सहायक प्राध्यापक के दिव्यांग सर्टिफिकेट के सत्यापन में 6 साल से उलझा उच्च शिक्षा विभाग

Sanjay Sharma | Oct 29, 2025, 22:55 IST
Share
higher education
higher education

उच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही का ढर्रा सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा है। अधिकारियों की लापरवाही कॉलेजों से मुख्यालय स्तर तक छाई है। 2019 में सहायक प्राध्यापक भर्ती में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नियुक्ति का मामला एक बार फिर चर्चा में है।

BHOPAL. मध्य प्रदेशउच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही का ढर्रा सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा है। अधिकारियों की यह लापरवाही कॉलेजों से लेकर मुख्यालय स्तर तक छाई हुई है।

साल 2019 में सहायक प्राध्यापक भर्ती में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नियुक्ति हासिल करने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव के एक पत्र की वजह से उछला है। इस पत्र ने ही विभाग में फैली भर्राशाही और सुस्ती को उजागर कर दिया है।

उच्च शिक्षा विभाग ने एमपीपीएससी की सहायक प्राध्यापक परीक्षा के परिणाम के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को साल 2019 में नियुक्ति दी थी। नियुक्ति के दो साल बाद ही दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरतने की शिकायत विभाग तक पहुंचती थी। इसमें 19 अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों पर संदेह जताया गया था।

यह शिकायत दो साल तक विभाग में घूमती रही। 19 अक्टूबर 2023 को संदेह के आधार पर सभी 19 सहायक प्राध्यापकों की शारीरिक अशक्तता का परीक्षण संभागीय मेडिकल बोर्ड द्वारा कराया गया था। संभागीय बोर्ड ने कुछ अभ्यर्थियों को पूर्व में जिला मेडिकल बोर्ड से जारी अशक्तता सर्टिफिकेट प्रमाणित नहीं किए।

ये खबर भी पढ़िए :

पदवृद्धि की मांग पर अड़े वेटिंग शिक्षक, विरोध जताने कराया मुंडन

पत्राचार से ही करते रहे टालमटोल

संभागीय मेडिकल बोर्ड के प्रतिवेदन के बाद पहुंची शिकायत पर भिंड कलेक्टर के आदेश पर जुलाई 2024 को शासकीय एमजेएस पीजी कॉलेज के सहायक प्राध्यापक की जांच कराई गई। इस रिपोर्ट में अशक्तता का प्रतिशत 40 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

संभागीय और जिला मेडिकल बोर्ड की विरोधाभासी रिपोर्ट साल 2023 और 2024 में उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंच चुकी थीं। विभाग की ओर से 7 नवम्बर 2024 को इन विरोधाभासी रिपोर्ट के आधार पर सहायक प्राध्यापक मोहित दुबे को नोटिस भी जारी किया गया जिसके उत्तर में दुबे ने 16 नवम्बर 2024 को जवाब भी विभाग को भेज दिया था।

ये खबर भी पढ़िए :

हाईकोर्ट में हिस्ट्रीशीटर अब्दुल रज्जाक ने लगाया नेताओं पर आरोप, HC ने उन्हें पक्षकार बनाने पूछा सवाल

विरोधाभासी रिपोर्ट दबाए रहे अफसर

60e0af5e-49a
60e0af5e-49a


अब विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और सुस्ती की बात करते हैं। दरअसल 7 नवम्बर 2024 को जो नोटिस सहायक प्राध्यापक मोहित दुबे को भेजा गया था उसमें दोनों बोर्ड की विरोधाभासी रिपोर्ट का उल्लेख था। इसी को लेकर जवाब मांगा गया था।

मोहित दुबे का जवाब भी 9 दिन बाद ही विभाग तक पहुंच गया। इस पत्राचार के बाद विभाग ने पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जुलाई 2024 को फाइल में बंद हो चुकी कार्रवाई की सुध साल भर बाद अचानक विभाग को आ गई है। विभाग के अवर सचिव की ओर से 27 अक्टूबर 2025 को फिर एक नोटिस मोहित दुबे को भेजा है।

ये खबर भी पढ़िए :

भगोड़े माल्या की कंपनी पर मप्र के अफसर मेहरबान, 16 साल पुरानी निरस्त लीज बहाल,फिर दो बार बिकी करोड़ों की जमीन

संदेही के जवाब पर सालभर साधी चुप्पी

510eb8db-c8d
510eb8db-c8d

उच्च शिक्षा विभाग ने अब एक बार फिर सहायक प्राध्यापक मोहित दुबे का मेडिकल बोर्ड से परीक्षण कराने की तैयारी कर ली है। नए सिरे से जो नोटिस भेजा गया है उसमें दुबे को राज्य मेडिकल बोर्ड भोपाल के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस भेजकर जो निर्देश साल भर बाद विभाग ने जारी किए है दुबे द्वारा नवम्बर 2024 में भेजे गए जवाब में ही इसका उल्लेख किया था।

दुबे ने अपने जवाब में ही लिखा था कि संभागीय बोर्ड को उनके अशक्तता प्रमाण पत्र को निरस्त करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राज्य मेडिकल बोर्ड को है। विभाग ने उनका जवाब मिलने के तुरंत बाद ही राज्य बोर्ड से जांच क्यों नहीं कराई। अधिकारियों को अब साल भर बाद इसकी सुध क्यों आई है।

ये खबर भी पढ़िए :

मौसम पूर्वानुमान (30 अक्टूबर): एमपी में हल्की बारिश, दक्षिण भारत में तूफानी बारिश की चेतावनी

द सूत्र ने जताया था अशक्तता पर संदेह

9977c36a-cf3
9977c36a-cf3

सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट के जरिए धांधली के मामले को द सूत्र ने जुलाई 2024 में प्रमुखता से खबरें प्रकाशित की थीं। इस मामले में उच्च शिक्षा विभाग, मेडिकल बोर्ड और कॉलेज स्तर पर अशक्तता प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े और उसकी जांच के नाम पर की गई हेराफेरी को उजागर किया था।

Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • उच्च शिक्षा विभाग
  • कॉलेज
  • सचिव
  • मेडिकल बोर्ड
  • सहायक प्राध्यापक
  • राज्य मेडिकल बोर्ड
  • फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई