इंदौर के ये SDM क्या बना रहे फर्जी जाति प्रमाणपत्र? एमपी विधानसभा में सवाल, सभी की कॉपी मांगी
Sanjay Gupta | Feb 26, 2026, 13:32 IST
indore sdm fake caste certificate controversy assembly question
इंदौर के एसडीएम घनश्याम धनगर पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए सभी जारी प्रमाणपत्रों की जांच और प्रतियों की मांग की है।
INDORE. इंदौर के एक एसडीएम को लेकर एमपी विधानसभा में सवाल खड़ा हो गया है। इन पर विधायक ने आशंका जताई है कि यह फर्जी जाति प्रमाणपत्र बना रहे हैं। विधायक के पास कुछ ऐसे प्रमाणपत्र और इसकी शिकायत पहुंची थी कि यह पैसे लेकर बनाए गए हैं।
मनावर के आदिवासी विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने इस मामले पर सवाल उठाया है। यह सवाल एसडीएम जूनी इंदौर घनश्याम धनगर से जुड़ा है।
विधायक ने इस संबंध में सीधे सीएम मोहन यादव से ही विधानसभा में सवाल पूछा है। उन्होंने जानकारी मांगी है कि एसडीएम धनगर ने इंदौर व अन्य जिलों में कब से कब तक एसडीएम पद संभाला है। साथ ही, उन्होंने अपनी नियुक्ति से अब तक कितने जाति प्रमाणपत्र जारी किए हैं।
विधायक ने इन सभी जाति प्रमाणपत्रों की कॉपी मांगी है। साथ ही पूछा है कि क्या एसडीएम धनगर ने इन्हें जारी करते हुए साल 1950 के क्राइटेरिया का पालन किया या नहीं। विधायक ने विस्तार से इस पर जानकारी मांगी है।
सीएम मोहन यादव ने इस संबंध में विधानसभा में विधायक अलावा को आश्वासन दिया है। सीएम ने कहा कि वह इसकी जानकारी एकत्र कर रहे हैं। जानकारी जमा होने के बाद यह विधायक को दी जाएगी।
विधायक अलावा से द सूत्र ने सीधी बात की और पूछा कि आखिर उन्होंने यह सवाल क्यों उठाया है। इस पर उन्होंने बताया कि उनके पास एसडीएम से जुड़ी कई शिकायतें आई थीं।
अलावा ने बताया कि एसडीएम ने एक बच्ची, रिया कुमारी का आदिवासी (एसटी) प्रमाणपत्र बनाया था। इसके आधार पर उसका नीट में चयन हुआ और इंदौर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला था। वहीं, जब वहां जांच हुई, तो प्रमाणपत्र गलत पाया गया था।
यही नहीं, उसी लड़की का बाहर राज्य में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) का प्रमाणपत्र भी बना हुआ था। इसके अलावा और भी कुछ शिकायतें आई थीं। इसी वजह से हमने सरकार से एसडीएम के जरिए जारी किए गए सभी प्रमाणपत्रों की जानकारी मांगी है।
वहीं इस मामले में एसडीएम ने कहा कि संबंधित प्रमाणपत्र सामने आए तो इसकी जांच करा लेंगे। प्रमाणपत्र बनाने में पूरी सतर्कता बरती जाती है। इसके लिए काफी सख्त नियम हैं।
जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए पूरी विधिवत प्रक्रिया है। इसमें तहसीलदार से रिपोर्ट ली जाती है। सभी डॉक्यूमेंट जांचे जाते हैं और फिर एसडीएम जारी करता है।
वहीं, ऑनलाइन सिस्टम के बाद इसमें गैंग भी सक्रिय हो गई है। यह काम अक्सर लोकसेवा स्तर या निचले स्तर पर होता है। यहां पासवर्ड रखने वाले बाबू किसी तरीके से एसडीएम को बिना बताए जाति प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। बदले में मोटी रकम ली जाती है।
कुछ समय पहले इंदौर के मल्हारगंज इलाके में ऐसे ही कुछ लोग पकड़े गए थे। वे निचले स्तर पर जाति प्रमाणपत्र बनाने का धंधा चला रहे थे और भारी रकम वसूल रहे थे।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन प्रमाणपत्रों में एसडीएम की सीधी भूमिका है या नहीं, क्योंकि फर्जी प्रमाणपत्र बनाने पर फौजदारी का मामला बनता है। इस पर कोई भी अधिकारी उलझेगा तो बड़ा सवाल उठेगा।
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विधायक अलावा ने उठाया एसडीएम धनगर पर सवाल
विधायक ने इस संबंध में सीधे सीएम मोहन यादव से ही विधानसभा में सवाल पूछा है। उन्होंने जानकारी मांगी है कि एसडीएम धनगर ने इंदौर व अन्य जिलों में कब से कब तक एसडीएम पद संभाला है। साथ ही, उन्होंने अपनी नियुक्ति से अब तक कितने जाति प्रमाणपत्र जारी किए हैं।
विधायक ने इन सभी जाति प्रमाणपत्रों की कॉपी मांगी है। साथ ही पूछा है कि क्या एसडीएम धनगर ने इन्हें जारी करते हुए साल 1950 के क्राइटेरिया का पालन किया या नहीं। विधायक ने विस्तार से इस पर जानकारी मांगी है।
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सीएम ने यह दिया आश्वासन
क्या बोले विधायक अलावा, क्यों लगाया सवाल
अलावा ने बताया कि एसडीएम ने एक बच्ची, रिया कुमारी का आदिवासी (एसटी) प्रमाणपत्र बनाया था। इसके आधार पर उसका नीट में चयन हुआ और इंदौर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला था। वहीं, जब वहां जांच हुई, तो प्रमाणपत्र गलत पाया गया था।
यही नहीं, उसी लड़की का बाहर राज्य में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) का प्रमाणपत्र भी बना हुआ था। इसके अलावा और भी कुछ शिकायतें आई थीं। इसी वजह से हमने सरकार से एसडीएम के जरिए जारी किए गए सभी प्रमाणपत्रों की जानकारी मांगी है।
एसडीएम क्या बोल रहे हैं
कलेक्ट्रेट में इसके लिए गैंग भी चलती है
वहीं, ऑनलाइन सिस्टम के बाद इसमें गैंग भी सक्रिय हो गई है। यह काम अक्सर लोकसेवा स्तर या निचले स्तर पर होता है। यहां पासवर्ड रखने वाले बाबू किसी तरीके से एसडीएम को बिना बताए जाति प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। बदले में मोटी रकम ली जाती है।
कुछ समय पहले इंदौर के मल्हारगंज इलाके में ऐसे ही कुछ लोग पकड़े गए थे। वे निचले स्तर पर जाति प्रमाणपत्र बनाने का धंधा चला रहे थे और भारी रकम वसूल रहे थे।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन प्रमाणपत्रों में एसडीएम की सीधी भूमिका है या नहीं, क्योंकि फर्जी प्रमाणपत्र बनाने पर फौजदारी का मामला बनता है। इस पर कोई भी अधिकारी उलझेगा तो बड़ा सवाल उठेगा।
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