इंदौर के शराब ठेके में बेंगलुरु की कंपनी की एंट्री, सबसे महंगे ग्रुप से सूरज रजक बाहर
Sanjay Gupta | Mar 05, 2026, 13:09 IST
indore liquor contract auction bengaluru company entry suraj rajak
इंदौर आबकारी ठेके के लिए ई-टेंडर खुलने शुरू हो गए हैं। इसमें बड़ा उलटफेर हुआ है और ठेकेदार सूरज रजक को झटका लगा है। वहीं बेंगलुरु की कंपनी की एंट्री हुई है।
INDORE. इंदौर जिले के दो हजार 102 करोड़ के लिए 56 दुकान ग्रुप के ठेके शुरू हो गए हैं। इसमें इस बार आबकारी विभाग को खासी सफलता मिलती दिख रही है।
अभी तक हुए ठेके में बेस प्राइस से भी अधिक कीमत मिली है। यह बेस प्राइस पहले ही 20 प्रतिशत अधिक बढ़ाकर तय की गई थी।
वहीं अब तक सबसे बड़े ग्रुप का ठेका लेने वाले ठेकेदार सूरज रजक को झटका लगा है। उन्हें पीछे कर बेंगलुरु की कंपनी ने पहली बार इंदौर में एंट्री की है।
इंदौर के सबसे महंगे ग्रुप इंदौर वन (स्कीम 54) की बेस प्राइस कीमत 134 करोड़ 95 लाख रुपए थी। इसी में सबसे महंगी शराब दुकान स्कीम 54 की 49 करोड़ 54 लाख रुपए थी। यह ग्रुप अभी तक सूरज रजक के पास था।
वहीं, इस बार बेंगलुरु की केटालिस्ट ब्रेवरीज एलएलपी ने यह ठेका बेस प्राइस से भी अधिक कीमत पर 154 करोड़ में उठा लिया है।
इस ग्रुप में स्कीम 54 की दुकान के साथ ही स्कीम 78 की दुकान, लसूडिया गोदाम नंबर वन, लसूडिया मोरी की दुकान और निरंजनपुर की कुल पांच दुकानें शामिल हैं।
वहीं इस कंपनी ने इसके साथ ही अन्य प्रमुख ग्रुप एमआईजी (इंदौर चार) को भी लिया, जो 98 करोड़ के बेस प्राइस का था। उसे भी बेंगलुरु की कंपनी ने ले लिया है।
यहां से भी शराब ठेकेदार सूरज रजक बाहर हो गए हैं। बेंगलुरु कंपनी ने इसे बेस प्राइस से अधिक पर 111 करोड़ में खरीदा है। इस ग्रुप में एमआईजी की 40 करोड़ की महंगी दुकान के साथ ही रामकृष्णबाग, भमोरी चौराहा की भी दुकान शामिल है।
कंपनी बेंगलुरु में रजिस्टर है। इसके डायरेक्टर ऑन रिकॉर्ड अंशुराज सिंह चौहान और ओमप्रकाश परवानी हैं। हालांकि माना जा रहा है कि बाहर की कंपनी के पीछे इंदौर या मध्य प्रदेश का ही कोई बड़ा निवेशक भी होगा, तभी कंपनी इंदौर में आई है। वहीं, इस ग्रुप के बड़े ठेके को अधिक कीमत पर लेने से आबकारी विभाग को बड़ी राहत मिली है।
मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में जहां अभी ठेकों को लेकर अनिश्चितता है। कई लाइसेंसी सामने नहीं आए हैं। वहीं इंदौर के ठेके सरकार का खजाना भर रहे हैं। यहां बेस प्राइस की कीमत से भी अधिक पर ठेके जा रहे हैं।
इसके पीछे कलेक्टर शिवम वर्मा और सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी द्वारा ग्रुपिंग के लिए की गई सही योजना को माना जा रहा है। इस बार ग्रुप 56 किए गए और इसमें दुकान को इस तरह समायोजित किया गया कि अधिक बिक्री वाली दुकान के साथ कम बिक्री वाली दुकान भी रखी गई।
इसके चलते 5 ग्रुप जो 452 करोड़ कीमत के थे वह 498 करोड़ में गए हैं। वहीं 6 ग्रुप जो 143 करोड़ में थे वह 149 करोड़ में गए हैं। इस तरह 647 करोड़ का राजस्व विभाग अभी तक प्राप्त कर चुका है। कुल लक्ष्य दो हजार 101 करोड़ है। अभी करीब दस दिन और ई-टेंडर प्रक्रिया चलेगी।
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अभी तक हुए ठेके में बेस प्राइस से भी अधिक कीमत मिली है। यह बेस प्राइस पहले ही 20 प्रतिशत अधिक बढ़ाकर तय की गई थी।
वहीं अब तक सबसे बड़े ग्रुप का ठेका लेने वाले ठेकेदार सूरज रजक को झटका लगा है। उन्हें पीछे कर बेंगलुरु की कंपनी ने पहली बार इंदौर में एंट्री की है।
बेंगलुरु की कंपनी ने ली महंगी दुकान
वहीं, इस बार बेंगलुरु की केटालिस्ट ब्रेवरीज एलएलपी ने यह ठेका बेस प्राइस से भी अधिक कीमत पर 154 करोड़ में उठा लिया है।
इस ग्रुप में स्कीम 54 की दुकान के साथ ही स्कीम 78 की दुकान, लसूडिया गोदाम नंबर वन, लसूडिया मोरी की दुकान और निरंजनपुर की कुल पांच दुकानें शामिल हैं।
यहां भी बेंगलुरु कंपनी पहुंची
यहां से भी शराब ठेकेदार सूरज रजक बाहर हो गए हैं। बेंगलुरु कंपनी ने इसे बेस प्राइस से अधिक पर 111 करोड़ में खरीदा है। इस ग्रुप में एमआईजी की 40 करोड़ की महंगी दुकान के साथ ही रामकृष्णबाग, भमोरी चौराहा की भी दुकान शामिल है।
किसकी है यह कंपनी
प्रशासन और आबकारी की योजना चली
इसके पीछे कलेक्टर शिवम वर्मा और सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी द्वारा ग्रुपिंग के लिए की गई सही योजना को माना जा रहा है। इस बार ग्रुप 56 किए गए और इसमें दुकान को इस तरह समायोजित किया गया कि अधिक बिक्री वाली दुकान के साथ कम बिक्री वाली दुकान भी रखी गई।
इसके चलते 5 ग्रुप जो 452 करोड़ कीमत के थे वह 498 करोड़ में गए हैं। वहीं 6 ग्रुप जो 143 करोड़ में थे वह 149 करोड़ में गए हैं। इस तरह 647 करोड़ का राजस्व विभाग अभी तक प्राप्त कर चुका है। कुल लक्ष्य दो हजार 101 करोड़ है। अभी करीब दस दिन और ई-टेंडर प्रक्रिया चलेगी।
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