जबलपुर क्रूज हादसे में बड़ा खुलासा: अफसरों को पहले से ही पता था कि पानी में उतरने लायक नहीं था क्रूज
Neel Tiwari | May 13, 2026, 14:51 IST
jabalpur bargi dam cruise accident officials negligence report
जबलपुर क्रूज हादसे में अब ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए गोपनीय पत्रों से पता चला है कि अधिकारियों को पहले से मालूम था कि क्रूज का इंजन ठीक नहीं है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- मैकल रिसॉर्ट प्रबंधक ने कई पत्र लिखकर चेतावनी दी थी।
- जिस क्रूज से हादसा हुआ, उसका एक इंजन फेल था।
- मैकल सुता क्रूज को कई बार स्पीड बोट की मदद से किनारे लगाना पड़ता था।
- हादसे के बाद अब केवल चालक ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
गोपनीय पत्र ने खोली पर्यटन विभाग की पोल
वहीं, सामने आए गोपनीय पत्र ने यह साफ कर दिया है कि पर्यटन विभाग के अधिकारियों को पहले से इस खतरे की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद क्रूज संचालन बंद नहीं किया गया और पर्यटकों की जान जोखिम में डाल दी गई।
thesootr पर देखें गोपनीय पत्र...
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20 साल पुराने क्रूज पर कराई जा रही थी सैर
पत्र में साफ लिखा गया कि क्रूज के इंजन बार-बार खराब हो रहे थे। साथ ही, अब उनकी मरम्मत भी प्रभावी नहीं रह गई थी। इसके बावजूद पर्यटन विभाग ने संचालन जारी रखा, जिससे बड़ा हादसा हो गया।
रेवा क्रूज पहले ही हो चुका था बंद
अब सवाल ये उठ रहा है कि जब एक क्रूज को तकनीकी रूप से अनुपयोगी (unfit) घोषित कर दिया गया था, तो फिर पुराने क्रूज को पर्यटकों के लिए पानी में क्यों उतारा जा रहा था?
तेज हवाओं में कंट्रोल करना था मुश्किल
इतना ही नहीं, दूसरे इंजन में भी बार-बार स्टार्टिंग की समस्या आ रही थी। साथ ही, सेल्फ की गरारी चढ़ जाने के कारण सेवाएं बंद करनी पड़ती थीं। इसके बावजूद पर्यटक सैर लगातार जारी रखी गई।
तीन-तीन पत्र भेजे गए, फिर भी नहीं जागे अफसर
इसके बावजूद, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग और अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब एमपीटी के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी इस पूरी स्थिति की जानकारी थी, तो फिर पर्यटकों को जानलेवा क्रूज यात्रा पर क्यों भेजा गया?
यदि इंजन की खराबी की जानकारी मुख्यालय तक पहुंची थी तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और अगर जानकारी नहीं पहुंची, तो फिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
हादसा नहीं, सिस्टम की लापरवाही का परिणाम
यदि समय रहते इंजनों को बदल दिया जाता या क्रूज का संचालन रोक दिया जाता, तो कई परिवार आज इस हादसे से बच सकते थे। अब हादसे के बाद ये आवाज उठ रही है कि सिर्फ चालक या निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामला खत्म न किया जाए, बल्कि उन वरिष्ठ अधिकारियों की भी निष्पक्ष जांच हो, जिन्होंने खतरे की जानकारी होने के बावजूद संचालन की अनुमति दी। सरकार ने इस मामले में हाई लेवल कमेटी बनाई है, और अब जब ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, तो जिम्मेदारों की भूमिका तय होना तो तय है।
क्या है जबलपुर क्रूज हादसा ?
इस हादसे में लगभग 13 लोगों की मौत हो गई है। इनमें दिल्ली और तिरुचिरापल्ली के एक ही परिवार के कई लोग शामिल थे।
जानकारी के अनुसार घटना के वक्त करीब 5:30 बजे अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवाएं चलने लगी थी। इससे लहरें तेज हो गईं और क्रूज का संतुलन बिगड़ गया। जल्द ही पानी भरने लगा और क्रूज डूबने लगा।
जांच में यह सामने आया कि यात्रियों को समय पर लाइफ जैकेट नहीं दी गईं थी। जब नाव डूबने लगी, तब अफरा-तफरी में ये बांटी गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्रूज की क्षमता से ज्यादा लोग उसमें सवार थे यानी यह ओवरलोडेड था।
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