IAS संतोष वर्मा के खिलाफ BJP सांसद जनार्दन मिश्रा ने खोला मोर्चा, क्षत्रिय करणी सेना ने दी धमकी
Sourabh Bhatnagar | Nov 29, 2025, 10:31 IST
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'ब्राह्मण की बेटी' पर अमर्यादित टिप्पणी करने वाले IAS संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है। रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि...
अजाक्स के प्रांताध्यक्ष IAS संतोष वर्मा विवाद (IAS Santosh Verma controversy) राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
उनके ब्राह्मण विरोधी बयान का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। उन्होंने वर्मा के प्रमोशन पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर जांच करने की मांग की है।
इधर दूसरी तरफ विवाद और बढ़ गया है। क्षत्रिय करणी सेना के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने फेसबुक पर आईएएस वर्मा के खिलाफ आपत्तिजनक और उकसाने वाली पोस्ट डाल दी। राणा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह जहां भी दिखे, इसकी गाड़ी के चारों टायर चढ़ा देना, कुचलकर आमलेट बना देना।
कुल मिलाकर मामला लगातार गर्माता जा रहा है और फिलहाल इसके रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।
28 नवंबर 2025 को लिखे पत्र में सांसद मिश्रा ने तीन बड़े बिन्दु उजागर किए-
सांसद का कहना है कि साल 2021 में कोर्ट ने भी उनके चयन और प्रमाणीकरण को गलत बताया था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक वर्मा को पद और वेतन का लाभ नहीं मिलना चाहिए था, लेकिन फिर भी वे अपनी पोस्ट और सुविधाएं लेते रहे।
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मिश्रा ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि पहले भी वर्मा का नाम अदालत की अवमानना, अमर्यादित भाषा इस्तेमाल करने। साथ ही सरकारी काम में रुकावट पैदा करने जैसे मामलों में आया था। इसकी वजह से उन्हें जेल की सजा तक भुगतनी पड़ी थी।
कुल मिलाकर सांसद ने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की जांच हो और कोर्ट के आदेश के हिसाब से कार्रवाई की जाए।
सांसद मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा है कि आईएएस संतोष वर्मा का बयान किसी खास वर्ग के लिए अपमानजनक ही नहीं, बल्कि संविधान में दी गई समानता की भावना के भी खिलाफ है।
उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार जातियों के विकास, सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित योजनाओं को आगे बढ़ा रही है, उस समय वर्मा जैसे बड़े अधिकारी का विवादित और बांटने वाला बयान देना बिल्कुल गलत है। ऐसे बयान सरकार की अच्छी योजनाओं और छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
सांसद ने इस टिप्पणी को “संवेदनशीलता और प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ” बताया है। यानी साफ तौर पर कहा है कि इस तरह के शब्द और सोच किसी अधिकारी के पद और जिम्मेदारियों के लायक नहीं हैं।
क्षत्रिय करणी सेना के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने फेसबुक पर विवादित पोस्ट लिखी, जिसमें IAS वर्मा के खिलाफ हिंसक भाषा का उपयोग किया गया। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई और प्रशासन को निगरानी बढ़ानी पड़ी।
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इधर मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार देर रात आईएएस संतोष वर्मा को नोटिस भेज दिया था। नोटिस में उनसे 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है।
सरकार का कहना है कि 23 नवंबर 2025 को भोपाल में अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में वर्मा ने जो बयान दिया था, वह आईएएस अधिकारी से उम्मीद किए जाने वाले आचरण के बिल्कुल खिलाफ है।
नोटिस में यह भी साफ लिखा है कि वर्मा का बयान अनुशासनहीनता, मनमानी और गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। यानी सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि मामला बहुत गंभीर है और जवाब के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
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बयान को सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला माना गया। यह अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का उल्लंघन है। वर्मा को 7 दिन के भीतर अपना जवाब देना है। जवाब संतोषजनक न होने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। समय पर जवाब न मिलने की स्थिति में एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है।
