IT के फर्जी रिफंड क्लेम वालों पर मप्र सहित 6 राज्यों में 150 जगह आयकर छापे, AI और खुफिया जानकारी से बनी लिस्ट
Sanjay Gupta | Jul 14, 2025, 19:21 IST
Photograph: (The Sootr)
आयकर विभाग ने 6 राज्यों में 150 ठिकानों पर छापे मारे। ये छापे फर्जी रिफंड क्लेम करने वाले रैकेट के खिलाफ थे। जांच में बिचौलियों और करदाताओं की मिलीभगत सामने आई।
INDORE. मध्य प्रदेश में आयकर विभाग ने इंदौर और देवास में छापे मारे। यह कार्रवाई देशभर के 6 राज्यों में 150 से ज्यादा जगहों पर की गई। यह मामला फर्जी तरीके से आयकर रिफंड (TDS Refund) लेने का है, जिसमें दलाल, सीए और कंसल्टेंट्स मिलकर रिटर्न दाखिल कर रहे थे। इन रिटर्न में झूठी कटौतियां और छूट दिखाकर ज्यादा रिफंड लिया जा रहा था। जांच से कुछ आईटीआर (ITR) तैयार करने वालों और बिचौलियों द्वारा संचालित संगठित रैकेट का पर्दाफाश हुआ है।
आयकर विभाग लंबे समय से इनकी जांच कर रहा था जो अपने रिटर्न में गलत जानकारी देकर आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली छूट का बेजा फायदा उठाकर इंकम टैक्स रिफंड ले रहे हैं। इसके लिए आईटी ने खुफिया जानकारी जुटाने के साथ ही एआई का यूज करते हुए करदाताओं की स्क्रूटनी की और पूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश में हाल ही में की गई तलाशी और जब्ती की कार्रवाइयों से इन निष्कर्षों की पुष्टि होती है, जहां विभिन्न समूहों और संस्थाओं द्वारा धोखाधड़ी वाले दावों के सबूत पाए गए।
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आयकर विभाग को सभी जानकारियों के एनालिस से पता चला कि धारा 10(13A), 80GGC, 80E, 80D, 80EE, 80EEB, 80G, 80GGA, और 80DDB के तहत कटौतियों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। बिना किसी ठोस कारण के छूट का दावा किया गया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्यमियों के कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं।
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आयकर विभाग ने सोमवार को देश भर में कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य आयकर रिटर्न (आईटीआर) में कटौती और छूट के फर्जी दावे करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को लक्षित करना था। यह कार्रवाई आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कर लाभों के दुरुपयोग, जो अक्सर पेशेवर बिचौलियों की मिलीभगत से होता है।
जांच से कुछ आईटीआर तैयार करने वालों और बिचौलियों द्वारा संचालित संगठित रैकेट का पर्दाफ़ाश हुआ है, जो फर्जी कटौतियों और छूटों का दावा करते हुए रिटर्न दाखिल कर रहे थे। कुछ लोग अत्यधिक रिफंड का दावा करने के लिए झूठे टीडीएस रिटर्न भी जमा करते हैं।
आयकर विभाग द्वारा लगातार यह मुहिम चलाई जा रही थी इसके तहत, पिछले चार महीनों में लगभग 40,000 करदाताओं ने अपने रिटर्न अपडेट किए हैं और स्वेच्छा से 1,045 करोड़ रुपए के झूठे दावे वापस लिए हैं। इसके बाद भी अभी भी कई ने यह रिटर्न वापस नहीं लिए हैं। इसके बाद यह देशव्यापी छापामारी की गई। फिलहाल आगे की जांच चल रही है। सीबी़डीटी के आधिकारिक प्रवक्ता आयकर आयुक्त (मीडिया व तकनीकी नीति) वी. रजिता द्वारा यह जानकारी जारी की गई है।
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आयकर की छापेमारी
एआई, खुफिया जानकारी से बनाई लिस्ट
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कंपनियों के साथ उद्योगपति, सार्वजनिक उपक्रम सभी शामिल
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5 पॉइंट्स में समझें पूरी खबरदेशभर में आयकर विभाग की छापेमारी: आयकर विभाग ने 6 राज्यों में 150 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई फर्जी रिफंड लेने वाले करदाताओं, सीए और बिचौलियों के खिलाफ की गई।फर्जी कटौती और रिफंड का मामला: जांच में पाया गया कि लोग झूठे टीडीएस रिटर्न और फर्जी कटौती का दावा करते हुए रिटर्न दाखिल कर रहे थे। इन धोखाधड़ी वाले दावों के लिए बिचौलिए और आईटीआर तैयार करने वाले संगठनों का गठजोड़ था। आधुनिक तकनीक का उपयोग: आयकर विभाग ने एआई और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर करदाताओं की स्क्रूटनी की। इसके बाद देशभर में छापेमारी की गई और धोखाधड़ी के सबूत मिले। कमीशन के लालच में फंसे करदाता: करदाताओं को बढ़े हुए रिफंड का लालच देकर उन्हें धोखाधड़ी वाली योजनाओं में फंसाया गया। ये लोग अस्थायी ईमेल आईडी के जरिए बड़े पैमाने पर रिटर्न दाखिल करते थे। फर्जी रिफंड का खुलासा: पिछले चार महीने में 40,000 करदाताओं ने 1,045 करोड़ रुपए के झूठे रिफंड दावे वापस किए। आयकर विभाग अभी भी इस मामले की जांच कर रहा है। |
कमीशन का लालच देकर हुआ काम
आईटी को पता चला कि करदाताओं को अक्सर कमीशन के बदले में बढ़े हुए रिफंड का वादा करके इन धोखाधड़ी वाली योजनाओं में फंसाया जाता है। देखा गया है कि ऐसे आईटीआर तैयार करने वाले अक्सर केवल बल्क रिटर्न दाखिल करने के लिए अस्थायी ईमेल आईडी बनाते हैं, जिन्हें बाद में छोड़ दिया जाता है, इसमें बाद में आयकर के नोटिस भी नहीं देखे जाते हैं।
आयकर कार्रवाई में बिचौलिए भी शामिल
जांच से कुछ आईटीआर तैयार करने वालों और बिचौलियों द्वारा संचालित संगठित रैकेट का पर्दाफ़ाश हुआ है, जो फर्जी कटौतियों और छूटों का दावा करते हुए रिटर्न दाखिल कर रहे थे। कुछ लोग अत्यधिक रिफंड का दावा करने के लिए झूठे टीडीएस रिटर्न भी जमा करते हैं।
चार महीने में ही 1045 करोड़ के फर्जी रिफंड चिन्हित हुए
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