जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर को कोर्ट की फटकार, HC ने हलफनामे में मांगा जवाब

Neel Tiwari | Mar 01, 2025, 20:21 IST
Share
jabalpur high court order minimum wage payment water resources department
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।

जबलपुर हाईकोर्ट ने स्थायी कर्मचारियों के वेतनमान के मामले में याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस पर सही जवाब नहीं आता है, तो प्रिंसिपल सेक्रेटरी को भी मामले में प्रतिवादी बनाकर उन्हें पेश होने का आदेश दिया जा सकता है।

JABALPUR. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर कैबिनेट के निर्देशों को मनाना, जल संसाधन विभाग सहित सरकार को भी भारी पड़ सकता है। क्योंकि इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस पर सही जवाब नहीं आता है, तो प्रिंसिपल सेक्रेटरी को भी इस मामले में प्रतिवादी बनाकर उन्हें पेश होने का आदेश दिया जा सकता है।

जबलपुर हाईकोर्ट में जल संसाधन विभाग के महान नहर उप संभाग सीधी के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान पर भुगतान और बकाया रकम के भुगतान के लिए पूर्व में दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद भुगतान के आदेश जारी किए गए थे। भुगतान न होने पर कर्मचारियों के द्वारा अवमानना याचिका दायर की गई जिसमें सुनवाई के दौरान जल संसाधन विभाग के इंजीनियर इन चीफ के द्वारा कैबिनेट के द्वारा दिए गए आदेश में किस्तों में भुगतान किए जाने की जानकारी कोर्ट को दी गई। जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए इंजीनियर इन चीफ को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि क्या कैबिनेट हाईकोर्ट के फैसले में संशोधन कर सकती है। साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी है कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी को पक्षकार बनाने और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश भी दिया जा सकता है।

स्थायी कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान पर भुगतान का मामला

मध्य प्रदेश के जल संसाधन विभाग महान नहर उप मंडल सीधी में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के रूप में वर्गीकृत हो जाने के बावजूद भी न्यूनतम वेतनमान 5200-20200 ग्रेड पर 1900 रुपए ग्रेड पेपर भुगतान किए जाने के लिए हाईकोर्ट में पूर्व में एक याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नंदिता दुबे के द्वारा इस याचिका पर अंतरिम आदेश 8 अगस्त 2023 को जारी करते हुए यह निर्देश दिए गए थे कि इस याचिका में मौजूद प्रतिवादियों को याचिकाकर्ताओं को स्थायी कर्मचारियों के रूप में वर्गीकृत किए जाने की दिनांक से बिना वेतन वृद्धि के न्यूनतम वेतनमान पर भुगतान किया जाए साथ ही याचिकाकर्ताओं के वर्गीकरण को ध्यान में रखते हुए बकाया वेतन के लिए भी उन्हें हकदार बताया था। उन्होंने इस भुगतान के लिए आदेश के बाद 3 महीने का समय दिया गया था।

ये खबर भी पढ़ें... हाईकोर्ट कॉलेजियम और समितियों में SC, ST, OBC और महिलाओं के प्रतिनिधित्व की मांग

भुगतान न होने पर दायर की अवमानना याचिका

सीधी में महान नहर उप संभाग सीधी के दैनिक कर्मचारियों के द्वारा अगस्त 2023 में जारी न्यूनतम वेतनमान पर भुगतान किए जाने के आदेश पर जल संसाधन विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार की भुगतान संबंधी प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने पर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। जिसमें याचिकाकर्ताओं के द्वारा अगस्त 2023 में हुए आदेश के बाद भी भुगतान न किए जाने पर कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई, जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस द्वारकाधीश बंसल के द्वारा प्रतिवादियों को 7 दिन के अंदर भविष्य निधि के भुगतान किए जाने के लिए नोटिस जारी करने के आदेश जारी किए थे। जिस पर अगली सुनवाई में प्रतिवादियों की तरफ से अवमानना के आदेश के पालन के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था। इस मामले में हुई पिछली सुनवाई के दौरान जल संसाधन विभाग भोपाल के चीफ इंजीनियर को भी कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए गए थे।

कैबिनेट के संशोधन पर जताई नाराजगी

इस याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता विनोद कुमार देवड़ा न्यायालय में मौजूद रहे जिस पर कोर्ट के द्वारा उनसे पूछा गया की भुगतान क्यों नहीं किया गया है?... जिस पर उन्होंने बताया कि पहली किस्त का भुगतान किया जा चुका है। इस पर कोर्ट ने पूछा की क्या किस्तों में भुगतान किए जाने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया है, जिस पर मुख्य अभियंता के द्वारा बताया गया कि कैबिनेट के द्वारा तीन किस्तों में भुगतान किए जाने पर सहमति जताई गई है। इस जवाब पर कोर्ट के द्वारा नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग से पूछा गया है कि क्या कैबिनेट हाईकोर्ट के आदेशों को संशोधित कर सकती है।

ये खबर भी पढ़ें... कहीं आंगनबाड़ी सहायिकाओं की तरह ही तो नहीं लटक जाएगी सुपरवाइजर की भर्ती

तीन दिनों में हलफनामा दाखिल करने के आदेश

इस अवमानना याचिका पर सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई जिसमें सुनवाई के दौरान उन्होंने मुख्य अभियंता ( इंजीनियर इन चीफ) को कैबिनेट के द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों में संशोधित किए जाने के सवाल पर प्रधान सचिव के द्वारा सत्यापित अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किए जाने के लिए तीन दिन का समय दिया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जवाब प्रस्तुत न करने की स्थिति में प्रिंसिपल सेक्रेटरी को भी पक्षकार बनाकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित किए जाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। अब इस मामले की सुनवाई 6 मार्च 2025 को तय की गई है।

ये खबर भी पढ़ें...

भगोड़ा घोषित आरोपी को भी अग्रिम जमानत का अधिकार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

लोकायुक्त की कार्रवाई, खाद्य विभाग की महिला अधिकारी-ड्राइवर 40 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार

Tags:
  • Jabalpur High Court
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • जबलपुर न्यूज
  • अवमानना याचिका
  • वाटर रिसोर्सेज डिपार्टमेंट
  • जल संसाधन विभाग
  • हलफनामा
  • वेतनमान
  • सीधी न्यूज
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई