लोकायुक्त के प्रभारी DSP की बड़ी लापरवाही: ओरिजनल फाइल गुम, हाईकोर्ट सख्त- DGP को FIR के आदेश

Neel Tiwari | Jan 15, 2026, 14:53 IST
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जबलपुर हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की कामकाजी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक सख्त आदेश दिया। रिश्वत के मामले में लोकायुक्त के DSP द्वारा फाइल गुम करने को गंभीर लापरवाही माना गया।

News In short

  • लोकायुक्त के प्रभारी DSP द्वारा रिश्वत मामले की मूल फाइल गुम किए जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।
  • हाईकोर्ट ने DGP, विशेष पुलिस स्थापना को तत्काल FIR दर्ज करने के आदेश दिए।
  • प्रारंभिक जांच में तत्कालीन प्रभारी DSP ऑस्कर किंडो ने फाइल गुम होने की जिम्मेदारी स्वीकार की।
  • कोर्ट ने दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के भी निर्देश दिए।
  • याचिका वापस होने के बावजूद हाईकोर्ट ने FIR और कार्रवाई को अनिवार्य करार दिया।

News in detail

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने लोकायुक्त की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिश्वत से जुड़े एक मामले में लोकायुक्त के डीएसपी ऑस्कर किंडो द्वारा केस फाइल गुम करने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया।

अदालत ने पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), भोपाल को तत्काल FIR दर्ज करने का आदेश दिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा कि मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



रिश्वत के केस से जुड़ा है पूरा मामला

यह मामला PWD जबलपुर में काम करने वाले हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक से जुड़ा है। इन्हें जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने 26 अगस्त 2019 को एक कर्मचारी से 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। फिलहाल यह मामला ट्रायल कोर्ट में चल रहा है।

इसी मामले में ट्रायल कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को अनिल कुमार पाठक के आवाज के नमूने (वॉयस सैंपल) लेने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान चौंकाने वाला खुलासा

जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया जब लोकायुक्त ने यह स्वीकार किया कि मामले की ओरिजनल फाइल ही गुम हो गई है।

इस गंभीर लापरवाही पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और लोकायुक्त एसपी को तलब किया। कोर्ट के आदेश पर विशेष पुलिस स्थापना बनाई गई, और जबलपुर की पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटले कोर्ट में मौजूद हुईं। उन्होंने बताया कि फाइल गुम होने के मामले में प्रारंभिक जांच की गई थी।

DSP ने मानी गलती

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तत्कालीन प्रभारी DSP ऑस्कर किंडो, जिनका मूल पद निरीक्षक का था। इन्होंने फाइल गुम होने की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। यह तथ्य सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए सीधे शीर्ष स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दे दिए।

DGP को FIR और विभागीय जांच के आदेश

डिवीजन बेंच ने पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस स्थापना, भोपाल को आदेश दिया कि दोषी अधिकारी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए। साथ ही, तीन दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के पास भेजी जाए।

अदालत ने यह भी साफ किया कि संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति के चार साल की वैधानिक समय-सीमा अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए उसके खिलाफ विभागीय जांच भी जरूर शुरू की जाए।

याचिका वापस, लेकिन कार्रवाई होगी

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अनिल कुमार पाठक की ओर से अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

हालांकि, कोर्ट ने यह साफ शब्दों में कहा कि याचिका वापस लेने के बावजूद FIR दर्ज करने और दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई से जुड़े सभी निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।

लोकायुक्त की साख पर सवाल

हाईकोर्ट के इस आदेश ने लोकायुक्त जैसी अहम जांच एजेंसी की कामकाजी प्रक्रिया और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ओरिजनल फाइल का इस तरह गायब हो जाना न सिर्फ जांच को प्रभावित करता है, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि DGP स्तर से इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जाती है।

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