इंदौर जनसुनवाई में हंगामे के बाद सीएम मोहन यादव ने लिया संज्ञान, तुरंत किया समाधान
Jitendra Shrivastava | Feb 07, 2026, 19:01 IST
Photograph: (THESOOTR)
इंदौर में जनसुनवाई पर हंगामा हुआ। मजदूर ने प्रशासन से कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। इसके बाद सीएम मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लिया और कार्रवाई के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने X पर पोस्ट कर बताया कि मजदूर की समस्या का समाधान किया गया है।
News In Short
सीएम मोहन यादव ने तुरंत पेंशन प्रक्रिया शुरू की।
अरविंदो अस्पताल में इलाज की व्यवस्था की गई।
परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
BLO द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की।
News In Detail
इंदौर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक गरीब मजदूर ने जनसुनवाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उसने कहा कि हर मंगलवार अपनी मजदूरी छोड़कर वह प्रशासन से समाधान की उम्मीद करता है, लेकिन उसकी शिकायतों का न तो कोई समाधान हुआ और न ही कार्रवाई की गई।
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मुख्यमंत्री ने की तुरंत कार्रवाई
इंदौर में हुए इस प्रकरण को संज्ञान लेते हुए श्री दिनेश प्रजापत जी एवं उनकी माता श्रीमती रामप्यारी बाई जी की समस्या का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया गया है। परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल KYC कर पेंशन प्रक्रिया शुरू कराई गई एवं अरविंदो अस्पताल में उपचार की व्यवस्था की गई है।… https://t.co/dmEAGf81rk pic.twitter.com/I0bMNPsLfE
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 7, 2026
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पेंशन और इलाज की व्यवस्था
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ा गया
दिनेश की समस्या का समाधान
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ये था मामला...
indore jan sunwai
दरअसल, इंदौर कलेक्टर कार्यालय में साप्ताहिक जनसुनवाई में एक गरीब मजदूर दिनेश प्रजापत ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित ने कहा कि वह हर मंगलवार अपनी मजदूरी छोड़कर जनसुनवाई में आता है, लेकिन उसकी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हुआ। उसने आरोप लगाया कि जनसुनवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है और जमीनी स्तर पर गरीबों की कोई सुनवाई नहीं हो रही।
गुस्से में आकर पीड़ित व्यक्ति ने प्रशासन से सवाल किया कि जब समस्याओं का समाधान नहीं करना है, तो हर मंगलवार होने वाली जनसुनवाई को बंद कर दिया जाए और गरीबों के साथ दिखावा न किया जाए। दिनेश वर्मा की मुख्य समस्या यह थी कि उसकी मां की पेंशन एक साल से नहीं मिल रही थी और उसका नाम भी वोटर लिस्ट से काट दिया गया था। यही फरियाद लेकर वह कलेक्टर कार्यालय पहुंचा था।
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