IAS संतोष वर्मा के फर्जी बरी कोर्ट आर्डर में निलंबित न्यायाधीश रावत को मिली जमानत

Sanjay Gupta | Dec 05, 2025, 22:35 IST
Share
judge raut bail
Photograph: (THESOOTR)

इंदौर के न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत को फर्जी बरी कोर्ट आदेश मामले में अग्रिम जमानत मिल गई है। उन्हें यह राहत उस समय मिली जब पुलिस गिरफ्तारी का खतरा महसूस कर रही थी। रावत और आईएएस संतोष वर्मा के बीच 114 बार मोबाइल पर बात हुई थी।

INDORE. ब्राह्मण पर विवादित बयान देने वाले IAS संतोष वर्मा के पुराने केस में उन्हें बरी करने वाले न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत को इंदौर जिला कोर्ट से राहत मिल गई है। इस मामले में हाईकोर्ट से मंजूरी के बाद उन्हें पुलिस से गिरफ्तारी का डर सता रहा था। इसलिए उन्होंने अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया था। इसमें राहत मिल गई है।

जिला कोर्ट ने मंजूर की जमानत

न्यायाधीश प्रकाश कसेर की कोर्ट में निलंबित न्यायाधीश रावत द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन 3 दिसंबर को लगाया गया था। इसमें सुनवाई के बाद कोर्ट ने आर्डर रिजर्व रख लिया था जो 5 दिसंबर को जारी कर दिया गया। इसमें रावत की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया गया है।

सुनवाई में यह हुए थे खुलासे- 114 बार हुई बात

शासकीय लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर ने न्यायाधीश रावत की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए पुलिस अनुसंधान में सामने आई बातें कोर्ट को बताई थी जो चौंकाने वाली थी। इसमें बताया गया था कि रावत और आईएएस संतोष वर्मा के बीच में एक-दो बार नहीं बल्कि 114 बार मोबाइल पर बात हुई है। दोनों के कई बार मोबाइल की टावर लोकेशन समान रही है। दोनों की कई बार लोकेशन भी एक रही है।

ये खबर भी पढ़ें...

इंदौर MY अस्पताल के डॉक्टर ने कट लेकर सुरेश भदौरिया के इंडेक्स अस्पताल भेजा



आदेश सुबह 4 से 7 बजे के बीच हुआ टाइप

रावत का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता व पूर्व न्यायाधीश विष्णु सोनी ने कहा था कि कोर्ट में 6 अक्टूबर जब का आदेश टाइप होना बताया गया उस दिन वह छुट्टी पर थे। यह आदेश फर्जी है और उनकी कोर्ट से पास नहीं हुआ है।

वहीं लोक अभियोजक राठौर ने पुलिस जांच के आधार पर बताया था कि जो जानकारी मिली है इसके अनुसार सुबह 4 से 7 के बीच में यह आदेश कोर्ट के कम्प्यूटर में टाइप हुआ है। इसके बाद रावत छुट्टी पर गए थे। इस आदेश की कॉपी भी डीपीसी में आईएएस संतोष वर्मा ने लगाई थी, जिसके आधार पर उनकी पदोन्नति हुई और वह आईएएस बने।

order-judge-raut-bail
order-judge-raut-bail


ये खबर भी पढ़ें...

भोपाल-इंदौर आईटी पार्क की 13.57 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण, जहां बनना था कॉल सेंटर, मिला नर्सिंग कॉलेज

न्यायाधीश रावत के खिलाफ जांच की मिली है मंजूरी

रावत हाल ही में करीब 20 दिन पहले निलंबित हुए हैं। उधर इस केस में पुलिस को हाईकोर्ट ने आगे जांच करने और कोर्ट से दस्ताेज लेने, पूछताछ करने की मंजूरी दी है। इसी मंजूरी के बाद अब अब रावत ने जिला कोर्ट में अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया था। जबकि वह खुद केस में पहले फरियादी रहे हैं। पुलिस वर्मा के कोर्ट केस से बरी होने वाले आदेश की सच्चाई पता करने के लिए जांच कर रही है।

ये खबर भी पढ़ें...

