मोहन भागवत बोले- इन दिनों देश में चार तरह के हिंदू

Anand Pandey | Jan 02, 2026, 21:31 IST
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Photograph: (THESOOTR)

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने भाषण में देश में चार तरह के हिंदुओं की चर्चा की। उन्होंने संघ की भूमिका और समाज में भेदभाव समाप्त करने के लिए सामाजिक समरसता पर जोर दिया।

BHOPAL. संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रदेश के चुनिंदा प्रबुद्ध नागरिकों से मिलने वाले थे। कार्यक्रम शुरू होने के आधे घंटे पहले ही हॉल ठसा-ठस भर चुका था। अब इसे संघ का अनुशासन कहें या भागवत जी के व्यक्तित्व का प्रभाव... पूरी तरह भर चुके हॉल में भी सुई पटक सन्नाटा यानी पिन ड्रॉप साईलेंस था।

डेढ़ घंटे के भाषण में नहीं बजी ताली

सबसे पहले मंच पर लगे स्क्रीन पर राम मंदिर को लेकर एक छोटी सी फिल्म चलाई गई। भागवत के आने के ठीक पहले मंच संचालक ने मोबाईल ऑफ करने और भाषण में किसी भी बात के पसंद आने पर भी ताली न बजाने की गुजारिश की।

जिन लोगों के लिए संघ नया था... उन्हें ताली न बजाने की बात थोड़ी अटपटी लगी, लेकिन गुजारिश का असर हुआ और डेढ़ घंटे के भाषण में एक बार भी ताली नहीं बजी। हां, बीच-बीच में एक दो मोबाईल जरूर बजते रहे।

मंच पर भागवत के आने के बाद भी तमाम औपचारिकताओं से किनारा किया गया। भागवत, संघ पदाधिकारी अशोक पांडे और सोमकांत उमावकर ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण किया और सीधे शुरू हो गया भागवत जी का भाषण।

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संघ क्या करता है... जानना थोड़ा कठिन

संघ के सौ साल पूरे हो चुके हैं। ये विषय आनंद का तो है, लेकिन उत्सव का नहीं। यहां से अपनी बात शुरू करते हुए भागवत ने तमाम महत्वपूर्ण बातों को रेखांकित किया। संघ के बारे में जो नैरेटिव गढ़े जाते हैं या जो बातें कही जाती हैं उनका सच सामने आना चाहिए।

संघ क्या करता है... ये जानना थोड़ा कठिन विषय है। बीजेपी या वीएचपी को देखकर भी संघ को नहीं समझा जा सकता। संघ एक अनोखा संगठन है। इसका दुनिया में कोई सानी ही नहीं है। संघ को लेकर बहुत सारी गलतफहमियां लोगों के मन में हैं। मैं कुछ तथ्य आपके सामने रखूंगा। सत्य रखूंगा। फिर आपको जो सोचना है सोचिए।

ये कहते हुए भागवत ने सबसे पहले साफ किया कि संघ किसी प्रतिक्रिया या विरोध के कारण नहीं बना है... और न ही हमारी किसी से कोई प्रतियोगिता है। हम तो सिर्फ एकता और गुणवत्ता के आधार पर समाज को खड़ा करना चाहते हैं। उन्होंने साफ किया कि- sangh is for fulfil not to destroy.

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संघ में लगभग साठ लाख स्वयं सेवक

अपने भाषण में मोहन भागवत ने भारत, धर्म और हिंदू शब्दों की व्याख्या भी की। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द एडजेक्टिव है प्रॉपर नाउन नहीं। इसी तरह भारत को उन्होंने स्वभाव बताया।

हिंदुओं की व्याख्या करते हुए भागवत बोले कि इन दिनों देश में चार तरह के हिंदू पाए जाते हैं। पहले वो जो जोर से बोलते हैं कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं। दूसरे वो जो कहते हैं कि हम हिंदू तो हैं, लेकिन इस पर गर्व क्या करना। तीसरे तरह के वो हिंदू हैं जो बोलते हैं घर के बाहर मत बोलो... घर के अंदर बोलो कि हम हिंदू हैं और चौथे वो जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं।

भागवत ने कहा कि हिंदुओं की जनसख्या तो अधिक है, लेकिन हिंदू का भाव कुछ कम है। भागवत का कहना था कि संघ में अभी लगभग साठ लाख स्वयं सेवक हैं। भारत की हिंदू जनसंख्या सौ करोड़ से भी ज्यादा है, उसे देखते हुए ये काफी कम है।

वर्ग-भाषा के भेदभाव मिटाकर एक हों

भागवत ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पंच परिवर्तन कार्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने सामाजिक समरसता के तहत समाज में जाति, वर्ग, भाषा और दूसरे भेदभावों के मिटाकर एक होने की बात कही। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वेदशी आचरण और नागरिक कर्तव्य के जरिए समाज को ताकतवर बनाने पर जोर दिया।



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