेषज्ञ रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि महिला को डोनर ओसाइट्स के साथ IVF या सरोगेसी के लिए योजना बनाई जा सकती है। यानी विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह अनुपयुक्त नहीं माना। यही रिपोर्ट अदालत के फैसले का अहम आधार बनी।

कोर्ट ने कहा, उम्र नहीं बनेगी इलाज में रुकावट

हाईकोर्ट ने कहा कि कानून में तय आयु सीमा का उद्देश्य सुरक्षा है। लेकिन हर मामले के अपने अलग तथ्य होते हैं। यदि डॉक्टर मरीज को फिट मानते हैं तो केवल उम्र के कारण इलाज से इनकार करना उचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है।

दंपती अपने जोखिम पर कराएगा IVF

सुनवाई के दौरान दंपती ने अदालत को भरोसा दिया कि वह पूरी प्रक्रिया अपने जोखिम पर कराएगा। यदि इलाज सफल नहीं होता है तो अस्पताल या डॉक्टरों के खिलाफ कोई दावा नहीं करेगा। अदालत ने इस सहमति को भी रिकॉर्ड पर लिया।

किसी भी योग्य संस्थान में करा सकेंगे इलाज

जबलपुर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि दंपती (Couple ) अपनी पसंद के किसी भी योग्य संस्थान में IVF करा सकता है। संबंधित संस्थान पहले मेडिकल जांच करेगा। इसके बाद डॉक्टर अपने स्वतंत्र मेडिकल निर्णय के आधार पर प्रक्रिया करेंगे। केवल महिला की उम्र 52 वर्ष होने के कारण आवेदन खारिज नहीं किया जाएगा।

पहचान सार्वजनिक नहीं करने के भी निर्देश

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधान लागू रहेंगे। इसलिए दंपती की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। कोर्ट ने निजता के अधिकार को भी सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।

यह फैसला क्यों माना जा रहा है अहम

यह फैसला उन दंपतीयों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो बढ़ती उम्र के कारण IVF से वंचित हो रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर मामले में मेडिकल स्थिति सबसे अहम होगी। केवल आयु को अंतिम आधार नहीं बनाया जा सकता। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में नई कानूनी बहस को भी दिशा मिल सकती है।

ये भी पढ़ें...

IVF सेंटर में जन्में जुड़वा बच्चे की अदला-बदली के गंभीर आरोप, SC की निगरानी में FIR कर होगी जांच

सरकार बेचेगी IVF से तैयार बछिया, 10 लीटर तक देगी दूध, कीमत भी जान लें

IVF से बेटा हुआ , टेस्ट ट्यूब सेंटर ने बदल दिया बच्चा , DNA टेस्ट से पता चली धोखाधड़ी

MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें, कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसाफ अंसारी की गई कुर्सी

Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • Couple
  • IVF
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा