सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट का करारा झटका, फर्जी परमिट कांड में 8 लाइसेंस निलंबन बरकरार

Neel Tiwari | Mar 24, 2026, 11:57 IST
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high court upholds som distilleries license suspension fake permit case
high court upholds som distilleries license suspension fake permit case

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कंपनी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि फर्जी परमिट और राजस्व चोरी जैसे मामलों में कोई रियायत नहीं दी जा सकती।

News In Short

  • हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज की रिट याचिका खारिज कर दी है।
  • आठ लाइसेंसों का निलंबन पूरी तरह बरकरार रहेगा।
  • यह मामला 2011 के फर्जी परमिट और शराब तस्करी केस से जुड़ा है।
  • कोर्ट ने कहा- Fraud vitiates all यानी धोखाधड़ी सब कुछ खत्म कर देती है।
  • आबकारी कमिश्नर अभिजीत अग्रवाल की भूमिका पर भी कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है।

News In Detail

अपना लाइसेंस बढ़ाने और नए टेंडर की दौड़ में सुप्रीम कोर्ट तक भागी सोम को आखिरकार फायदा नहीं मिला। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उसके लाइसेंस निलंबन को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है। सोम डिस्टिलरीज का यह मामला कोई नया नहीं, बल्कि करीब 15 साल पुराना है। इसमें सोम के कर्मचारियों को साल 2023 में आखिरकार सजा सुनाई गई।

14 दिसंबर 2011 को महू-नीमच रोड पर घाटाबिल्लोद के पास एक ट्रक पकड़ा गया था। इसमें 1200 पेटी ब्लूचिप व्हिस्की बिना वैध परमिट के ले जाई जा रही थी। जांच में खुलासा हुआ कि यह कोई साधारण लापरवाही नहीं बल्कि फर्जी परमिट बुक के जरिए रची गई सुनियोजित साजिश थी। इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर पड़ा है।



निचली अदालत ने पहले ही ठहरा दिया था दोषी

इस पूरे घोटाले में कंपनी के अधिकारियों की भूमिका पहले ही अदालत में साबित हो चुकी थी। दिसंबर 2023 में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने कंपनी के सुपरवाइजर्स, निदेशकों और प्रबंध निदेशक तक को आईपीसी की गंभीर धाराओं 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत दोषी करार दिया था। इतना ही नहीं, ट्रक चालक और क्लीनर को भी आबकारी कानून के तहत सजा मिली थी।

हाईकोर्ट में बचाव के सारे तर्क ध्वस्त

सोम डिस्टिलरीज ने हाईकोर्ट में यह दलील दी कि नोटिस एक साल के लाइसेंस का था और कार्रवाई दूसरे साल पर की गई। साथ ही सुनवाई का उचित मौका भी नहीं दिया गया। कंपनी ने यह भी तर्क रखा कि वह सरकार को सैकड़ों करोड़ का राजस्व देती है। साथ ही, हजारों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी है। वहीं, कोर्ट ने इन सभी दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि कानून के सामने न तो पैसा मायने रखता है और न ही प्रभाव।

धोखाधड़ी सब कुछ दूषित कर देती है- कोर्ट

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि फर्जी परमिट के जरिए शराब का परिवहन करना सीधा-सीधा धोखाधड़ी है। अदालत ने दो टूक कहा Fraud vitiates all solemn acts, यानी धोखाधड़ी हर कानूनी वैधता को खत्म कर देती है।

कोर्ट ने यह भी माना कि लाइसेंस हर साल नया नहीं होता, बल्कि उसका नवीनीकरण होता है, इसलिए पुराने अपराधों के आधार पर भी वर्तमान लाइसेंस पर कार्रवाई पूरी तरह वैध है।

आबकारी आयुक्त भी कटघरे में

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कोर्ट ने तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल की भूमिका पर भी सवाल उठा दिए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि कारण बताओ नोटिस और अंतिम आदेश में मुख्य आरोपी प्रबंध निदेशक का नाम प्रमुखता से नहीं लिया गया, जो गलत नियत को दर्शाता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी दो साल तक इस मामले में निष्क्रिय रहे और केवल तब कार्रवाई की जब मामला उच्च स्तर तक पहुंच गया।

लाइसेंस निलंबन बरकरार, सोम को बड़ा झटका

अंततः हाईकोर्ट ने अनुपात के सिद्धांत को लागू करते हुए राज्य सरकार की कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया और सोम डिस्टिलरीज की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद कंपनी के आठ लाइसेंसों का निलंबन प्रभावी रहेगा, अब ना तो सोम शराब बना सकता है और ना ही किसी तरह से कोई पैकेजिंग कर सकता है। यह न सिर्फ कानूनी बल्कि व्यावसायिक स्तर पर भी सोम डिस्टिलरीज के लिए बड़ा झटका है।

हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि फर्जीवाड़ा और राजस्व से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों को अब कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं होगा।

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