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अजाक्स संगठन के प्रांतीय अधिवेशन के दौरान संतोष वर्मा (ias santosh verma bayan) को संगठन का नया प्रांताध्यक्ष चुना गया था। इस दौरान अपने भाषण में संतोष वर्मा (IAS संतोष वर्मा विवादित बयान) ने कहा था कि, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में आरक्षण (Reservation ) तब तक रहेगा, जब तक रोटी-बेटी का व्यवहार समान नहीं होता।
उनके ब्राह्मण विरोधी बयान का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। उन्होंने वर्मा के प्रमोशन पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर जांच करने की मांग की है।
इधर दूसरी तरफ विवाद और बढ़ गया है। क्षत्रिय करणी सेना के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने फेसबुक पर आईएएस वर्मा के खिलाफ आपत्तिजनक और उकसाने वाली पोस्ट डाल दी। राणा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह जहां भी दिखे, इसकी गाड़ी के चारों टायर चढ़ा देना, कुचलकर आमलेट बना देना।
कुल मिलाकर मामला लगातार गर्माता जा रहा है और फिलहाल इसके रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे।
सांसद ने उठाए गंभीर सवाल
सांसद की तीन प्रमुख मांगें
- विवादित टिप्पणी के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आचरण) नियम, 1968 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई
- अनुसूचित जाति के स्थान पर अनुसूचित जनजाति श्रेणी के आधार पर हुई चयन प्रक्रिया की जांच
- पूर्व में दोषी ठहराए जाने और चयन प्रक्रिया की कमियों को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति की समीक्षा
सांसद का कहना है कि साल 2021 में कोर्ट ने भी उनके चयन और प्रमाणीकरण को गलत बताया था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक वर्मा को पद और वेतन का लाभ नहीं मिलना चाहिए था, लेकिन फिर भी वे अपनी पोस्ट और सुविधाएं लेते रहे।
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मिश्रा ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि पहले भी वर्मा का नाम अदालत की अवमानना, अमर्यादित भाषा इस्तेमाल करने। साथ ही सरकारी काम में रुकावट पैदा करने जैसे मामलों में आया था। इसकी वजह से उन्हें जेल की सजा तक भुगतनी पड़ी थी।
कुल मिलाकर सांसद ने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की जांच हो और कोर्ट के आदेश के हिसाब से कार्रवाई की जाए।
एमपी सरकार के दो साल पूरे होने पर सर्वे में शामिल होने के लिए फोटो पर करें क्लिक...
IAS संतोष वर्मा बयान बांटने वाला
उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार जातियों के विकास, सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित योजनाओं को आगे बढ़ा रही है, उस समय वर्मा जैसे बड़े अधिकारी का विवादित और बांटने वाला बयान देना बिल्कुल गलत है। ऐसे बयान सरकार की अच्छी योजनाओं और छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
सांसद ने इस टिप्पणी को “संवेदनशीलता और प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ” बताया है। यानी साफ तौर पर कहा है कि इस तरह के शब्द और सोच किसी अधिकारी के पद और जिम्मेदारियों के लायक नहीं हैं।
ओकेंद्र राणा की पोस्ट से विवाद बढ़ा
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सरकार ने मांगा जवाब
सरकार का कहना है कि 23 नवंबर 2025 को भोपाल में अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में वर्मा ने जो बयान दिया था, वह आईएएस अधिकारी से उम्मीद किए जाने वाले आचरण के बिल्कुल खिलाफ है।
नोटिस में यह भी साफ लिखा है कि वर्मा का बयान अनुशासनहीनता, मनमानी और गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। यानी सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि मामला बहुत गंभीर है और जवाब के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
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यह लिखा है नोटिस में
आईएएस संतोष वर्मा का बयान क्या था?
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अजाक्स संगठन के प्रांतीय अधिवेशन के दौरान संतोष वर्मा (ias santosh verma bayan) को संगठन का नया प्रांताध्यक्ष चुना गया था। इस दौरान अपने भाषण में संतोष वर्मा (IAS संतोष वर्मा विवादित बयान) ने कहा था कि, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में आरक्षण (Reservation ) तब तक रहेगा, जब तक रोटी-बेटी का व्यवहार समान नहीं होता।
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