इंदौर में BJP नौ विधानसभा सीट 4.18 लाख वोट से जीती थी, अब 5 लाख मतदाता गायब, SIR से खुलासा

मोबाइल नहीं दे रहे हैं रावत

बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस मामले में न्यायाधीश रावत से कई जानकारियां और मोबाइल मांगा है। लेकिन उन्होंने पुलिस को बताया कि मोबाइल टूट गया है। बताया जा रहा है कि पुलिस इस मामले में कोर्ट के कम्प्यूटर से आर्डर की कापी ले चुकी है और कुछ अन्य दस्तावेज भी ले चुकी है। इसके बाद ही मामला उलझ गया है।

ये खबर भी पढ़ें...

इंदौर रियल एस्टेट गिरा, कॉलोनी विकास आवेदन एक तिहाई हुए, रजिस्ट्री आय टारगेट से पीछे

वर्मा के लिए जरूरी था बरी होने का आदेश

यह आदेश वर्मा के लिए बहुत जरूरी था, बिना बरी आदेश के वह आईएएस नहीं बन सकते थे। इसलिए पदोन्नति डीपीसी के पहले यह आदेश लेना उनकी प्राथमिकता थी। बताया जाता है कि इसी के चलते यह आदेश बना और इसे डीसीपी के समय दिया गया, इसके बाद ही उन्हें आईएएस अवार्ड हो सका।

वर्मा पर एक युवती ने आरोप लगाए थे

प्रशासनिक अधिकारी संतोष वर्मा पर एक युवती ने आरोप लगाए थे। इस केस के चलते उनके पदोन्नत होकर आईएएस बनने की राह में रोड़ा आ गया था। आरोप है कि इस मामले में बरी होने का फर्जी आदेश पारित कराया था।

खुद न्यायाधीश रावत ने कराई थी शिकायत

एमजी रोड थाने में 27 जून 2021 को यह फर्जी कोर्ट आदेश बनाने का केस दर्ज हुआ था। इसमें अज्ञात आरोपी पर आईपीसी धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 व 472 में केस हुआ था। अपराध होने का समय 6 अक्टूबर 2020 बताया गया। थाने में न्यायाधीश विजेंद्रसिंह रावत द्वारा केस दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था।

आवेदन में न्यायाधीश रावत ने कहा कि- लसूडिया थाने में संतोष वर्मा पर दर्ज एफआईआर क्रमांक 851/2016 (धारा 323, 294 व 506) का फौजदारी केस 1621/2019 चल रहा है।

यह केस अन्य कोर्ट से ट्रांसफर होकर मेरी (न्यायाधीश रावत) कोर्ट में 3 अक्टूबर 2020 को चढ़ाया गया। सुनवाई के लिए 23 नवंबर 2020 लगाई गई। फिर इसमें साक्ष्य क्े लिए 22 फरवरी 2021 तारीख लगाई गई। फिर अगली तारीख 31 मई 2021 लगी।

इस मामले में मेरी कोर्ट द्वारा 6 अक्टूबर 2020 को कोई आदेश पारित नहीं किया गया। कोर्ट की डायरी व सीआईएस में इस दिन का कोई रिकार्ड नहीं है। ना ही इस दिन मेरे हस्ताक्षर से कोई निर्णय हुआ। मेरी पत्नी बीमार है इसलिए इस दिन 6 अक्टूबर को मैं अवकाश पर था।

जिला अभियोजन अधिकारी अकरम शेख द्वारा मौखिक तौर पर मेरी कोर्ट में आकर यह बताया गया कि इस केस में समझौता हो गया है इस आधार पर निर्णय हुआ है और इसकी स्कैन कापी है। इसमें भी इस निर्णय की तारीख 6 अक्टूबर लिखी हुई थी। सील मेरी कोर्ट की लगी थी और हस्ताक्षर अंग्रेजी में अपठनीय थे। लेकिन इस दिनांक को मेरे द्वारा कोई आदेश नहीं किए गए। यह फैसला कॉपी कूटरचित तैयार की गई है।



Tags:
  • इंदौर जिला कोर्ट
  • हाईकोर्ट
  • फर्जी आदेश
  • आईएएस संतोष वर्मा
  • न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा